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Kunda Shamkuwar

Abstract Romance Others


4.7  

Kunda Shamkuwar

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इश्क़ रूमानियत का मौसम...

इश्क़ रूमानियत का मौसम...

3 mins 202 3 mins 202

आज वह कहीं जा रही थी। मेरे पूछने पर ज़रा झिझकी फिर कहने लगी, "पंकज ने बुलाया है।क्या तुम चलोगी मेरे साथ?" मैं पंकज के बारें में उससे अक्सर सुना करती हुँ। वे दोनों क्लासमेट्स है। मैंने हँसते हुए कहा, "अरे, उसने तुम्हे बुलाया है तो तुम ही जाओगी न? भई, मेरा इस तरह जाना नहीं बनता। ये तो वही बात हुई…मान न मान मैं तेरा मेहमान!

मेरी तरफ़ कुछ कुछ नाराजगी से देखते हुए वह जल्दी निकल भी गयी। पता नहीं नाराज़गी थी या वह ख़ुशी जो नाराज़गी ओढ़कर और भी ख़ूबसूरत लगती है! 

ख़ैर…

वैसे मुझे पता था कि बीइंग रूम पार्टनर्स शाम को वापस आने के बाद वह सब कुछ बता ही देगी।

लेकिन वापस आने के बाद मुझे वह थोड़ी गुमसुम सी लगी। न जाने कहाँ खोई हुई…पूछने पर उसने बात को टाल दिया। उसका वह गुमसुम रहना और मेरी उत्सुकता ने मुझे खामोश बैठने नही दिया। मैंने फिर कुरेदा। थोड़ी देर रुक कर वह कहने लगी, "तुम किसी से कुछ कहोगी तो नही? मेरे ना कहने पर वह कहने लगी, "आज पंकज ने पता है क्या किया? उसने मुझे आई लव यू कहा!!" 

मैंने पूछा, "कौन कौन थे वहाँ?" वह कहने लगी, "हम दोनों ही थे बस।" "फिर?"

"थोड़ी देर वह इधर उधर की बातें करता रहा और फिर मुझे आई लव यू कहा.… मैं चौंक गयी। उससे कहा, "यह सब क्या है? हम तो अच्छे दोस्त थे। ऐसा कुछ ना मेरे मन मे था और ना मेरे व्यवहार में भी। तुम्हें मेरे व्यवहार ने कभी जताया ये सब?"

"उसने क्या कहा?" मेरे पूछने पर वह कहने लगी, "वह कहने लगा कि तुम मुझे शुरू से ही पसंद थी।"

मैंने कहा, "मुझे अंदाज़ा हो गया था। आज उसका तुम्हे यूँ बुलाना...मुझे थोड़ा डाउट हो गया था...."

कुछ रुक कर वह फिर आगे कहने लगी, "मेरे लिए उसका वह सब कहना ज़ोर का झटका था क्योंकि न मुझे कभी ऐसा लगा और न ही उसकी तरफ़ से कभी कुछ ऐसा साउंड भी हुआ।" 

खाना खाकर हम दोनो सोने चली गयी।आज रूम में एक तरह की गुमसुमी पसरी हुयी लग रही थी।

लेकिन इसके कुछ दिनों के बाद मैंने शिद्दत से महसूस किया कि वह पंकज में इन्वॉल्व होने लगी है। बातचीत में पंकज और सिर्फ़ पंकज का ज़िक्र होने लगा। उसका बार बार वह आईने की तरफ़ झाँकते रहना... उसकी बदली हुई चितवन और वह अबूझ सी मीठी मुस्कान…

क्या यही प्यार का जादू है? शायद प्यार में कुछ इंद्रधनुष सा सतरंगी होने लगता है…मोहब्बत के बादल ख़यालों के आसमाँ पर अठखेलियाँ करेंगे तो इंद्रधनुष ही तो बनेगा न? हर तरफ़ एक रंगबिरंगी अहसास...सचमुच प्यार एक जादू जगा देता है....एक जादूई असर करता है...

ऐज़ अ रूम पार्टनर मैं उसे प्यार में पड़ना और प्यार में रहना देख रही थी...

हाँ….मैं एक लड़की को औरत में बदलते हुए देख रही थी.....


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