STORYMIRROR

Pushpraj Singh Rajawat

Abstract

2  

Pushpraj Singh Rajawat

Abstract

कीर्ति

कीर्ति

1 min
522

गाँव के मोगली से शुरू हुआ सफ़र शक्तिमान सा घूमता और अंधेरे से लड़ता हुआ लक्ष्य के लेफ्टिनेंट शेरगिल तक गया,

फिर थोड़ा ठहरकर ब्रूसली और टॉम क्रूज भी बना। मन मे बसे प्रेमचंद से प्रेम जुदा हुआ और केवल चंद बचा फिर जाकर मिर्ज़ा ग़ालिब और गुलज़ार के चमन के गुलों की शक़्ल इख़्तियार कर गया।

सफ़र अभी बाकी है और वो जो एकमात्र याद थी तुम्हारी, जिस नाम से तुम बुलाती थी, वो नाम अब मेरा तख़ल्लुस बन गया है, सनदें अता होती हैं मुझ पर सरकार की...

सफ़र अभी बाक़ी है, क्योंकि मृत्यु कीर्तिमय होगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract