Bhawna Kukreti

Abstract


4.8  

Bhawna Kukreti

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"कोरोना लॉकडाउन-16(आप बीती)"

"कोरोना लॉकडाउन-16(आप बीती)"

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मैंने आज मम्मी जी से पूछा , "मम्मी जी आज नाश्ते में क्या बनाऊं?" वो बहुत जोर से हंस कर बोली कि आज चिवड़ा दही का नाश्ता करते हैं।अब रोज हम ऐसे ही नाश्ता कर रहे हैं। कुछ आराम रहेगा।

अभी इनको कॉल किया ,कल रात भर नींद नहीं आयी। इधर-उधर फिर कुछ-कुछ लिखती रही, बेफ़िज़ूल।

कम्बख़्त ये लाइव की झंझट । कहा गया है कि कोरोना हॉटस्पॉट के बाहर से 'इनको' लाइव देना है अमरउजाला डॉट कॉम के लिए। अमर उजाला लाइव FB परचलेगा।

इनकी टीम ने कल बहुत विरोध किया कि सर नही करना है ,जान है तो जहान है । उनका न कहना ठीक ही है ,वो डायरेक्टली अमर उजाला से नहीं जुड़े हैं लेकिन इनको तो करना पड़ेगा न। आज कह रहे थे कि तुमने FB पर अच्छा इंफोर्मेटिव VDO पोस्ट किया था।उसमे इन्फेक्शन के कीटाणु ,विषाणु कैसे फैलते हैं हवा-जमीन में कितनी दूरी और कितनी देर तक रहते हैं ये सब डॉक्टर्स और तकनीशियन के द्वारा स्पेशल कैमरे से कैप्चर किया गया था।

आज काम वाली ने लापरवाही कर दी उसने घर में आते वक्त हाथ सनीटाइज़ नहीं किये। मम्मी जी ने तुरंत टोका।

कल लेसन प्लान के लिए E Pathshala खोल रही थी।नेटवर्क प्रॉब्लम बहुत है, नही खुला।तो आज भोजन माता जी को सुबह सुबह कॉल किया, उनकी पोती मेरी कक्षा में पढ़ती है, उनके बेटे से रिक्वेस्ट की है ।वे भेज रहे हैं। अगली बार से अपनी टीचर्स डायरी में पेरेंट्स नेम के साथ-साथ उनका फोन नंबर भी लिख के रहूंगी। लेकिन, मिशन कोशिश का पीडीएफ और क्लास 3 के लर्निंग आउट कम पैम्फलेट नही मिल रहे बाकी सब है, हद है यार ...

बेटा अभी तक सोया हुआ है,मम्मी जी गुस्सा हो रहीं है।सुबह से दो बार सीढ़ी चढ़ उतर चुकी हैं।थक गईं हैं।मुझे ये सब अभी मना है,तो नाराजगी भी जता रहीं हैं की बेटा कुछ मदद नहीं करता, देर तक सोया रहता है। बचपन से जाने क्या सिखाया है। वाक़ई इधर बेटे जी काफी मनमर्जी के हो गये हैं।

बेटे जी को उठाया, उठ गए।फ्रेश हो कर आये तो हम किचन में थे।दादी जी की नजर पड़ी तो उसे समझाने लगीं, नीचे की बच्ची सुबह 6 बजे उठ जाती है, पढ़ती है..और बेटे जी दनदनाते हुए सीधे किचन में, "माँ( जब गुस्सा होगा,या बहुत लाड़ आ रहा होगा तब कहता है।) दादी जी उठते ही क्यों कहने लग जाती हैं, मैं सब करता नही हूं क्या? सारा दिन तो पढ़ नही सकता। आप लोग खेलने भी नही जाने देते न साथ खेलते हैं। उसे सुनती रही,गुस्से में था,उसे गले लगाया, प्यार किया, और प्यार से नाश्ता कराया। इस वक्त कुछ भी कहना एक साथ दो मधुमक्खी के छत्तों को छेड़ना होता। नहा लेगा तब समझाऊंगी, या उस से पहले मम्मी जी ही उसे दुलार के नार्मल कर देंगी।

अभी पिछली हॉउस हेल्प का कॉल आया।मम्मी जी ने कहा है कि अभी अपनी सुरक्षा रखो।ये लॉक डाउन खत्म होता है तो उसे बुलाएंगे। ये भी बताया कि एक नई काम वाली को रखा है मजबूरी थी क्योंकि वो और उसकी मम्मी जी आ नही सकती थीं और भावना की हालत जानती ही हो, हम भी बूढ़े हैं कितना कर सकेंगे ?

हे भगवान, कोरोना लॉक डाउन का साइड इफ़ेक्ट है क्या? बेटे जी ने गले से झूलते हुए कहा है कि 'माँ !आप मुझे बहुत डाँटा करो', 'मुझे आपको चिढ़ाने में मज़ा आता है'। डाँटना तो ठीक है की गलत कुछ होगा तो डाटूंगी पर चिढाना ? इसके पापा क्या कम हैं, जो अब ये भी उसी राह पर!!

बालकनी से मम्मी जी नीचे किसी से बात कर रहीं थी, ध्यान आया कि उनकी और मेरी दवाई पड़ोस से कोई मार्किट जाता होगा तो लेता आएगा।अभी छूट का समय है। रिक्वेस्ट की है बेटे के ट्यूटर सर से ,पास ही में रहते हैं या एक मिनट, वीरमानी सर ने लिस्ट भी भेजी थी होम डिलीवरी वाली उसे देखती हूँ।

मम्मी जी घबरा गयीं है, छूट का समय पूरा हो गया है, ट्यूटर सर अभी तक नही आ पाए। बिना दवा के उनका बी पी शूट कर जाता है, कभी डिप कर जाता है। बेचैन हो कर मेरे पास आ रहीं है ,कह रही हैं कि भावना कैसे भी मिल जाती। लेकिन यहां लोग भी घबराए हुए हैं, जब से ज्वालापुर सीज हो गया है, पुलिस देखते ही डंडे मार रही है।कोई अपने लिए भी रिस्क नही ले रहा है।वायरस हवा से भी फैल रहा है ये बात आ रही है। क्या करूं?

लिस्ट में तो नहीं था,फिर वीरमानी सर को मैसेज भेजा कि कुछ हेल्प कर दें,खुद भी ऑनलाइन ढूंढ कर एक मेडिकल शॉप पर कॉल किया बोला पॉसिबल हुआ तो कल सुबह एक महीने की भिजवा दूंगा,व्हाट्सअप कर दीजिए।

सर जी का फोन आ गया था, कोई दरगन सर जी हैं यहां पास में रहते है, फेरुपुर में नियुक्त है, समाज सेवा भी करते हैं।मम्मी जी ने कहा उनसे भी कह दो, जो भी ले आये । उनका नंबर सर ने दिया था, बात की। बोले शाम तक ले आऊंगा ,आप दवा का नाम भेज दीजिये। उनको भी व्हाट्सअप किया। बताना ही भूल गयी कि कितनी, उन्होने फिर मेसेज किया की 30-30।

यार फिर मैं इन सब मे अपनी दवा खाना भूल गयी। पहले दवा ले लूँ फिर आगे लिखती हूँ।

दरगन सर का फोन आया है सेम कम्पनी की दवा नही है ,पर साल्ट वही है और शाम तक घर आ जाएंगी।

शाम के 6 बज रहे है , ट्यूटर सर मम्मी जी की दवा ले कर आ गए है, रिलैक्स हो गईं हैं। अभी अभी ही दरगन सर ने भी कॉल कर के पूछा है की क्या ट्यूटर सर हमारे ही घर दवा ले कर आये हैं। जिस मेडिकल स्टोर से वे लेकर आये हैं सर ने उसी से बात की थी।

इन्होंने यानि "श्री नवीन पांडेय जी" ने आज जीवन मे पहली बार लाइव रिपोर्टिंग सहारनपुर के 'कोरोना हॉटस्पॉट' पर ऑन द स्पॉट की और उसका प्रसारण अमरउजाला के मेरठ पेज पर हुआ। पहला प्रयास बहुत अच्छा था बहुत गर्व हुआ लेकिन अगले ही पल दिल बुरी तरह घबरा गया। ये हॉटस्पॉट में ही थे, मुह से मास्क हटाया हुआ था। बाकी सबने चेहरा ढक हुआ था। वे सब भी तो मुह ढक कर बोल रहे थे?!!!! तो इन्होंने क्यूं मास्क हटाया हुआ था।सर भी नहीं ढका था ।

आज तो कसम से इन महान "श्री नवीन पांडेय जी "से लड़ाई निश्चित हैं मेरी....


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