achla Nagar

Abstract Classics


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इज़हार

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राहुल और पूजा मन ही मन एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे। वे दोनों बहुत अच्छे पड़ोसी थे, उन दोनों के परिवार भी आपस में एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते थे लेकिन वे दोनों आपस में एक दूसरे से कभी भी अपने प्यार का इजहार नहीं कर सके। एक दिन बाद पूजा को पता लगा कि राहुल 15 दिन के बाद अपने ऑफिस के काम से कहीं बाहर जा रहा है 4 दिन के बाद तो 'प्रस्ताव दिवस' था तो पूजा ने सोचा कि मैं उस दिन राहुल को अपने दिल की बात कह दूंगी।

पूजा मन ही मन यह सोच कर बहुत खुश हुई। परंतु आज शाम को ही राहुल का फोन आ गया वह बहुत घबराया हुआ था पूजा भी हड़बड़ा गई,उसने पूछा, "सब खैरियत तो है"। तो उसने कहा, "कुछ भी ठीक नहीं है आज मेरी मां के सर में बहुत चोट लग गई है वह अस्पताल में है"।

पूजा बोली, "तुम बिल्कुल मत घबराओ मैं अभी आ रही हूं"। उसकी सारी खुशी काफूर हो गई वह झटपट अस्पताल पहुंच गई वहां उसने देखा उसकी मां की हालत बहुत गंभीर थी उसे राहुल ने बताया कि मां के सर में चोट लग गई है जिससे 24 घंटे के अंदर ऑपरेशन करना जरूरी है 2 घंटे बाद राहुल की मां का ऑपरेशन था तो राहुल ने सारी औपचारिकता पूरी कर दी राहुल की मां का करीब 2 घंटे तक आपरेशन चला डॉक्टर ने कहा ऑपरेशन कामयाब हो गया है अब इनको 12 से 24 घंटे तक होश आ जाएगा। इसी बीच उन दोनों के परिवार वाले भी आ गए थे सभी लोग मां के होश आने का इंतजार कर रहे थे यह सब देख कर मन ही मन पूजा बहुत निराश हो गई और उसने निश्चय कर लिया कि मां के होश में आते ही मौका देखकर मैं राहुल से अपने मन की बात कह दूंगी फिर मां को दूसरे दिन शाम तक होश आ गया सब लोग बहुत ही खुश हो गए परंतु माँ ने बोला, "मुझको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा"।

डॉक्टर ने जब जांच करी तो पता लगा मां की आंखों की रोशनी जा चुकी है राहुल ने पूछा यह कैसे हो गया तो डॉक्टर ने कहा शायद सर पर चोट लगने के कारण ऐसा कभी-कभी हो जाता है। अभी एक समस्या खत्म नहीं हुई थी कि दूसरी शुरू हो गई अब मां को किसी आंखों के विशेषज्ञ को दिखाना होगा क्योंकि यह बहुत ही छोटा शहर है तो यहां पर बढ़िया विशेषज्ञ नहीं मिलेगा फिर राहुल ने निश्चय किया कि मैं अपनी मां को मुंबई में किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाऊंगा।

राहुल ने डॉक्टर से पूछा मैं अपनी मां को कब तक मुंबई ले जा सकता हूं डॉक्टर ने कहा कि आपकी मां बिल्कुल ठीक है सिर्फ 2 दिन के बाद आप इनको ले जा सकते हैं फिर राहुल ने मां को मुंबई ले जाने की तैयारी शुरू कर दी वहीं बैठे उसने मुंबई के किसी हॉस्पिटल में मां के लिए बात की और वहां की सारी औपचारिकता पूरी कर दी उसने पूजा से कहा अब मैं अपनी मां के साथ मुंबई में ही रहूंगा जब तक उनकी आंखों का इलाज नहीं हो जाता। पूजा में सोचा कि यह अभी कोई उचित वक्त नहीं है अपने दिल की बात राहुल को बताने के लिए।

उधर पूजा मन ही मन बहुत परेशान हो रही थी उसने सोचा यदि अभी मैं 2 दिन के अंदर राहुल से नहीं कहूंगी तो वह अपनी मां के साथ मुंबई चला जाएगा अभी परसों ही तो 'प्रस्ताव दिवस' है यदि मैं परसों नहीं कह पाई तो फिर कभी भी नहीं कह पाऊंगी क्योंकि अभी अगले हफ्ते ही मुझको लड़के वाले देखने आ रहे हैं फिर उसने हिम्मत जुटाकर किसी तरह 'प्रस्ताव दिवस' पर राहुल से अपने दिल की बात कह दी राहुल भी असमंजस में पड़ गया क्योंकि राहुल भी उसको बहुत ही मन ही मन में प्यार करता था परंतु उससे कभी अपने प्यार का इजहार नहीं कर सका था फिर राहुल पूजा को अपनी मां के पास ले गया और उसने अपनी मां से कहा हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और शादी भी करना चाहते हैं उसकी मां बहुत खुश हो गई और बोली मुझे पूजा बहू के रूप में स्वीकार है।

यह तो भाग्यलक्ष्मी है इसी के भाग्य के कारण मेरी जान बची है आंखों की रोशनी का क्या मैं तो इसका स्वागत अपने मन की आंखों से करती हूं फिर उसने राहुल और पूजा को अपने गले से लगा लिया दोनों ने फिर झुक कर मां के पैर छुए। तभी कहते हैं, "भगवान के घर देर है अंधेर नहीं" आज भी इंसान के अंदर इंसानियत है जिसकी वजह से दुनिया टिकी हुई है। जैसी उसकी मां की सोच है वैसी यदि समाज में सभी की ऐसी सोच हो तो दुनिया एक स्वर्ग नजर आएगी।


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