Swati Rani

Abstract


4.8  

Swati Rani

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लव एट जिम

लव एट जिम

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आखिर जोश में आकर राजु ने इस बार साल भर वाले जिम कोर्स में दाखिला ले ही लिया। 

काफी डिल डौल वाला शरीर था राजु का और हो भी क्यों ना खाने-पीने का शौकीन जो था। 

जिम ज्वाइन के पीछे उसका मकसद ये था कि उसको अपनी शादी से पहले एक अफेयर तो करना ही था और वो तभी हो पाता जब वो फिट रहता, डोले-शोले बनाता, लड़कियां इनही कि तो दिवानी थी आजकल कि।

राजु कई बार फोन पर लड़कियों को पटा चुका था पर जैसे वो उनसे मिलने जाता, अगले दिन से उनका फोन स्वीच आॅफ आता। 

काॅलेज में भी सबकी लड़की दोस्त थी, राजु अकेला फिल करता था क्योंकि सब लड़के अपनी लड़की दोस्तों के साथ घुमने जाते, लड़की होने पर वो राजु के साथ क्यों घुमेंगे भला। 

पहला दिन जिम का था ,जिम ट्रेनर राजु को बता रहा था कि क्या खाना है, क्या नही और कैसे- कैसे क्या करना है, कि अचानक अपने ओर आते उसकी नजर एक लड़की पर पडी़, मोटी सी थी वो, मोटे-मोटे चश्मे लगाये, दो चोटियों में बाल में तेल चुपड़े थे। हालांकि चेहरा मासुम था पर लड़किया हल्की फुलकी ही अच्छी लगती हैं। 

"यक्क लड़की है या कर्णम मल्लेश्वरी", राजु अपने मन में बोला।

वो लड़की आकर जिम वाले को बोलती है, "आखिर कब वेट कम होगा भईया , 2 महिने से जिम कर रहीं हुं, अगले 8-10 महिनों में मेरी शादी है"। 

"होगा सरिता जी, आप रेगुलर आते ही नहीं, ज्यादा से ज्यादा वर्क आऊट करो और खाने का ध्यान रखो यही मैं इनको भी समझा रहा हूँ, आखिर कम तो हुआ है आपका 8 किलो", जिम वाले ने उसे समझाया।

"आप बस यही बोलते हो हरदम, हाँ 8 किलो बस मशीन पर कम आ रहा है, बाॅडी में फैट वैसे ही है, और आपने बोला था दो महीने में सारा फैट जायेगा ", सरिता जिम वाले के सारे झुठे वादों का बखिया उधेड़ दिया था।

जिम वाला हंसते हुये अपनी झेप छुपाने कि कोशिश करते हुये बोला" बाॅडी को फैट छोडने में वक्त लगता है मैम,वो देखो एक पतली लड़की कि तरफ दिखाता हुआ बोलता है वो कितनी पतली हो गयी है वैसे आप भी हो जाओगे, पेसेंस रखो"।

सरिता मन मसोस कर सायकलिंग करने चली जाती है। 

इधर राजु जिम वाले से बोलता है, उसको बाइसेप्स बढा़ने है। 

जिम वाला बोला ज्यादा से ज्यादा वेट लिफ्टिंग करना होगा आपको पर उससे पहले ट्रेंड मील पर दौड़ के वेट कम करो। 

कई बार जिम वाला जिम छोड़ कर चला जाता तो ये लोग आपस में बातें करने लगते। 

वो पतली लड़की जिसका नाम सुधा था और सरिता दोनों दोस्त बन गये। 

"तुमने अच्छा वेट कम कर लिया यार", सरिता ने कहा। 

"अरे मैं तो पतली ही थी, मेरा ब्रेक अप हुआ है बाॅय फ्रेंड से इसलिए ये ज्वाइन किया है कि मन बहलेगा, तुम्हारे एक महीने पहले ही तो ज्वाइन किया था मैने", सुधा बोली। 

सरिता ने आंखें फाडी़ और समझ गयी जिम वाला अपनी झुठी पब्लिसिटी कर रहा था उस दिन, सुधा का हवाला देकर।

" एक्स क्युज मी, ये मशीन औन कैसे होगा मैम", राजु को ना चाहते हुये भी सरिता से पुछना पडा़ क्योंकि वो सरिता को उसके लड़के वाले आकृति के कारण बिलकुल भी पसंद नहीं करता था पर इस बैच में तीन ही लोग थे, सो मरता क्या ना करता।

सरिता ने मशीन औन कर दी क्योंकि वो उस जिम में राजु से पुरानी थी और स्वभाव से काफी मिलनसार भी थी। 

" पर संभल कर करना ये चलते-चलते रूक भी जाती है", सरिता ने चेताया। 

"ओके", राजु ने बोला। 

अचानक जोरों से आवाज आयी धडाम, ये क्या राजु गिर पडा़ था और बुरी तरह झेप गया था। 

सरिता दौड़ के डिटाॅल ले आयी और बोल पड़ी "कहा था ना संभल के करना, लग गयी ना चोट"। 

तभी दौड़ के सुधा भी आयी।

इसके बाद तीनों अच्छे दोस्त बन गये थे। 

जिम से वापस आते और जाने वक्त पैदल साथ-साथ तीनों आने-जाने लगे कि वर्क आऊट हो।

राजु ने वेट किया ये क्या उसका दस किलो कम आ रहा था ,बहुत खुश था वो आज। 

चलो आज बगल वाले चौक पर तुम दोनों को नारियल पानी पिलाऊंगा जिम के बाद।

"तुम क्यों जिम कर रही हो सरिता? राजु ने नारियल पानी का सिप लेते हुये पुछा। 

" मेरी शादी है और ये लड़के का डिमांड है कि मैं पतली हो जाऊं", सरिता ने आंखे नीचे करते हुये बोली। 

