achla Nagar

Tragedy


4.0  

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भाग्य की विडंबना

भाग्य की विडंबना

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"संजना जरा दरवाजा तो खोलो देखो तो कौन आया है" "आई माजी" कहती हुई दरवाजे की ओर गई जब उसने दरवाजा खोला तो उसके लेटर बॉक्स में एक पत्र पड़ा हुआ था  तो संजना (छोटे बेटे नीरज की पत्नी) ने आकर मां जी को वह पत्र दे दिया। माजी को सब प्यार से अम्मा कहते हैं अम्मा ने पत्र खोला तो वह खुशी से उछल पड़ी उन्होंने कहा अरे वाह! अगले हफ्ते अमेरिका से सोनू आ रहा है ।

फिर क्या था अम्मा जी ने तो उसके आने की स्वागत की तैयारी शुरू कर दी सभी घर के सदस्यों को उनकी जिम्मेदारी सौंप दी सब को उनके हिस्से का काम देकर खुद भी अपने काम में जुट गई। घर में आज सब बहुत ज्यादा खुश हैं क्योंकि उनका लाडला बेटा अगले हफ्ते अमेरिका से आ रहा है और उसने वही पर एक मेम से शादी भी कर ली थी ।अम्मा खुशी-खुशी अपने कमरे में गई और अपने पति से बोली, "अजी सुनते हो आज सोनू का पत्र आया है वह अगले हफ्ते अपनी दुल्हन के साथ पहली बार घर आ रहा है"।

 असल में वह कुछ भी नहीं बोल सकते थे क्योंकि उनको पैरालाइज हुआ था डॉक्टर ने भी कहा था भगवान ही मालिक है कुछ कहा नहीं जा सकता 2 दिन, 2 महीने या फिर 2 साल भी जिंदा रह सकते हैं। जब सोनू के पापा ने यह खबर सुनी, कुछ बोल तो नहीं पाए पर आंखों से आंसू निकल पड़े शाम को जब डॉक्टर उनको देखने आया तब उनके शरीर में हल्की सी हरकत होने पर डॉक्टर ने कहा यह तो बहुत ही अच्छा है डॉक्टर ने दवाई दी और बोला अब यह कोई बड़े चमत्कार से कम नहीं है कि उन्होंने अपने बेटे की आने की खबर सुनकर उनके अंदर सकारात्मक नतीजा सामने आ रहा है यह सुनकर सबके मन में एक खुशी की लहर दौड़ गई अब तो सभी लोग अपना अपना काम मन लगाकर कर रहे थे सब स्वागत की तैयारियां भी पूरी हो गई।

आखिर आज यह दिन आ ही गया, सोनू सवेरे 9:00 बजे घर घर आ रहा है... अचानक घर की घंटी बजी सोनू के पापा वही आंगन में खड़े थे वह बोले, "रुक जाओ आज तो मैं ही दरवाजा खोलूंगा और सोनू को मैं एक बहुत बड़ा सरप्राइज दूंगा" क्योंकि अब सोनू के पापा जिनको पैरालाइज हो गया था वह अब एक छड़ी के सहारे धीरे-धीरे चलने लगे थे वही सोनू की मां ने जोर से आवाज लगाई," बहू आरती की थाली तो लाना आज तो मैं जी भर के पहले उसको निहारुंगी और फिर आरती उतार कर उसको घर में आने दूंगी"।

 संजना बोली घंटी की आवाज सुनते ही मैंने थाली तैयार कर ली थी यह लीजिए, सोनू के पापा ने जैसे ही दरवाजा खोला वह तो हक्के बक्के रह गए और सोनू की मां के हाथ से पूजा की थाली जमीन पर गिर गई क्योंकि जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला तो देखा वहां तो नजारा ही कुछ और था, दो पुलिस वाले एक लड़की के साथ खड़े थे तो सोनू के पापा ने उससे पूछा कि क्या हो हुआ तो पुलिस वालों ने बताया जब एयरपोर्ट से सोनू और यह उसकी पत्नी सैनी वापिस घर की ओर आ रहे थे तो तभी रास्ते में एक दुर्घटना हो गई और जिससे सोनू को हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया है पर वह अभी ठीक हैऔर सैनी को कई चोटें लगी है पर वह ठीक है।

 अब कैसा बहू का स्वागत और कैसा गृह प्रवेश... इतना सुनते ही पिताजी तो जमीन पर उसी वक्त गिर पड़े तो नीरज ने एकदम डॉक्टर को फोन करके बुलाया तब डॉक्टर ने बोला अब यह इस दुनिया में नहीं है... यह कैसी भाग्य की विडंबना है कि हम कुछ खोते हैं तो कुछ हम पाते हैं, एक तरफ बाबूजी के मौत के सदमे में सारा घर स्तब्ध रह गया और दूसरी तरफ बहू बेटे के घर आने की खुशी भी व्यक्त नहीं कर पाया, थोड़ी देर में सोनू भी हॉस्पिटल से घर आ गया।

कभी-कभी हम हालात के हाथों इतने मजबूर हो जाते हैं कि जो हम बयां भी नहींकर सकते हम सब वक्त की एक ऐसी कठपुतली है कि हम को नहीं पता कि अगले पल क्या होने वाला है।

देखो जिस चौखट से बेटा-बहू घर में आए.... उसी चौखट से पिताजी अपनी अंतिम यात्रा पर निकल पड़े......


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