Ravindra Shrivastava Deepak

Romance Fantasy


4.0  

Ravindra Shrivastava Deepak

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हमसफ़र...एक प्रेम कहानी (भाग-3)

हमसफ़र...एक प्रेम कहानी (भाग-3)

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प्रियंका नें जैसे ही दरवाजा खोला तो स्तब्ध रह गई। इतनी सुबह सुबह हाथ में ताजे गुलाबों के फूल से बने बुके लेकर स्वयं प्रो. विशाल खड़े थे।

सर..आप इतनी सुबह सुबह। और ये बुके लेकर। आख़िर बात क्या है ? प्रियंका नें पूछा।

प्रियंका के पूछने के पहले प्रो. विशाल नें उसे देखा तो हृदय को मानो जैसे सुकून मिल गया हो। मरने वाले इंसान को जिंदिगी मिल गई हो। थमी हुई साँसों को जैसे सांसे मिल गया हो। चकोर को चाँद मिल गया हो और हृदय के स्पंदित धड़कनों से बस एक ही आवाज़ आ रही हो और कह रही हो...

"अबतक था तन्हा मैं, इस बेजान जिंदगी को जिंदगी मिली,

जब से तुम शरीक हुई मेरे जीवन में, फ़कत इसे रौशनी मिली...

सर...हैलो। मैं आपसे बात कर रही हूँ। क्या सोच रहे है ? कहाँ खो गए ?

प्रो. विशाल झेंप जाते है और फिर सामान्य होते हुए बोलते है।

मेनी मेनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे। हैप्पी बर्थडे टू यु प्रियंका। (प्रो. विशाल नें बोला)

थैंक यू सो मच सर। पर आपको कैसे पता चला की आज मेरा जन्मदिन है ? (प्रियंका नें पूछा)

प्रियंका, मैंने कल तुम्हारे फेसबुक प्रोफाइल से चेक किया था और मुझे वही से पता चला। मैं ये नहीं चाहता था कि कोई मुझसे पहले तुम्हें को विश कर दे। इसलिए इतनी सुबह मैं चला आया। अब मैं चलता हूँ। आज कॉलेज आना है न ? प्रो. विशाल नें कहा।

जी, सर। आज आऊंगी। प्रियंका नें कहा।

प्रो. विशाल के जाने के बाद प्रियंका सोचने लगी कि आख़िर क्या बात है कि प्रो. विशाल मेरे इतना करीब आने की सोच रहे हैं। कहीं वो मुझसे सच में प्यार तो नहीं करते। इसी सोच में थी तभी..

ओहो...ये लाल गुलाब इतनी सुबह किसने दिया? हमें तो कोई देता ही नहीं। क्या बात है.! क्या चल रहा है..! हमें भी बताओ। किसने दिया आखिर ये लाल गुलाब। प्रिया और सुमन दोनों मज़ाक में प्रियंका से पूछती है।

अरे..! आज मेरा जन्मदिन है। इसलिए ये बुके प्रो. विशाल नें दिया है। अभी अभी वो आये थे। देने के बाद चले गए। प्रियंका नें दोनों को शांत कराते हुए कहा। और हां, जैसा सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है। समझी।

अब सुमन और प्रिया को टॉपिक मिल गया। हम दोनों को पता नहीं था की आज तुम्हारा जन्मदिन है। जबकि हम इतने करीब है। लेकिन सर को पता चल गया। क्या बात है ! और दोनों हँस पड़ते है।

चलो..चलो..अब इस टॉपिक को बंद करो और कॉलेज चलने की तैयारी करो। आज कॉलेज वार्षिकोत्सव के लिए परफॉर्म भी करना है। जल्दी करो, प्रियंका बोली। कॉलेज में परफॉर्मेंस को परखने के लिए जूरी बनाये जाते है जो पांच सदस्यों का होता है। उस सदस्य में प्रो. विशाल भी शामिल है। उनको भी अपना विमर्श देना है।

