Mridula Mishra

Drama Tragedy


4.0  

Mridula Mishra

Drama Tragedy


जानवर

जानवर

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तिलवा अपने पूरे शरीर को छुपाती हुई शालिनी के घर में दाखिल हुई। वह शालिनी के घर में काम करती थी। तिलवा को देखते शालिनी समझ गयी कि फिर उसके पति ने अपना वहशी रुप दिखाया होगा। उसने बिना कुछ कहे उसे दर्द की एक टिकिया दी और चाय रोटी सामने रख दिया। तिलवा बिलख पड़ी मेम साहब अब और नहीं सहा जाता। उसने उस दिन अपने उन सभी अंगों को शालिनी के सामने उधेड़ दिया। शालिनी भौचक्की रह गई। उसके पति की करतूत को देखकर। उस नराधम ने हर कोमल जगहों पर दाँत और, नाखूनों का प्रयोग किया था। फ़िर अपनी पिपासा पुरी की थी। शालिनी एक वकील थी उसने उसे तत्काल पुलिस थाना चलने को कहा पर तिलवा न मानी।

तिलवा की शादी को दस साल हो गये थे पर, उसे कोई बच्चा नहीं था। जब शालिनी ने इसकी वजह जाननी चाही तो तिलवा ने कहा," वह बच्चा चाहता ही नहीं। अपनी भूख मिट जाने के बाद वह उसे अपने सामने बच्चा न होने की दवा खिलाता है न खाने पर उसकी लानत-मलामत करता है। वह क्या करे। शालिनी गुस्से में आ गयी जो बोलती हूं वह तो करती नहीं फिर कराती रही अपनी दुर्दशा। शालिनी अपने कामों में लग गई। एक दिन तिलवा काम करने आयी, तिलवा उस दिन बहुत खुश थी। उसने शालिनी को बताया कि वह दस दिनों के लिए अपने मायके भाई की शादी में जा रही है। शालिनी ने उसे कुछ रुपये, और एक अच्छी सी साड़ी दी साथ में नकली गहनों का सेट भी दिया। शालिनी ने उसे शादी की मिठाई लाने को भी कहा। तिलवा खुशी-खुशी हामी भरकर चली गई।

अचानक शालिनी के पास एक केस आया, एक औरत ने बुरी तरह से अपने पति को जला दिया था। शालिनी केस लेने के पहले उस औरत से मिलना चाहती थी। वह देखना चाहती थी कि इतनी हृदयहीन कोई औरत कैसे हो सकती है।

शालिनी ने उसे देखा और बुरी तरह चौक गई वह हृदय हीन औरत और कोई नहीं तिलवा थी जब शालिनी ने उससे सब जानना तो उसने कहा, मेमसाब मायके जाने के एक दिन पहले उसने पुनः अपनी करतूत की मेरे हर अंग को सिगरेट से जलाया। मैं चिखती जाती और वह अपनी हवस में डूबता जाता। जब उसकी हवस पूरी हो गई तब वह सो गया। मैं ऐसे हालत मैं क्या मायके जाती। उस दिन मैं बहुत ज्यादा गुस्से में थी मैंने उसके सोने के बाद किसी तरह उठी और केरोसिन डालकर माचिस‌ जला कर उसपर‌ फेंक दिया। वह चीखता रहा और मैं हँसती रही। उसके मौत तक मैं वहीं रही फिर अपने को पुलिस के हवाले कर दिया। मेम साहब मुझे मत बचाना, सौगंध है आपको। "मैं भी जानवर बन गई। मेम साहब मैं भी।" और तिलवा बिलख पड़ी।



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