Ravindra Shrivastava Deepak

Drama Romance Tragedy

4.3  

Ravindra Shrivastava Deepak

Drama Romance Tragedy

हमसफ़र...एक प्रेम कहानी

हमसफ़र...एक प्रेम कहानी

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वो कहते हैं ना, प्यार अंधा होता है। उम्र, जाति, धर्म, मज़हब नहीं देखता। बस हो जाता है। ये भावनाओं से लबरेज होता है। वैसे ही जिंदगी भी असीम संभावनाओं से भरी है। यहां पर रोज नई कहानियाँ बनते है। ईश्वर नें इस दुनिया को बहुत ही खूबसूरत बनाया है। इस जहां को चलाने के लिए इसमें न जानें कितने ही खूबसूरत भावनाओं को भी सृजित किया है। "मोहब्बत" भी उन्हीं में से एक नायाब तोहफ़ा है जिसे ईश्वर नें मनुष्यों को दिया है। "प्रेम" एक सेतु की भांति दो आत्माओं को जोड़ता है। कुछ ऐसी ही कहानी है प्रो. विशाल और प्रियंका की।

प्रोफेसर विशाल रामदास कॉलेज, मैसूर में हिन्दी के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उनकी अपनी विषय में कभी बढ़िया पकड़ थी। उनके विद्वता के चर्चे हर जबान पर रहती थी। उनकी कॉलेज में भी काफी अच्छी पैठ थी। सभी लोग उनका कद्र करते थे। स्टूडेंट्स भी उनसे काफी प्रभावित रहते थे। वो स्टूडेंट्स के बीच काफी मशहूर थे। स्टूडेंट्स उनकी काफी इज्ज़त करते थे।

प्रिया, विशाल सर काफी बढ़िया हिन्दी पढ़ाते है न। दिल खुश हो जाता है जब भी मैं उनका लेक्चर सुनती हूँ। मैं तो बस सुनती रह जाती हूँ। उनके शब्दों में खोती चली जाती हूँ। (सुमन नें कहा)

यार सुमन। तुमने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही है। उनके शब्द मेरे दिल को छू जाते है। आज उन्हीं की क्लास है। वैसे एक बात कहूँ ? उन्होंने अभी तक शादी क्यों नहीं की ? कोई लड़की उन्हें नहीं मिली क्या ? इतनी उम्र हो गई उनकी। लगभग 35-36 के होंगे। कब करेंगे शादी यार। मुझे मिल जाए तो मैं ही कर लूं। प्रिया बोलती है जिस बात पर दोनों जोर से हँस पड़ते है।

प्रिया कुछ और बोलती उसके पहले ही प्रोफेसर विशाल वर्ग में आते है। सब चुप हो जाते है। फिर सारे खड़े हो जाते है।

सीट डाउन बच्चों। कैसे हैं आपलोग ? उम्मीद है, अच्छे होंगे।

तो बताइए, आज कौन सी चैप्टर शुरू करनी है ?

सर, चैप्टर नंबर आठ। हक़ीक़त...एक संघर्ष (सुमन बोली)

ओके। आप में से कोई बता सकता है कि "सच्चाई" क्या होती है ? प्रोफेसर विशाल बोले।

किसी नें भी जवाब नहीं दिया। फिर प्रिया सहमते हुए जवाब देने के लिए खड़ी हुईं।

सर, जो घटना हमारे सामने घटित होती है वो सच्चाई होती है। (प्रिया बोली)

प्रिया। शाबाश। बहुत अच्छी कोशिश। किन्तु ये जवाब सही नहीं है। बैठ जाओ। मैं बताता हूँ।

"हक़ीक़त" वो होती है जो हम आंखों से नहीं दिल से महसूस करते है। जैसे आंखों देखी सोना हमेशा सोना नहीं होता, उसी प्रकार सामने होती घटना हमेशा सच नहीं होती। सच्चाई को दिल से महसूस करना पड़ता है। दिल नें कहा कि सही है तो वो जरूर सही होगा। क्योंकि आँखे सिर्फ ऊपर देखती है अंदर तो सिर्फ दिल देखता है। लोग अपने आंखों के आँसू तो छुपा लेते है मगर दिल का नहीं छुपा पाते।

आपलोगों को पता होना चाहिए कि सत्य को हमेशा कड़ी परीक्षा देनी पड़ती है। कभी कभार झूठ सत्य को परेशान तो करता है किंतु अंत में विजय सच्चाई की ही होती है। यही हक़ीक़त भी है।

तभी बेल बजी और क्लास ओवर।

उधर, प्रोफेसर विशाल की माँ भी परेशान थी आख़िर विशाल शादी क्यों नहीं कर रहा।

विशाल बेटे। तुम्हारी उम्र निकलती जा रही है। अब शादी क्यों नहीं कर लेते। (विशाल की माँ)

माँ, कर लूंगा। मुझे अब तक कोई ऐसी लड़की मिली ही नहीं की उसे मैं अपना हमसफ़र बनाऊं। वैसे भी मेरी उम्र काफी ज्यादा हो गई है कि कोई लड़की पसंद भी नहीं करेगी।

बेटा, कोशिश करोगे तो जरूर मिलेगी। ईश्वर सबकी जोड़ी बना कर धरती पर भेजता है। (विशाल की माँ)

उस दिन अपने कमरे में सोए हुए विशाल को भी माँ की बातें लग गई। वह भी सोचने पर विवश हो गया। यही सोचते हुए कब नींद लग गई। विशाल को पता भी नहीं चला।

अगले दिन, प्रोफेसर विशाल वर्ग में पढ़ा रहे थे। तभी एक रूहानी आवाज़ उनके कानों में गूंज उठी ?

मे आई कम इन सर ?

प्रोफेसर विशाल नें देखा तो उसे देखते ही रह गए।

- वो रूहानी आवाज़ किसकी थी जिसे सुन प्रोफेसर विशाल देखते रह गए ?

- क्या कोई उनके दिल पर दस्तक दे दिया था ?

- क्या उनकी तलाश को विराम मिला ?


इन प्रश्नों के उत्तर अगली कड़ी में...



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