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Mridula Mishra

Tragedy


3  

Mridula Mishra

Tragedy


*कलह कोरोना

*कलह कोरोना

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अपने पडो़स के घर से धमाधम पीटने-कूटने की आवाजें आ रही थी 

। मैं घर से ही उन्हें रोकना चाह रही थी कारण, मेरे पति -बच्चों को बिल्कुल पसन्द नहीं था किसी के घरेलू पचड़े में पड़ना। तभी सास-बहू दोनों के चित्कार की आवाज आने लगी। बूढ़े ससुर अपनी साठ साल की बीबी पर जोर अजमा रहे थे और उनका जवान बेटा अपनी पत्नी पर।

एक बार मेरा उनके घर पर जाने का मन हुआ पर, पिछली बार की बेइज्जती याद आगई। सचमुच 

भलाई का जमाना नहीं था।पिछली बार वर्मा जी की बीबी ने साफ कह दिया था कि यह मियां+बीबी का मामला है वो बीच में न पड़ें।अब वह घर से बैठकर ही पड़ोस बाले वर्मा जी और उनके जाहिल परिवार को लानतें भेजते रहती थीं।उनकी बहू पर उन्हें बड़ी दया आती।शायद गरीब घर से थी या अनाथ थी। देखने में सुंदर थी। पढ़ाई-लिखाई भी बारहवीं तक किया था।पर न जाने क्यों यह सब सहन करती थी। चलो उन्हें क्या। कितना पचड़ा वो सम्भाले।और वो रसोई में चलदीं।

इसी तरह प्रतिदिन यह सब पडो़स में चलता रहता। लेकिन इधर तो एक महामारी के कारण सब डरे हुए थे।सब काम स्वयं करना पड़ता।जब से लॉकडाउन पूरे देश में लागू हुआ था तबसे बाई, धोबी,दूधबाला,सबका आना बंद था।इधर पडो़स के घर से मार-पीट चिल्लाने की आवाज भी बंद थी। उसदिन मिसेज वर्मा बालकनी में आकर चहक रही थी।और बहू से खूब प्यारी-प्यारी बातें कर रही थीं। मुझे देखकर बोलीं अरी बहू आकर आंटी जी को नमस्ते तो कर। मैं आश्चर्य में डूबी थी तभी बहू ने नमस्ते किया। मैंने उसे ,'प्रसन्न रहो' कहा तभी बहू ने कहा आंटी जी मेरी सरकारी नौकरी लग गई है।अब मैं मम्मी जी को लेकर नये घर में चली जाउंगी।ये दोनों बाप-बेटे एक-दूसरे को मारते-पीटते रहेंगें।अभी दोनों हैं कहां? बहुत दिनों से आवाज़ नहीं आ रही। मैंने पूछा, मिसेज वर्मा ने कहा ,'बहन जी ये तो गांव गये हैं और लड़का अमेरिका गया है बिजनेस के सिलसिले में।'लेकिन वो आयेगा कैसे अभी तो सब बंद है? मैंने कहा अब वो जाने आंटी जी खैर पापाजी का आना तो टल ही गया समझिए। अच्छा हुआ कुछ दिनों तक हम शांत रहेंगे।

मैं सोचने पर विवस थी कि कितनी घृणा इन लोगों के मन में है।दो दिनों के बाद पुनः बहू के चिल्लाने -रोने की आवाज आई ।आ गया सत्यानाशी अब फिर वही सब इन दोनों सांस बहूओं को झेलना होगा।हे राम ‌अब तुम्हीं सहायक हो इनके।

अचानक दो-तीन दिन के बाद उनके घर में सर से पैर तक ढ़के हुए चार-पांच डॉक्टर आये।और पूरी सोसायटी को आगाह किया कि इस घर में कोरोनावायरस से पीड़ित एक मरीज है, कोई भी इनसे सम्पर्क नहीं रखेगा।हम सब सकते में आगये न तो कहीं आना-जाना और नहीं कोई साधन।अब यह एक ओर गाज। कैसे दोनों औरतें कर पायेगी।?कभी -कभी बहू या सास दिख जाती पुछने का मन होता लेकिन वो रुकती ही नहीं थीं।एक दिन मुझे मौका मिल ही गया।सास बालकनी में खड़ी थीं। मैंने पूछा अब तबियत कैसी है बेटे की।? उन्होंने कहा ,"अब ठीक हो रहा है ।बहू रात-दिन उसके पीछे एक की हुई है ,न जाने किस मिट्टी की बनी है । मैं मना करती हूं तो कहती है,ये मेरे,हम औरतों के संस्कार हैं मां। मैं इस हालात में इन्हें नहीं छोड़ सकती।सब ठीक हो जाने पर नौकरी ज्वाइन कर चली जाउंगी पर, अभी नहीं।"

और मैं सोंच रही थी किस मिट्टी से बनाया है भगवान ने हम स्त्रियॉं को।शायद यह कोरोना इनके घर से कलह मिटाने ही आया हो। हे प्रभु अब इनके घर पर कृपा बनाए रखना। तभी मेरे पति जो मेरा बड़बड़ाना सुन रहे थे उनकी आवाज़ आई ,*तथास्तु*।



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