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Dr Sanjay Saxena

Horror

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Dr Sanjay Saxena

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खौफ कजरी और प्रेम भाग-2

खौफ कजरी और प्रेम भाग-2

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इस धारावाहिक रचना के पहले भाग में आपने पढ़ा कि मयंक अपने लिए आने वाली आवाज को खोजना चाहता है और इस दौरान उसकी मुलाकात वहां कजरी से हो जाती है वह उसके प्रेम में पड़ जाता है।....अब आगे..

शाम का वक्त हो चला था। कुछ दूर चलने पर मयंक को अपने पीछे घुंघरुओं की छन-छन की आवाजें सुनाई देने लगी। उसने सोचा शायद कजरी उसे विदा करने आ रही होगी और पीछे मुड़कर देखा तो वहां सन्नाटे के सिवा कोई नहीं था। दूर कजरी का मकान दिख रहा था। वह कुछ घबराया... पर जल्द ही अपनी बाइक को लेकर घर चला गया। उसका घर स्कूल से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर होगा । वह नजदीक के शहर में रहकर ही गांव के स्कूल में पढ़ाने आया करता था। खाने के लिए उसने अपना टिफिन लगा रखा था। रात्रि भोजन करने के बाद जब वह अपने बिस्तर पर लेटा तो कजरी की यादों में खो गया। वह सोचने लगा... आज के युग में भी गांव में इस तरह का बर्ताव अछूतों के साथ हो रहा है और हम कह रहे हैं कि हमारा देश प्रगति कर रहा है। कैसी है यह प्रगति?? अभी भी दूषित विचारधारा समाज में बनी हुई है और कोई कुछ कहने को तैयार नहीं?? उसने मन बनाया वह इस घटना को समझने के लिए लोगों से बात करेगा ! यही सब सोचते सोचते उसे नींद आ गई और वह सो गया !

     भोर के सूरज ने मयंक की खिड़की से दस्तक दी और टिफिन वाली बाई ने दरवाजे से । मयंक की नींद टूटी । उसने दरवाजा खोला ....देखा ....टिफिन वाली बाई .....टिफिन के देने के लिए उसका दरवाजे पर इंतजार कर रही थी। क्या बात है बाबू.... आज कुछ ज्यादा नहीं सोते रहे??

अरे ...हां ....कल देर से सोया... इस कारण देर से उठा! समय देखा तो 8:00 बज रहे थे। वह जल्दी-जल्दी दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर और खाना खाकर स्कूल के लिए निकला रास्ते भर कजरी की यादें उसके मन में तैरती रही। स्कूल पहुंचने पर उसने सोचा .. इस गांव के बच्चों से उस घटना के बारे में पूछू। बच्चे झूठ ना बोलेंगे। कुछ तो बताएंगे ही । उसने अपनी कक्षा में कजरी का जिक्र किया लेकिन बच्चे उसके नाम से परिचित नहीं थे । मयंक ने उनसे उस जगह के बारे में पूछा तो एक दो बड़े बच्चों ने बताया.. ..सर वहां तो हम लोग जाते ही नहीं हैं। घरवाले कहते हैं.. वहां चुड़ैल रहती है !

क्या.....क्या..... चुड़ैल रहती है....ऐसा कैसे हो सकता है? पर वहां तो एक लड़की रहती है ! कौन कहता है तुमसे शिवम?

सर ...मेरी मां ने कहा कि .....बेटा उधर कभी मत जाना.. अच्छा... तो तुम्हारी माता जी से आज मैं मिलने आ जाऊं! ठीक है सर ! ......शिवम बोला

मयंक स्कूल की छुट्टी के बाद शिवम के घर पहुंचा और अपना परिचय दिया! शिवम के पिता ने उसे कुर्सी पर बैठा कर दुआ सलाम करते हुए उसकी माताजी से चाय बनाने के लिए कहा तभी मयंक ने अधीरता दिखाते हुए कजरी की बात छेड़ दी।

शिवम के पिता ने बताया....... गुरुजी वहां गांव का कोई व्यक्ति नहीं जाता क्योंकि वहां पर एक चुड़ैल रहती है! पास में ही शमशान है तो जब दाह संस्कार होता है तभी लोग उधर जाते हैं। पर हां उस कमरे में जाने की हिम्मत किसी में नहीं ।

पर ऐसा क्यों ..... मयंक ने पूंछा

दरअसल गुरु जी उस कमरे का निर्माण ग्राम पंचायत ने इसलिए कराया था कि बरसात, गर्मी आदि मौसम से बचने के लिए लोग उसमें दाह संस्कार के समय खड़े हो सके। परंतु.... एक घटना गांव में ऐसी घटित हुई जिसके बाद से उस कमरे में किसी का आना जाना लगभग बंद हो गया! मयंक चाय पीता जा रहा था और शिवम के बापू की बात सुनता जा रहा था!

ठाकुर साहब उस घटना को जल्दी बताइए! क्या हुआ था? शिवम के बापू बोले एक बार हमारे गांव के एक अछूत परिवार से रघु और उसकी लुगाई पूजा करने हम लोगों के मंदिर में घुस गए! शिवरात्रि का दिन था ! उसने भोले बाबा की शिवलिंग पर जल चढ़ा दिया। जब अन्य लोगों ने उसे ऐसा करते देखा तो उसको मारा पीटा और पंचायत करके गांव से निकाल दिया। वह और उसका परिवार जब गांव से चला गया तो पंडित जी ने मंदिर का शुद्धिकरण किया तब जाकर पूजा-अर्चना शुरू हो पाई ।

पर ठाकुर साहब भगवान तो सभी के होते हैं ...इसमें इतना विरोध की जरूरत ही कहां थी ....

