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Shelley Khatri

Tragedy

3  

Shelley Khatri

Tragedy

काली

काली

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“फिर आ गई काली बिल्ली। कोई उधर देखना मत रे!” एक टपोरी के ऐसा कहते ही दूसरे ने सुर मिलाया, “इसे देखकर तो अंधेरा भी डर जाए।” उसके बाद सम्मिलित हँसी का स्वर गूंजने लगा।

नेहा और निम्मी के कदम तेज हो गए। उस आवाज़ के शोर से बाहर आते ही नेहा ने कहा, “तुझे बुरा नहीं लगता? कुछ करती क्यों नहीं अपने रंग के लिए। आजकल तो क्रीम भी इतनी तरह की हैं और साबुन, तेल, बॉडीलोशन सब तो आते हैं गोरेपन के लिए, सुन! कुछ तो लगाया कर यार। वर्ना ऐसे ही सब लोग हँसी उड़ाते रहेंगे। पढ़ने में तू हम सबसे तेज है पर इस रंग के कारण टीचर्स भी तुझे महत्व नहीं देते। कितने साल से समझा रही हूं पर हर बार बहाना बना देती है। कहे तो मैं क्रीम लाकर दूं?” नेहा ने अपनेपन से कहा।

“मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैं ऐसे ही ठीक हूं। जल्द ही कोई नौकरी लग जाएगी फिर कहां इन छिछोरों से पाला पड़ेगा।” निम्मी ने हाथ झटक कर कहा।

“यार! इंटरव्यू में भी रंग रूप देखते हैं। और आँफिस में भी इसी समाज के ही लोग होंगे न, वे भी मज़ाक बनाऐंगे। तू समझ न, इस काले रंग से छुटकारा पाने की कोशिश तो कर।” नेहा ने जैसे विनती की।

 “कितनी तपस्या से ये रंग पाया है और इससे छुटकारा पा लूं,” निम्मी ने कहा तो नेहा चौक गई- “तपस्या से काला रंग पाया, क्या मतलब है तेरा।”

“यार तू रोज पूछती है। मेरी बेस्ट फ्रेंड है इसलिए आज बता देती हूं पर अपने तक ही रखना, कहकर निम्मी ने एक बार नेहा की ओर देखा और कहने लगी- तब हम अभी से ज्यादा गरीब थे। मेरा रंग रूप सुंदर था। रंग भी गोरा था। फूले गाल, बड़ी आँखें। माँ को मुहल्ले की महिलाएं कहती, निम्मी बड़ी होगी तो बहुत परेशानी होगी, लड़के तंग करेंगे, एक तरह से जीना मुश्किल होगा। माँ परवाह नहीं करती। मुहल्ले की एक लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ और उसने दुख से आत्महत्या कर ली। उसके घरवाले ग़म में डूब गए। माँ पर इस घटना का असर हुआ और उन्होंने मुझे काली पुकारना शुरू किया। मैं तब दो ढाई साल की थी।”

“माँ ने मुझे काली बनाने की तैयारी शुरू कर दी। मुझे साबुन लगाना बंद किया। रोज कोयले, राख का लेप लगाकर रात- रात भर छोड़ देती। मेरे फेस पैक के लिए धूल, कालिख बटोरती और डब्बे में जमा करती। तब से आज तक रात को काला पैक लगाती हूं। कभी साबुन नहीं लगाती। पहले माँ रोज नहलाती भी नहीं थी। घंटो धूप में बिठाती। थोड़ी बड़ी होकर मैंने सवाल पूछना शुरू किया तब माँ ने बताया दुनिया की काली नजर से बचाने को मुझे ऐसा बनाया है। मैं रोती तो माँ कहती, जब तेरी शादी होगी तो एक महीना पहले से उबटन लगाउंगी, देखना बचपन जैसी गोरी हो जाएगी।” निम्मी ने जैसे कोई कहानी बताई।

“मैं जानती हूं माँ का तरीका गलत है। उसने आगे कहा, पर मैंने इसे उसकी खुशी के लिए अपनाया था। आज भी इतनी काली नहीं हूं जितनी दिखती हूं। यह तो मेरा मेकअप है। सोचा था बड़ी होकर माँ को समझा लूंगी पर अब हालात और खराब है। हर दिन अखबार में एक न एक घटना की चर्चा रहती ही है। इसलिए मैं कुछ बोल नहीं पाती। अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं करूंगी पर फिलहाल काली ही हूं।”

नेहा आवाक् रह गई।



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