"पर क्या तुम ऐसे लड़के के साथ जिंदगी बिता पाओगी जो इतना बाॅसी है", सुधा बोली 

" क्या करू यार हमारे यहाँ ऐसे ही होता है जो माँ- पापा ने बोल दिया कर लो शादी, और मैं हूँ भी तो कैसी मुझे पसंद कर लिया वही बहुत है", सरिता ने कहा। 

"और दहेज भी खुब ले रहें होगे", राजु ने कहा। 

"हां तो अरेंज मैरिज मे तो लेंगे ही", सरिता ने कहा। 

" तुम्हारा ब्रेक-अप क्यों हुआ", सरिता ने सुधा से पुछा। 

"बस यार अचानक से उसका इंटरेस्ट मुझसे चला गया क्योंकि मैं थोड़ी मोटी हो रही थी और शायद उसको मेरे से अच्छी कोई मिल गयी थी", सुधा ने ढबढबाई आंखो से कहा। 

" अच्छा अगर तुम स्लिम हो गयी और तुम्हारा बाॅय फ्रेंड वापस आ गया तो क्या तुम उसे अपना लोगी सुधा", सरिता ने पुछा।

सुधा कुछ देर सोची पर इसका जवाब ना दे पायी।

" मैं तो जिम आया हूँ कि मेरे डोले सोले बने और मैं रितिक जैसे बन जाऊं और अपने काॅलेज कि लड़कियों को पटा सकु, वैसे मै अब पतला हो रहा हूँ तुम दोनो चाहो तो अपनी सिंगल दोस्त का नंबर दे सकती हो मुझे, इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है", राजु ने माहौल हलका करने के लिये कहा। 

तीनों हंस पडे। 

तीनों का मोटापे से दुखी होना स्वाभाविक था। तीनों एक दुसरे के मोटिवेशन थे। समय बीत रहा था। 

"वाह राजु वाह। आज तुमने सौ किलो वाली वेट लिफ्टिंग कि , आई एस प्राउड औफ यु", सरिता और सुधा ने राजु कि पीठ थपथपाई। 

" थैक्स यार, तेरे से ही मोटिवेशन पाई है, पतले हो जाओ वरना माँ- पापा किसी से भी बांध देंगे", राजु और सुधा,राजु के ये कहने पर हंस पडे। 

सरिता ने मुंह भिंचते हुये दोनो को मुक्का दिखाया। 

इतने दिनों मे सुधा ने सरिता को काफी स्टाइलिश भी बना दिया था, और नयन नक्श तो थे ही उसके तीखे और वजन तो उसका कम हो ही गया था। 

राजु को थोड़ी- थोड़ी सरिता अच्छी लगने लगी थी पर सुधा को वो सिर्फ अच्छा दोस्त मानता था क्योंकि सुधा थोड़ा रिजर्व रहती थी और सरिता केयरिंग थी।

तभी एक दिन राजु ने सुधा से सरिता के कई दिनों से जिम ना आने का कारण पुछा तो सुधा ने बोला कि उसकी शादी टुट गयी है, लड़के वालों ने और दहेज मांगा था। 

"क्या दहेज यार, इतनी प्यारी लडकी है, उस लडके के लिये वेट कम किया, वो उसका दिल कैसै तोड़ सकता है, बुलशीट", राजु ने अपना पैर जमीन पर पटका। 

अगले दिन सरिता जिम आयी काफी दुखी थी, आंखे सूजी थी रात भर रोयी होगी शायद, दोनों से बोली" अब मैं कल से जिम नहीं आऊंगी,बस आज आ गयी तुम दोनों से मिलने"। 

" सुनो सरिता जो होता है अच्छे के लिये होता है, वो लड़का तुमको डिजर्व ही नहीं करता था", राजु ने सरिता को समझाया। 

"अरे मेरी सगाई टुट गयी, कौन अपनाएगा मुझे", सरिता ने रोते हुये कहा, सुधा ने उसे संभाला।

"म.. म.. मैं अपनाऊँगा, हां सरिता मैं तुमको बहुत पसंद करता था, बस तुम्हारी शादी लग गयी थी, इसलिए कभी बोल नही पाया, मुझे तो जलन होती थी जब तुम उस लड़के के बारे में बातें करती थी तो, तुम्हारे जैसी लडकी किस्मत वालों के लिये होती है", राजु ने आखिर आज हिम्मत करके बोल ही दिया अपने दिल कि बात सरिता को।

इधर सरिता ने सुधा के तरफ देखा, उसने कंधा पकडा़ था सरिता का और उसकी आंखो में आंखे डाल के ईशारा किया कि राजु ने हाथ बढा़या है थाम लो। 

सरिता ने धीरे से अपना हाथ राजु के तरफ सरका दिया।

इधर सुधा ने अपने मन में राजु को चाहने कि बात मन में रखने में ही भलाई समझी, प्यार तो खो चुकी थी, अब दो अनमोल दोस्त नहीं खोना था उसे।


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