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Rashmi Sinha

Abstract

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Rashmi Sinha

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हैप्पी बर्थडे

हैप्पी बर्थडे

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"कुछ न कहने पर भी क्या मैं कुछ समझती नही?एक दिन से पाल पोस कर बड़ा किया है--

किया क्या मैंने? फाइन बोन चाइना की प्लेट्स घर मे इस्तेमाल के लिए निकाल ली---

 क्या चेहरे पर आई नाराजगी मुझे दिख नही रही--सब समझती हूँ!"

"पर एक बात बताओ? किस के लिए रखी हैं, मेहमानों के लिए?"जवाब दो मेहमान घर मे आते ही किंतने हैं?साल में एक दो बार ही न---, तो??मत दो जवाब , पता है क्या कहोगी--"इतनी महंगी, एक भी हाथ से फिसली तो--"

"तो क्या?" 

 "मैं पूछती हूँ, हम लोग किसमे खाएं? पटरी से खरीदी मेलामाइन की प्लेटों में?यूं ही बचाते, बचाते एक दिन मर जाएं?और आफिस से घर आती किंतने बजे हो?आठ बजे न? तो?

अगर किसी दिन ढंग की क्राकरी में खा लिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा?

देख लेना, आज ही डायनिंग टेबल सजी मिलेगी महँगी क्रॉकरी से---

हंस क्यों रही हूँ?पागल हूँ न इसलिए--    और ये हाथ मे क्या लाई हो? उफ---बिरयानी और पेस्ट्री?और उसका क्या होगा जो मैंने बनाया?

हे भगवान! ये लड़की भी न----

खैर! हैप्पी बर्थडे----



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