सारे स्टूडेंट्स बारी बारी से अपना परफॉर्मेंस देते है। अब बारी आई सुमन की जिसे स्पीच देना था। प्रियंका नें उसे चियर्स किया और शुभकामनाएं दी। सुमन नें बेहतरीन भाषण दिया। तालियों से उसके भाषण को सराहा गया। सभी की बारी आ रही थी मगर प्रो. विशाल को तो मानो प्रियंका के परफॉर्मेंस का ही इंतजार था। वो बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। अब बारी थी प्रिया के डांस की, प्रिया नें तो जैसे तहलका मचा दिया। अपने डांस से सबका मन मोह लिया। सबने उसकी बहुत तारीफ की। सबने उसे बहुत सराहा भी। तभी अनाउंसमेन्ट में नाम पुकारा गया। प्लीज वेलकम, मिस प्रियंका फ़ॉर सिंगिंग ए सांग। दिल थाम के बैठिए। अपने आवाज़ से मन मोह लेने वाली सिंगर। आपके बीच आ रही है। ए बिग राउंड ऑफ अपलाउस।


फिर प्रियंका ने ऐसा गाया की वहाँ बैठे हज़ारों लोग उसके आवाज़ के कायल हो गए। सब उसकी मदमस्त आवाज़ में झूम उठे। उसकी आवाज़ प्रो. विशाल के दिल को भी छू गया। प्रियंका के इस हुनर के भी प्रो. विशाल कायल हो गए। बहुमुखी प्रतिभा से धनी प्रियंका के इस वजह से भी प्रो. विशाल उसे और दिल से चाहने लगे। अब बारी थी पुरस्कार वितरण की। जूरी के निर्णय पर प्रथम पुरस्कार प्रियंका को बेस्ट सिंगिंग के लिए मिला। दूसरा पुरस्कार प्रिया को बेस्ट डांसिंग के लिए और तीसरा पुरस्कार बेस्ट स्पीच के लिए सुमन को मिला। प्रियंका को खुद प्रो. विशाल नें अपने हाथों से पुरस्कार दिया और साथ में फ़ोटो भी ली। उसकी इस उपलब्धि पर वो खुद भी बहुत खुश थे।

एक दिन, प्रियंका की मोबाइल की घंटी बजती है।

हेलो, कौन ?

मैं प्रो. विशाल, मैं तुमसे कुछ जरूरी बात करना चाहता हूँ। क्या तुम थोड़ा समय दोगी ? मैं तुम्हारा कॉलेज के पीछे वाले बिल्डिंग में इंतज़ार कर रहा हूँ। इतिहास वाले क्लासरूम में, प्लीज़ आना जरूर। इससे पहले प्रियंका कुछ कह पाती प्रो. विशाल नें फ़ोन काट दी।

प्रियंका सोच में पड़ गई कि जाऊँ या न जाऊँ। फिर बहुत सोचने के बाद जाने का निर्णय लिया। वो तैयार होकर वहां पहुँची। वहां पर प्रो. विशाल पहले से ही मौजूद थे। जैसे ही प्रियंका को देखा तो उनके दिल से ये आवाज़ निकली...

"मेरी मुस्कुराहटों को इश्क़ है तेरी ख़ामोशी से,

कमबख़्त..! ये दिल तुझ में ही खोना चाहता है..."

सर, आपने मुझे यहां क्यों बुलाया ? कोई जरूरी काम है क्या ? प्रियंका ने पूछा।

प्रियंका, तुम तो जानती ही हो कि मैं सिंगल हूँ। अभी तक मैंने शादी नहीं की। पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ भी था जिस कारण मैंने शादी पर ध्यान नहीं दिया। घर में मेरी माँ है और मैं। माँ को मैं वो सुख नहीं दे पा रहा जो उन्हें अभी मिलना चाहिये।

मुझे तुम अच्छी लगती हो। इसलिए कल तुम्हें मैं एक सरप्राइज देनेवाला हूँ। उम्मीद है उसे तुम स्वीकार करोगी।

इधर, होस्टल में आने के बाद प्रियंका सोचने लगी की आख़िर प्रो. विशाल क्या करनेवाले है ? उनके मन में आख़िर चल क्या रहा है ? यही सब सोचते सोचते वो सो गई।

-प्रियंका के लिए वो सरप्राइज क्या था ?

- प्रो. विशाल क्या करनेवाले थे ?

- जो बात कहनी थी फिर अकेले क्यों नहीं बताई ?

इन प्रश्नों के उत्तर अगली कड़ी में...


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