Pawan Gupta

Horror Tragedy Thriller


4.1  

Pawan Gupta

Horror Tragedy Thriller


हाइवे

हाइवे

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मैं अपने ऑफिस के काम से लखनऊ से दिल्ली और फिर दिल्ली से लखनऊ आता जाता रहता हूँ।.. पर वो रात मेरी आखरी रात साबित हुई।

मैं अपनी मीटिंग खत्म करके दिल्ली से लखनऊ वापस अपने घर आ रहा था मीटिंग 6 बजे खत्म हुई तो मैंने सोचा कि इंतज़ार क्या करना कार से ही तो जाना है पूरा हाइवे खाली मिलेगा तो मैं जल्दी घर पहुंच जाऊंगा !

हालांकि ये मेरा पहला रात का सफर था तो मुझे रात की परेशानियों का कुछ भी पता नहीं था, इससे पहले मैंने हमेसा दिन में ही सफर किया था !

खैर मैं घर जल्दी पहुंच जाऊ इसलिए मैं दिल्ली से डिनर करके निकला क्या पता रस्ते में कुछ मिले या ना मिले, करीब 9 बजे मैं दिल्ली से चल पड़ा !

 तक़रीबन 1 बजे मैं हाइवे पर पहुंच गया था, पर रात को तो ये हाइवे बहुत ही वीरान और डरावना लग रहा था, मैं तो हर बार दिन में इसी हाइवे से दिन में आना जाना करता था

आज रात में तो हाइवे का नज़ारा भी कुछ और था, मन में हल्का सा डर था, वो भी इसलिए क्युकी मैंने ये नहीं सोचा था कि हाइवे इतना शांत होगा !

 रात का वक़्त होने के कारण मैं धीमी आवाज में गाने सुनते जा रहा था कि अचानक ...

  मुझे दूर एक औरत लिफ्ट मांगती हुई दिखी उसके हाथ में एक बैग था, मैंने उसके करीब जाकर अपनी कार रोक दी !

उस औरत ने लाल साड़ी पहनी थी गोल्डन कलर की उस साडी का बॉर्डर था, वो औरत 5.5

 फुट की रही होगी, बाल खुले हुए लम्बे लम्बे ..

 सर पर बड़ी सी कुमकुम से बनी बिंदी और रेड लिपस्टिक !

  उसे देख के डर ही लग रहा था, वो इतनी रात को कौन थी वो कुछ भी तो पता नहीं था

तभी गेट के सीसे पर दस्तक हुई ...मैंने सीसा निचे किया, उसने कहा - मुझे हाइवे के दूसरी तरफ छोड़ दो ये कहकर वो पीछे की सीट पर जाकर बैठ गई !

मैं अरे।अरे ...ये क्या ... पर वो कुछ नहीं सुनी, मैंने उसके साथ कोई आर्गुमेंट भी नहीं किया, क्युकी वो थोड़ी परेशान लगी, और उस अकेली औरत को वहां छोड़ना भी ठीक नहीं लगा !

  पर मैं थोड़ा उसकी हरकतों से डरा हुआ था, इसलिए मैं बार बार अपने रियर व्यू मिरर से उसे देख रहा था !

वो कुछ धीरे धीरे बुदबुदा रही थी, मैंने हिम्मत करके पूछा ...

आप कौन हो और इस हाइवे पर क्या कर रही हो ...

वो बुदबुदाती रही उसने मुझे कोई जबाब नहीं दिया ..

थोड़ी देर रुक कर फिर मैंने पूछा की आखिर बात क्या है, इतनी परेशान क्यू हो ..

फिर भी वो बुदबुदाती रही कुछ नहीं बोली 

ये सब मेरे लिए बहुत स्ट्रेंज था, मैं भी चुप होकर गाडी चलने लगा, 5 मिनट बीते होंगे की मेरे कानो में आवाज आई ! 

तुम्हे इस हाइवे पर कार नहीं रोकनी चाहिए थी, मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा तो ये वही औरत बोल रही थी ...

  मैंने घबराते हुए बोला- त...त ...तुम ये क्या कह रही हो मैंने तुम्हारी सहायता करने के लिए कार रोकी थी

 मेरी सहायता हां ..हां ...हां ..."हस्ते हुए "

तुम्हे नहीं पता इस हाइवे पर एक अतृप्त आत्मा है जो इस हाइवे से जाने वाले सभी लोगो को मार डालती है !

मेरे तो पैरो तले जमीन गायब हो गई, मैं तो चुड़ैल के चुंगल में फस गया था, मैंने बोला मैडम आप यही उतर जाइये पर वो फिर चुप हो गई और बुदबुदाने लगी !

