Dipesh Kumar

Abstract


4.5  

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जब सब थम सा गया (दिन-28)

जब सब थम सा गया (दिन-28)

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प्रिय डायरी,

लॉक डाउन के दौरान कल का दिन बहुत अच्छा था।इसी उम्मीद के साथ मैं आज भी उसी उमंग के साथ सुबह सुबह उठ गया।छत पर जाकर योग प्राणायाम करने के बाद मैं छत पर ही टहलने लगा।चारो तरफ सिर्फ शांति,शायद इसी लिए बड़े बुजुर्गों ने कहा हैं कि सुबह जल्दी उठने के कई फायदे हैं। कॉलोनी में और भी लोग हैं जो सुबह उठने में 9 बजा देते हैं और स्वस्थ रहने का सुझाव देते रहते हैं।छत से नीचे आकर मैं स्नान करके पूजा पाठ समाप्त कर नास्ते के लिए बैठ गया।टीवी मैं समाचार चल रहा था।खबर कोरोना संक्रमण के साथ साथ चीन से आने वाले टेस्टिंग किट के बारे में भी थी।चीन कब सुधरेगा समझ नहीं आ रहा था।नाश्ते के बाद मैं बाहर आकार अखबार पढ़ने लगा।अखबार में नीमच के प्रसाशन द्वार बेफजूल घूम रहे लोगो पर सख्त कार्यवाही करना शुरू कर दिया था।मेरे समझ नहीं आता की लोग चाहते क्या हैं।मेरे एक मित्र की मेडिक्ल की दूकान हैं,व्व बोलता हैं की,"भाई दीपेश जनता इतनी बेवक़ूफ़ हैं कि रोजाना 2 टेबलेट या इनो लेने के बहाने दूकान पर आते हैं।मेरे को गुस्सा आता हैं और में भगा देता हूँ।फिर भी कुछ नहीं मानते हैं।अखबार पढ़ने के बाद मैं कमरे में जाकर कंप्यूटर पर कुछ काम करने लगा।कुछ देर बाद बहन प्रियांशी नीचे से आवाज़ लगाती हैं कि ,"भैया पापा नीचे कैरम खेलने के लिए बुला रहे हैं"।मैं भी बोर हो रहा था तो नीचे कैरम खेलने चला गया।इस लॉक डाउन में हम सभी का सबसे प्रिय साधन कैरम ही हैं।लेकिन दिमाग में बाते चलती रहती हैं कि इस साल क्या क्या होगा।न पढाई सही से हो पायेगी और न ही कोई और काम।

कैरम के बाद दोपहर का भोजन करके में अपने कमरे में आ गया।अलमारी से एक किताब निकाली और पढ़ना चालु कर दिया।लॉक डाउन में अब किताबे पढ पढ़कर भी बोर हो चूका हूँ।मेरा मन अब बस कही घूमने का बाहर जाने का कर रहा हैं।मालूम नहीं कब वो दिन आएँगे क्योंकि लॉक डाउन 3 मई के बाद भी खुलेगा की नहीं?मैं तो ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा हूँ की सब जल्दी ठीक हो जाए।यही सोचते सोचते मैं सो गया।

जब नींद खुली तो शाम के 5 बज रहे थे मैं उठकर बैठ गया।नीचे जाकर पानी पिया और पिताजी बैंक से आ गए थे और चाय पी रहे थे मैं उनके पास गया और बैठा तो बोले ,"आज बैंक में जो नया लड़का क्लर्क आया हैं न दिल्ली से उसको कल रात में कॉरोटिन सेंटर पर ले गए हैं।उसके सीने मे दर्द हो रहा था।लेकिन वो नशा करता है हो सकता हैं उसके चलते तबियत खराब हो गयी होगी।लेकिन अभी सभी लोग मुझसे दूर रहो।"

मैं सुनकर दिमाग लगाने लगा की उस लड़के ने 2 महीने से नीमच छोड़ा नहीं और न ही कोई दूसरे राज्य में गया वो, उसको कोरोना संक्रमण नहीं हो सकता हैं।उसकी तबियत खराब होने का एक कारण हो सकता हैं नशे का साधन उसको नहीं मिल रहा हो।मैंने पिताजी से कहा,"आप चिंता न करो उसको कुछ नहीं हैं।"शाम की आरती का समय हो चुका था।आरती के बाद हम सब आज मंदिर के चबूतरे पर बैठ कर बैंक वाली बात करने लगे।बात ऐसी चली की पता ही नहीं चला कब 8:30 हो गए।भोजन के लिए बीना हिम सबको बुलाने आई।रात्रि भोजन के बाद मैं अपने कमरे में आकर अपनी पाठ्यपुस्तक पढ़ने लगा और रात्रि 12:30 बजे मुझे नींद आने लगी और मैंने तुरंत किताबे बंद करके बिस्तर पर जाकर लेट गया,और कब मुझे नींन्द आ गयी पता ही नहीं चला।

इस तरह लॉक डाउन का आज का दिन भी समाप्त हो गया।लेकिन कहानी अभी अगले भाग में जारी रहेगी..........



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