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विनीता धीमान

Abstract

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विनीता धीमान

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माँ की कोख भेदभाव नहीं करती

माँ की कोख भेदभाव नहीं करती

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रेखा बहू, आगे पानी है थोड़ा संभल कर चलना... मौसम बदल रहा है और बारिश से सड़क पर पानी भर गया है। थोड़ा संभाल कर पैर रखना। रामायणी ने अपनी 8 महीने की गर्भवती बहू से कहा

इस बार तो मैं पोते का मुँह देखूँगी फिर तो मैं 101 ब्राह्मणों को भोज करवाऊंगी तुम देख लेना... अच्छा मम्मी जी आपको कैसे पता कि इस बार लड़का ही होगा इससे पहले भी तो आप 2 बार कह चुके हो कि लड़का होगा लेकिन हुई तो लड़कियां रेखा ने अपनी सास को कहा...

बहू तुमने मेरी एक भी बात नही मानी थी। जब मैंने कहा था गर्भवती महिला अपनी कोख में जिस बच्चे का सोचती है, जिसकी कल्पना करती है उसके वही होता है। तुमने कभी लड़के का सोचा ही नही तो लड़का कैसे होगा मुझे देखो जब मैं गर्भवती थी तब हर बार मैंने लड़के का सोचा और फिर आज मैं दो बेटों की माँ हूँ।

तभी मम्मी जी आप मेरी दोनों बेटियों को पसंद नही करती, आज तक आपने उनको दादी का वो प्यार नहीं दिया। वो भी आपके बेटे से ही हुई है और मेरी कोख से ही पैदा हुई है जब हम दोनों पति पत्नी बेटियों को इतना प्यार करते हैं उस पर जान छिड़कते है तो फिर ये बेटा बेटी का फर्फ़ क्यों।

तुम न समझो रेखा बहू, बेटी हमारी नहीं है वो तो पराये घर की अमानत है। बेटा अपना है वो कहीं नहीं जाता और मरने के बाद के क्रियाकर्म भी तो बेटा ही करेगा तभी तो मनुष्य जीवन सफल होगा। और तो बड़े बूढ़े कह गए है बेटे के बिना मनुष्य की गति यानी उसे मोक्ष नही मिलता

नही मम्मी जी... ऐसा कुछ नहीं होता। अब जमाना बदल गया है अब बेटा बेटी बराबर है। आज लड़कियां हर जगह आगे है चाहे घर हो या बाहर अब लड़के भी लड़कियों की तरह ही नाचते है कत्थक करते है अब तो खाना बनाने में भी कुशल होते जा रहे है तो वही लड़किया क्रिकेट, कराटे सभी खेल खेलती है अब वो समय नहीं है जब बेटी घर मे रहे और बेटे को मटरगश्ती की छूट दी जाए अब तो सब बराबर है, अब दुनिया बराबरी वाली है। अब बेटा बेटी मिलजुल सारे कर्तव्यों को निभाते है तो आगे अपने अपने साथियों के साथ अपने घर, बाहर की जिम्मेदारियों को भली भांति पूरा करते है। रही बात क्रियाकर्म की तो आज ये कार्य भी बेटियां कर दमम्मी जी बेटा और बेटी में जब एक माँ की कोख कोई फर्क नही करता उसके स्तनों का दूध जब दोनों को बराबर मिलता है जब पिता का प्यार सब संतान के लिए बराबर है तो फिर ये भेदभाव क्यों? क्या धरती, आकाश, सूरज, पानी आदि कोई भेदभाव करते है सबको समान रूप से अपनी सेवा देते है तो हम इंसान इतना भेदभाव क्यों करते है। बेटी बेटा एक समान इनको दो बराबर का मान तभी बनेगी दुनिया बराबरी वाली..



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