नहीं मास्टर साहब भगवान तो सबके हैं ...पर वह पूजें ना उन्हेंअपने घर और मंदिर में हमने कब मना किया है उन्हें।हमारे घर और मंदिर में घुसने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं वह ।

फिर क्या हुआ .... मयंक बीच में ही बोला

फिर रघु कुछ दिनों अपने परिवार के साथ उस शमशान वाले कमरे में रहा । लोगों को यह भी अच्छा ना लगा कि हमारे शमशान के कमरे में एक अछूत रहे । पता नहीं फिर क्या हुआ .......एक रात वह सब मरे पाए गए

मरे पाए गए..... पर वहां तो एक लड़की अभी भी रहती है। अरे ...नहीं... मास्टर साहब.... उस कमरे में एक बार दाह संस्कार के समय लोग खड़े हो गए । छन छन और अजीब आवाजें, भयानक आकृतियों ने लोगों को ऐसा डराया कि किसी की हिम्मत ना हुई दोबारा उसमें जाने की ।आप जिस लड़की को जीवित समझ रहे हैं ...असल में वह जीवित नहीं । वहां आत्माएं रहती हैं।

मयंक ने जब ठाकुर साहब के मुख से ऐसी बात सुनी तो वह असमंजस में फस गया कि किस बात पर यकीन करे ! खैर चाय पीकर वह अपने घर चला गया उसके मन में एक साथ डर और प्रेम दोनों उथल पुथल मचा रहे थे। ठाकुर साहब की बात से डर और कजरी से प्रेम। वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे?? उसने निश्चय किया कि वह गांव के कुछ और लोगों से मिलकर इस घटना की सत्यता का पता जरूर करेगा। अगले दिन मयंक ने गांव के कुछ बुजुर्ग लोगों से मिलकर इस घटना के बारे में जानना चाहा । सभी लोगों ने उसे बताया मास्टर साहब अब उस कमरे में भूत प्रेत का बास है । वहां और कोई नहीं रहता। हां .....रघु का कुछ सामान जरूर वहां पड़ा हुआ है !पर एक अछूत के सामान को कौन हाथ लगाए इसलिए उस कमरे में कोई आता जाता नहीं! हां.... एक बार गांव के मंगल सिंह ने हिम्मत भी की थी तो बहुत दिनों तक उसे होश नहीं आया मरते मरते बचा! कहता था कोई लड़की उसके पीछे आ रही है उसने उसका गला दबा लिया था ! तबसे ऐसा ही बड़बडाता रहता है.... पागलों की तरह.......

मयंक ने मंगल को देखने की जिज्ञासा की तो गांव का एक बालक मंगल सिंह के घर उसे ले गया । वह मंगल सिंह को मिला किंतु समस्या जस की तस बनी रही। उसने सोचा वह कुछ हिम्मत करके स्वयं ही कजरी से यह बात पूछेगा ! अगली सुबह हुई! स्कूल की छुट्टी के बाद वह अपनी बाइक खड़ी कर शमशान के उस कमरे की ओर बढ़ने लगा ! घुंघरूओं की छन-छन की आवाज उसको अपने पीछे सुनाई देने लगी । गांव वालों की बातें याद करके उसे घबराहट से पसीना छूटने लगा । पीछे देखा पर कोई नहीं था । फिर से चलने पर घुंघरू की आवाजें अब भी उसे सुनाई दे रही थी। वह उस कमरे पर पहुंचा। देखा कजरी सजी-धजी बैठी है।

कजरी ने कहा.... आओ... सर जी... आप आ ही गए ! मैंने तो सोचा था कि आप मुझ अछूत के पास फिर से ना आओगे .....

मयंक ने दौड़कर कजरी को छूकर देखा....

कजरी ने जब उसको पसीने पसीने देखा तो पूछा... सर जी आप तो पसीने पसीने हैं? क्या आपको यहां डर लग रहाहै ?

डर ....हां... हां... कजरी ....बड़ी दुविधा में फंस गया हूं ! ओह तो आप गांव वालों से मिलकर आ रहे हैं ।

पर तुम्हें यह सब कैसे पता... मयंक की धड़कनें तेज हो गई

हमें तो यह भी पता है..... कि आप मंगल सिंह से भी ..मिल आए है

मयंक .. कजरी की बातें सुनकर।।। सन्न रह गया। उसका हाल बेहाल हो गया। वह सोचने लगा इसे मेरे हर काम की खबर कैसे हो जाती है। सचमुच कहीं यह चुड़ैल तो नहीं?? गांव वाले सच ही कह रहे थे बिना वजह मैंने हिम्मत दिखा कर अपनी मौत को गले लगा लिया ! कजरी के हाथ उसके गले की ओर धीरे-धीरे बढ़ने लगे।

क्या आज कजरी...मयंक का अंत कर देगी पढ़िए अगले भाग में

क्रमशः.....


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