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प्रीति शर्मा

Tragedy Action Inspirational


3.8  

प्रीति शर्मा

Tragedy Action Inspirational


"कोरोना काल में शिक्षककार्य"

"कोरोना काल में शिक्षककार्य"

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मेरी कहानी उन सभी शिक्षकों के लिए शुक्रिया करने के लिए है जिन्होंने कोरोना काल में अपने तन, मन, धन तीनों से देश और समाज की सेवा की है। मेरी कहानी के नायक और नायिका सभी शिक्षक और शिक्षिकायें हैं। 

मैं अपना पत्र उन सभी शिक्षकों के नाम करती हूँ जो समाज को सही दिशा में ले जाने वाले और भविष्य के निर्माता हमारे युवाओं का भविष्य बनाने वाले हैं।

सेवा में, 

समस्त शिक्षक कर्मी, 

आपका हृदय तल से धन्यवाद

आप कोरोना काल में हमारे नौनिहालों को शिक्षा देने के अलावा भी अन्य अनेक सारे विभागों के कर्तव्यों को निभाने में सतत् निरंतर लगे रहे जिसके बारे में किसी ने भी ज्यादा चर्चा नहीं की।

      डॉक्टरों का योगदान, सफाई कर्मियों का योगदान, नर्सों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों का योगदान इस कोरोना काल में किसी भी प्रकार से कम नहीं है और सभी को दिखा भी और सबने उनको प्रोत्साहन स्वरूप दीप जलाये, तालियां घंटा बजाकर स्वागत अभिनन्दन किया लेकिन इन सबसे इत्र आप शिक्षकों ने जो भूमिका हमेशा समाज में निभाईं हैं वे आपकी कर्तव्य परायणता का प्रतीक हैं और कोरोना काल में भी समय-समय पर सरकार ने जो भी भूमिकाएँ उनको दीं है वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा से बेहतर तरीके से निभाईं हैं।

घर पर ही कॉपियां चेक कीं और रिजल्ट बनाए गए और सभी छात्रों के घर पर मैसेज भेज कर तनाव रहित बनाया।

सबसे पहले समस्या जो कोरोना काल में समाज के के समक्ष आई थी कि हमारे बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा..?

 तो शिक्षकों ने छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई। बिना किसी सरकारी ट्रेनिंग एवं जानकारी के ही सभी शिक्षक अपने बच्चों, साथियों, पड़ोसियों की मदद से लिंक खोलकर चलाना, लेक्चर देना, बच्चों से वीडियो कॉलिंग करना आदि आदि... यह सब सीखने में जुट गए। कुछ ने यूट्यूब पर नोट्स ढूंढे तो किसी ने खुद बनाएं और छात्रों तक पहुंचाएं। हालांकि सरकारी स्कूल के छात्रों के हालात कोई ज्यादा बेहतर नहीं थे फिर भी उन तक पहुंचने के लिए उनके घरवालों, पड़ोसी, रिश्तेदारों के फोन नंबर आदि मांग-मांग कर छात्रों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए नये-नये प्रयोग किए गए। छात्रों को बुकसेलर से सम्पर्क कर बुक्स और स्टेशनरी पहुँचाने का काम भी शिक्षकों ने ही किया। हर रोज प्रत्येक छात्र के घर होमवर्क के बाबत फोन करना और मोबाइल पर ही काम चैक करना, माता पिता और बच्चे से पढ़ाई के बारे में बात करना आसान कार्य नहीं था जो शिक्षकों ने बखूबी निभाया।

   फसलों के उठान के लिए भी शिक्षकों की सेवाएं ली गयीं। कहीं-कहीं ट्रैफिक पुलिस का काम भी शिक्षकों से लिया गया। इस दौरान देश भर में एक बहुत बड़ा काम परिवार पहचान पत्र का कई महीनों तक चला जिसको शिक्षकों ने बखूबी किया। इस दौरान सरकार द्वारा कई अन्य सर्वेक्षण कार्य भी शिक्षकों को दिए गए जिनमें खाते में पैसों का पहुंचा या नहीं जांच करना, राशन पहुंचाना, क्योंकि छात्र के स्कूल में नहीं आ रहे थे तो मिड डे मील ,पुस्तकें बांटने का कार्य घर घर जाकर शिक्षकों ने ही किया बिना कोरोना की परवाह के, इसमें कुछ कोरोना की चपेट में भी आये। ग्रामीण और छात्रों को कोविड-19 के प्रति जागरूक करने में भी शिक्षकों ने महती भूमिका निभाई। कभी एस एस सी मेंबरों की डिस्टेंसिंग के साथ मीटिंग की तो कभी ऑनलाइन मीटिंग और ऑनलाइन ट्रेनिंग भी करवाईं जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आंगन वाड़ी वर्कर, आशा वर्कर और एसएमसी मेंबर ग्रामवासियों को कोरोना के बारे में सचेत और जागरूक कर उनके उपाय के बारे में बता सकें और कोरोना की रोकथाम में अपनी भूमिका निभायें।

  और फिर छात्रों के लिये स्कूल खुले तो पढ़ाने में जी जान से जुटे कि छात्रों का पाठ्यक्रम पूरा हो सके लेकिन यहां शिक्षकों का तो कोरोना टैस्ट हुआ पर छात्रों और ग्रामीणों का नहीं। परिवार पहचान पत्र और पढ़ाई के दौरान बहुत से अध्यापक कोरोना की चपेट में आ गए और दुर्भाग्यवश कुछ ने अपनी जान भी गंवा दी है। उन सभी शिक्षकों को सादर श्रद्धांजलि

  शिक्षक एक ऐसा सामाजिक कार्यकर्ता है जो कोरोना काल में बेशक प्रत्यक्ष रूप से कार्य करते नहीं दिखा पर अप्रत्यक्ष रूप से बहुत सारे कर्तव्यों का एक साथ निर्वाह कर रहा था लेकिन समाज में उस पर किसी ने खास गौर ही नहीं किया।

    जैसा कि मैंने देखा समाज की मानसिकता है कि अगर आपके पास पढ़ाई का कोई काम नहीं स्कूल में जाकर तो बाकी काम करना आपकी ड्यूटी है जबकि आनलाइन पढ़ाना वो भी समाज के कमजोर वर्ग को जिन पर सुविधाओं का अभाव था बहुत ही दुष्कर कार्य था।

           बल्कि शिक्षकों को ऐसा लगने लगा कि शिक्षक कोरोना वायरस प्रूफ है। शिक्षकों को कोरोना वायरस कुछ नहीं कहता। इनको कहीं भी किसी भी काम के लिए भेज दो।कोरोना काल में अपने विभिन्न कार्यों के लिए जिनसे आम लोग अनजान हैं, सबकी तरफ से शिक्षकों के कृतज्ञ हैं।

मैं एक बार फिर बहुत-बहुत आभार, शुक्रिया, धन्यवाद प्रकट करती हूं कि बिना किसी पुरस्कार या सम्मान के लालच के, बिना किसी स्वार्थ के शिक्षकों ने सरकार द्वारा दिए गए कार्य को ईमानदारी से निभाया है और आज भी निरन्तर प्रयासरत हैं।

  इस कोरोना का काल में उनके किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए हम दिल से उनको अभिनंदन करते हैं, वंदन करते हैं और आशा करते हैं कि समाज के सभी वर्ग उनके योगदान को सराहेंगे।

                आपकी सदैव आभारी

                   भारतीय जनता

आशा है कोरोना काल में अध्यापकों द्वारा की गयी समाज सेवा और देशसेवा की कहानी समाज तक पहुंचेगी और सभी उनके इस भारी योगदान के लिए उनके कृतज्ञ होंगे।



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