Shelley Khatri

Tragedy


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Shelley Khatri

Tragedy


पौध रोपण

पौध रोपण

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"सौम्या बेटा! ब्रेकफास्ट खुद से कर लेना, बना कर रख दी हूं। और देखो समय पर नहा धो भी लेना। संडे है इसलिए टीवी से ही चिपकी मत रहना।" रूचि ने बेटी को आवाज लगाते हुए कहा। उसके हाथ तेजी से बाल बना रहे थे। कंघी पूरी कर उसने अपादमस्तक खुद को निहारा। बैनर बडा है। कई पत्रकार होगें चैनल वाले भी होंगे। सुंदर सुज्जित तो दिखना जरूरी ही है। उसने सोचा और लिपिस्टिक का शेड डार्क करने लगी। 

"मम्मा! आप सुबह- सुबह कहाँ जा रही हैं।"सौम्या कमरे में आ गई थी। 

"बेटा आज क्लब की ओर से पौध रोपण कार्यक्रम है। वहीं जा रही हूं।"

"कहां पौधे लगेंगे मम्मा, आपलोग इतने सारे मेंमबर्स हो तो सौकडों पौधे लगेंगे, बडा गार्डन होंग, कितना मजा आएगा न"! उसने खुश होकर पूछा। 

"बेटा पौध रोपण में हमलोग एक दो पौघे लगाते हैं। ज्यादा से ज्यादा पांच। सौकडों लगाने के लिए उतनी जगह भी तो चाहिए। आज सीएम सचिवालय में लगाने की परमिशन मिल गई है। वहां ऐसे तो पहले से भी पौधे होंगे। हमें बस छोटी सी जगह मिलेगी और वहीं एक पौधा लगा दिया जाएगा। बहुत बडा कार्यक्रम है। सीएम सचिवालय है और मुख्य सचिव भी होंगे तो बडी संख्या में मीडिया वाले होंगे। चलो अब ज्यादा बातें मत करो और मुझे जाने दो।"

"मम्मा आप हर बार अकेली चली जाती है। मुझे तो ले ही नहीं जाती है। आपका क्लब पर्यावरण के मुदृदे पर काम करता है इसलिए हर सप्ताह पौध रोपण होता है। तो अब तक तो बहुत सारे पेड लग गए होगे, बहुत पेड फल भी दे रहे होंगे। मुझे फल वाले पेड के पास छोड कर आप प्रोग्राम में चले जाइएगा। मैं आम अमरूद सीधे पेड से तोड कर खाउंगी। बहुत मजा आएगा।"

"बेटा। हमलोग तो सिर्फ पौध रोपण करते हैं। जहां करते हैं वही के लोगों को कह देते हैं देखभाल करने के लिए मुझे तो पता भी नहीं है कि कोई पौघा जीवित है या नहीं। हमें तो बस दिखाना होता है कि एक साल में कितने पौधे लगे, कितना मीडिया कवरेज मिला।"

"मम्मा। आप सब सिर्फ इसके लिए इतने पैसे खर्च करते हैं? हर सप्ताह नए कपडे खरीदती है। वहां पौध रोपण में महंगा नाश्ता बंटवाती है। सब अपनी गाडिंयों से जाते हैं। पेट्रोल भी खर्च होता है। जहां आपलोग पौधे लगाते हैं वे क्या एक पौधा नहीं खरीद सकते ? वे लोग भी जरूर पौधों की देखभाल नहीं करते होंगे बस फोटो खिचवाने के लिए अपने स्कूल में, अपने ऑफिस में आपसे पौध रोपण करा लेते होंगे। है न!"

रूचि निरूत्तर हो गई।।


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