Piyush Goel

Abstract


3.6  

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हिंदी की दुर्गति

हिंदी की दुर्गति

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हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है । जब भी कोई शिशु पहला अक्षर बोलता है तो वह भी हिंदी में ही होता है, जब शिशु कलम चलाता है तब वह भी हिंदी में ही होता है । विज्ञान ने साबित किया है कि जो बच्चे आठ वर्ष तक अपनी मात्र भाषा को अच्छे से सीखते हैं। वो आगे भी अच्छा प्रदर्शन देते है । आज हिंदी की दुर्गति हो रही है । हिंदी को अब अनपढों वाली भाषा समझा जाने लगा है । आज यह एकांकी मैं हिंदी की दुर्गति दिखाने के लिए लिख रहा हूँ।

सूचना : मेरा उद्देश्य किसी भी भाषा का अपमान करना नही है । 

पात्र परिचय

सोनालिका : एक 26 वर्षीय लड़की

रजत : सोनालिका के पिता

सुषमा : सोनालिका की माता 

अनिता : साक्षात्कारकर्ता

मोहिनी : साक्षात्कारकर्ता

सुमित: साक्षात्कारकर्ता

अभिषेक : साक्षात्कारदाता 

सोनालिका एक 26 वर्षीय लड़की है जो कि अध्यापिका बनना चाहती है और आज उसका साक्षात्कार है ओर वह अब अपने घर मे चर्चा कर रही है 

सोनालिका : मुझे विश्वास है कि मेरा चुनाव अवश्य होगा ।

रजत : हा क्यो नही ?

सुषमा : हा वो तो होगा ही मेरी बेटी है ।

सोनालिका : पर एक चिंता है ।

सुषमा : चिंता कैसी ? 

सोनालिका : मेरी अंग्रेज़ी कमज़ोर है ।

सुषमा : तो क्या हुआ बेटी ? 

सोनालिका : मा ! आज कल हर बात अंग्रेज़ी में होती है ।

सुषमा : तो क्या हुआ ? तू जा तो सही ।

रजत : हा बेटी ! तुझे जाना चाहिए ।

सोनालिका : हा मैं जाती हु । 

तो अब सोनालिका साक्षात्कार देना जाती है और वहाँपर 

मोहिनी : व्हाट इज योर नेम?

सोनालिका को समझ नही आया और उसने कहा 

सोनालिका : जी कृपा राष्ट्रभाषा हिन्दी मे बात करे ।

अनिता : मतलब आपको अंग्रेज़ी नही आती ।

सोनालिका : जी नही ।

सुमित : थोड़ी बहुत तो आती होगी । 

सोनालिका : जी नही । 

सुमित : बिल्कुल भी नही 

अनिता : तो आप टीचर कैसे बनेंगी ? 

सुमित : अनिता ! हिंदी में बात करो ।

अनिता : हा हा ! तो क्या नाम है आपका ? 

सोनालिका : जी मेरा नाम सोनालिका है । 

सुमित : ओर आपको अंग्रेज़ी नही आती ? 

सोनालिका : जी नही । 

सुमित : फिर आप अध्यापिका कैसे बनेंगी ? 

सोनालिका : जी मतलब ?

अनिता : मतलब आपको अंग्रेज़ी आनी चाहिए । 

सोनालिका : वो क्यो ? 

अनिता : क्योकि आज कल हिंदी को कोई भी पूछता नही है । 

सोनालिका : पर मैं हिंदी की अध्यापिका बनना चाहती हु ।

अनिता : देखिए यह बात नही है ।

सोनालिका : फिर क्या बात है ? 

सुमित : देखिए ! हमारा स्कूल प्रतिष्ठित है और हम किसी को भी ऐसे नही रख सकते ।

अनिता : जी हाँ ! आप अपनी नोकरी ढूंढ लीजिये ।

सोनालिका : आप मेरी बात तो समझिए । 

अनिता : जी हम कुछ समझना नही चाहते ।

सोनालिका : आप मुझे मौका तो दीजिये ।

अनिता : मोके की कोई बात नही है । 

सोनालिका : फिर आप मुझे नोकरी क्यो नही दे रहे ? 

सुमित : आपको अंग्रेज़ी सीखनी होगी । 

सोनालिका : पर मैं हिंदी अच्छी पढ़ाती हु । 

सुमित : आज के समय मे हिंदी का कोई महत्व नही है । 

अनिता : आप जा सकती है ।

अब सोनालिका चली जाती है ओर् तब साक्षात्कारकर्ता बात करते है 

अनिता : कैसे लोग थे ये ? 

सुमित : हां सही कहा । 

मोहिनी : हां हिंदी जैसी बेकार भाषा मे बात करते हैं।

सुमित : हां हिंदी तो गवारों वाली भाषा है ।

मोहिनी : ऐसे अनपढों को नोकरी देदी तो तो स्कूल का नाम ही डूबा देंगे ।

सुमित : अब दूसरे व्यक्ति को बुलाते है । 

तब दूसरे साक्षात्कारदाता अभिषेक आते हैं


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