Kunda Shamkuwar

Abstract Tragedy Others


3.7  

Kunda Shamkuwar

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किसी घर का मकान में बदलना

किसी घर का मकान में बदलना

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घड़ी दर घड़ी, परत दर परत रंग बदलती रही ये अजीब सी जिंदगी। मुस्कुराने वाला घर कब बेजान दीवारों वाले मकान में बदला,इसका अहसास उस में रहने वालों को बहुत देर से हुआ।

दिल में एक आस अब भी है उनके, मुमकिन हो की मुमकिन ना हो, घर का यूँ मकान में बदलना कभी.....


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