अब मैं क्या करू समझ नहीं आ रहा था, मैं बस उसपर रियर व्यू मिरर से नज़र रखता रहा

  तभी मेरी नज़र उसके बैग पर गई उसमे से खून निकल रहा था, अब मेरी तो हालत ख़राब हो गई, कार की ऐ सी में भी मुझे पसीने आ रहे थे !

मैं अब जिद करने लगा की आप उतर जाओ मैडम नहीं तो मैं कार नहीं चलाऊंगा, और मैंने कार रोक दिया !

 वो बोलने लगी तुम पागल हो क्या, इस हाइवे पर कार रोक रहे हो जल्दी चलाओ, मैंने कहा मैडम मैं कार नहीं चलाऊंगा आप पहले उतर जाओ !

 वो बोली पागल मत बनो कार चलाओ, मैंने फिर कार चलने को मना कर दिया, तभी मेरे दरवाजे के सीसे पर फिर से दस्तक हुई !

इस बार कोई स्मार्ट सा लड़का था, उसने कहा - भाई साहब आप मुझे आगे तक छोड़ देंगे !

मैं तो वैसे ही उस औरत से डरा हुआ था, और वो औरत भी इतनी जिद्दी थी कि उतरने का नाम नहीं ले रही थी, फिर मैंने सोचा की ये लड़का साथ रहेगा तो ज्यादा अच्छा रहेगा !

इसलिए उसे मैंने बिठा लिया, और कार मैंने चलानी शुरू कर दी, मेरा ध्यान अभी भी रियर व्यू मिरर पर ही था कि मेरे बगल में बैठे हुए आदमी ने धीमी आवाज में मुझसे कहा - भाई साहब ये कौन है ... 

  मैंने कहा मुझे नहीं पता भाई ये हाइवे पर आके बैठ गई, और अब उतरने का नाम भी नहीं ले रही है, जब से पता नहीं क्या बुदबुदा रही है !

 ओ.... आप कहो तो हम दोनों मिलकर इसको उतार दे, मैं भी राजी हो गया, मैं तो चाहता था बस किसी तरह भी ये चुड़ैल मेरे कार से उतर जाये !

 मैंने कार रोकी और उसे जबरजस्ती उतार दिया, वो चिल्ला रही थी ..

 तुम बहुत बुरा कर रहे हो तुम बहुत पछताओगे, तुम बहुत बुरा फस जाओगे।

पर मैंने उसकी एक न सुनी और उस औरत को वही हाईवे पर उतारकर हम दोनों आगे बढ़ गए !

उसने बोला थैंक गॉड अच्छा हुआ वो उतर गई, मैंने भी हां में हां मिलते हुए बोला हां भाई अच्छा हुआ, तब से ये मुझे उलटी सीधी बाते बोल बोल कर डरा रही थी !

उस आदमी ने पूछा - क्या बोल रही थी वो ?

मैंने कहा - वो कह रही थी कि हाइवे पर कोई अतृप्त आत्मा है जो लोगो को मारती है हां ..हां..हां..हां... कहकर मैं हसने लगा

तभी वो आदमी गुस्से में बोला - वो सही बोल रही थी।

  क्या.... मेरी हसी अचानक से रुक गई, मैंने कहा क्यों मज़ाक कर रहे हो भाई साहब ?

उसने कहा मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ मैं ही वो अतृप्त आत्मा हूँ मुझे भी इसी हाइवे पर एक कार वाले ने मार दिया था तब से मैं किसी भी कार वाले को जिन्दा नहीं छोड़ता हु !

 त....त....तो वो औरत कौन थी मैंने कहा 

उसने हस्ते हुए बोला वो तांत्रिक थी उसके पति को भी मैंने ही मारा था तब से वो लोगो को मुझसे बचाने के लिए ऐसा करती है, पर मैं उसे कभी भी सफल होने नहीं देता हु।हां...हां....हां....हां 

तुम झूट बोल रहे हो न मुझे डराने के लिए मैंने कहा ..

 नहीं आत्माये कभी झूट नहीं बोलती है उसने कहा ..

  तो...तो ...फिर वो बुदबुदा क्यों रही थी मैंने पूछा ...

हां...हां...हां...हां.,. वो बुदबुदा नहीं रही थी वो मंत्रो के जाप से मुझे उस कार से दूर रख रही थी, पर जब तूने कार रोककर उसको निकलने लगा तो उसका ध्यान मंत्रो से हट गया और मैं तुम्हारे साथ कार में आ गया !

हां....हां....हां.....हां.... हस्ते हुए उस आदमी ने मेरी जान लेली।

मैं भी अब आत्मा हूँ हां..हां..हां ...हां...  


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