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Kunda Shamkuwar

Abstract Tragedy

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Kunda Shamkuwar

Abstract Tragedy

किसी घर का मकान में बदलना

किसी घर का मकान में बदलना

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घड़ी दर घड़ी, परत दर परत रंग बदलती रही ये अजीब सी जिंदगी। मुस्कुराने वाला घर कब बेजान दीवारों वाले मकान मकान में बदला,इसका अहसास उस में रहने वालों को बहुत देर से हुआ।

दिल में एक आस अब भी है उनके, मुमकिन हो की मुमकिन ना हो, घर का यूँ मकान में बदलना कभी।


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