Shweta Sharma

Abstract Horror


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Shweta Sharma

Abstract Horror


गुड़िया लौट आई

गुड़िया लौट आई

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माही और राजीव एक हैप्पी कपल थे, दस साल की उनकी बेटी तपस्या तो और भी ज्यादा हैप्पी थी, ये तीनों मुंबई में रहते थे राजीव की एक पुश्तैनी हवेली थी, जो अब खाली पड़ी थी और आज तक माही वहां कभी नहीं गई थी, तो इस बार राजीव और माही ने वहीं जाने का प्लान बनाया

तीनों खुशी खुशी एक हफ्ते बाद हवेली के लिए रवाना हो गए, हवेली जोधपुर में थी जाने से पहले ही राजीव ने वहां के वॉचमैन को सफाई करने के लिए बोल दिया था और बताया था, की वो आ रहे हैं, एक हफ्ते बाद तीनों हवेली के लिए निकल गए। रास्ते में माही ने राजीव से कहा" मैंने पहले कभी हवेली नहीं देखी, अब पहली बार देखूंगी बड़ा अजीब सा लग रहा है।"

"हां, अब आराम से देखना, पूरे हफ्ते बस हवेली ही देखना।" हंसते हुए राजीव बोला। और बात करते करते तीनों हवेली पहुंच गए, तपस्या और माही तो हवेली को मुंह फाड़कर देखने लगे।

"अरे ! अब मुंह ही फाड़ते रहोगे या अंदर भी चलोगे ?" राजीव ने हंसते हुए कहा।

और तीनों अंदर चले जाते हैं, तभी अचानक वासु, उनका वॉचमैन आता है और कहता है" लाइए समान दीजिए साहब, आप लोग आराम कीजिए मैं चाय नाश्ता लाता हूं।

"हम्मम, और कैसे हो वासु ?" राजीव ने पूछा।

"ठीक हूं साहब, आप सब कैसे है ?" वासु ने पूछा।

"हम सब भी ठीक है।" राजीव ने कहा।

 "चलो बढ़िया, आप लोग अंदर जाइए मैं आता हूं।" वासु बोला।

दूसरी तरफ माही तो घूम घूम कर पूरे हवेली को देख रही होती है, अचानक से माही स्टोर रूम में पहुंच जाती है और माही को अचानक आवाज़ आती है, जिसमें उसे लगता है कोई उसे बुला रहा है

माही मुड़कर देखती है, पर कोई नहीं होता दो तीन बार माही को लगता है, की कोई आवाज़ दे रहा है पर वहां कोई नहीं होता, माही थोड़ा डर जाती है, लेकिन वहां उसे एक गुड़िया दिखाई देती है जिस पर काफी धूल होती है, वो गुड़िया के अंदर कुछ आकर्षण सा होता है पर वो माही को थोड़ी अजीब सी लगती है, लेकिन उस गुड़िया में ना जाने क्या आकर्षण होता है, की माही उसे तपस्या के लिए ले आती है और स्टोर रूम से बाहर आ जाती है, तपस्या गुड़िया देखकर बहुत खुश होती है, पर माही को ये समझ नहीं आता, की वो आवाज़ कहां से आ रही थी। गुड़िया को देखकर ना जाने क्यों राजीव को कुछ अजीब लगता है, ऐसा लगता है जैसे ये गुडिया पहले भी कहीं देखी है।

बात आई गई हो जाती है और माही सब भूल जाती है, रात को डिनर के बाद जब सब सो रहे होते हैं और अचानक जब राजीव की नींद खुलती है, तो वो देखता है की माही अपने बाल फैलाकर राजीव की तरफ अजीब निगाह से देख रही होती है, जिस तरह से वो देखती है राजीव डर जाता है और माही से पूछता है" क्या हुआ माही ऐसे क्यों बैठी हो ?"

"नींद नहीं आ रही मुझे।" अजीब सी और कुछ डरावनी आवाज़ में माही ने कहा।

" आ जाएगी, सोने की कोशिश करो।" राजीव ने कुछ डरते हुए कहा।

" कहा ना, की नींद नहीं आ रही।" माही ने फिर अजीब आवाज़ में कहा।

"तो क्या करना है तुम्हें ?" राजीव ने पूछा।

"खाना है, इंसान का दिल।" माही ने एक खतरनाक मुस्कान के साथ कहा, जिससे राजीव डर गया।

"ऐसा मजाक अच्छा नहीं होता माही।" राजीव बोला, पर अचानक से लाइट चली जाती है और माही आंखों से कुछ करती है और राजीव हवा में उड़ने लगता है और माही डरावनी हंसी हंस रही होती है, जिससे राजीव बहुत डर जाता है और अचानक माही, राजीव को नीचे पटक देती है, अब तो राजीव का डर कर बुरा हाल है।

"राजीव, मुझे तुम्हारा दिल खाना है, बहुत भूख लग रही है।"डरावनी सी आवाज़ में माही ने कहा और हंसने लगती है" हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा

राजीव डर जाता है और अपनी बेटी तपस्या, जो एक कोने में चुपचाप डर कर गुड़िया लिए खड़ी होती है, उसे गोद में उठाकर हवेली के बाहर निकलने लगता है, बाहर जाकर देखता है, की वॉचमैन वासु मरा हुआ होता है।

राजीव अपनी बेटी को लेकर भागा जा रहा है और जोर से आंधी आ रही है, जो बेहद डरावनी लग रही है, पता नहीं ऐसा क्या होता है, की राजीव को रास्ता ही नहीं मिलता बाहर जाने का और वो भटक कर जंगल में पहुंच जाता है और एक जगह अपनी बेटी को लेकर बैठ जाता है

"पापा, मुझे डर लग रहा है, मम्मी को क्या हो गया है पापा ?" डरते हुए तपस्या ने पूछा।

"बेटा, डरो मत सब ठीक हो जाएगा।" समझाते हुए राजीव कहता है।

"अब कुछ ठीक नहीं होगा पापा।" अचानक एक अलग सी आवाज़ में तपस्या बोली।

"ये क्या बोल रही हो बेटा ?" थोड़ा डरते हुए राजीव ने पूछा।

"राजीव, तुमने अपनी गुड़िया को पहचाना नहीं ?" तपस्या ने एक डरावनी मुस्कान के साथ पूछा।

"कौन हो तुम ?" बेहद डरते हुए राजीव ने पूछा।

"भूल गए अपनी गुड़िया को, बीस साल पहले क्या हुआ सब भूल गए ?" तपस्या ने डरावनी आवाज़ में कहा।

"क, क कौन हो त तुम ?" राजीव ने अटकते हुए पूछा।

 "मैं हूं माला, जिसे तुम प्यार से गुड़िया कहते थे, यहां के वॉचमैन रघुलाल की बेटी थी मैं, तुम मुझे अपनी बहन की तरह मानते थे और मैं भी तुम्हें भाई की तरह मानती थी, क्यूंकि तुम्हारी कोई बहन नहीं थी और मेरा कोई भाई नहीं था, जब भी तुम हवेली आते घूमने तब मेरे लिए ढेर सारी चॉकलेट और खिलौने लाते, माही ने ये जो गुड़िया तपस्या ओह! मतलब मुझे दी, तुमने कहा था की तुमने गुड़िया को कहीं देखा है, अरे! ये गुड़िया तुमने ही तो मुझे दी थी, कितना खुश हुई थी मैं।" माला ने बताया।

"हां, मुझे याद आ गया, प्लीज वो उस दिन जो ह।" कहते कहते राजीव रुक जाता है, क्यूंकि माला, राजीव को इशारे से बोलने के लिए मना करती है और राजीव से कहती है" मेरी बात अभी खत्म नहीं हुई है, सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन एक दिन अचानक तुम अपने तीन दोस्तों को लेकर हवेली आए और चुपके से वहां बैठकर शराब पीने लगे, जब मैंने तुमसे कहा, ये गलत है मैं बाबा को बता दूंगी और मैं जाने लगी तो तुमने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहा, की मैं बहुत ज्यादा सुंदरलग रही हूं।

और दूसरी तरफ माही को होश आने लगता है, क्यूंकि राजीव के यहां से भागने के बाद माही बेहोश हो गई थी और राजीव और तपस्या को ना देखकर माही परेशान हो जाती है और जब हवेली से बाहर आती है, तो वासु की लाश देखती है और उसकी चीख निकल जाती है।

"उस दिन मैंने तुम्हारी आंखों में भाई जैसा प्यार नहीं एक हवस देखी और मैं डर गई और हाथ छुड़ाकर भागने लगी, पर तुम चारों दोस्तों के नजरों में हवस चढ़ चुकी थी, तुमने मुझे बेड पर गिरा दिया और मेरा मुंह दबा दिया, उस दिन बाबा की तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी, तो उस दिन वो बाहर बैठे बैठे ही सो गए, पर अचानक तुम्हें लगा, की ये जगह ठीक नहीं है, मेरे साथ गलत करने के लिए तो तुम सभी मुझे इस जंगल में ले आए, याद आया ?" हंसते हुए माला ने पूछा, अब माला एक डरावनी शक्ल में बदल रही थी, जिसे देखकर राजीव थर थर कांपने लगा था।

"माला, प्लीज़, मुझे माफ़ कर दो, हाथ जोड़ता हूं तुम्हारे।" हाथ जोड़कर रोते हुए राजीव ने कहा।

"मैंने भी ऐसे ही हाथ जोड़े थे तुम सबके सामने, पर किसी ने मेरी नहीं सुनी और मेरी चींखें इस जंगल में दब गई, अपना काम करने के बाद, जब तुम्हारा नशा उतरा तो तुम्हें एहसास हुआ, की तुमने क्या कर दिया अब सबको डर था, की मैं सबको बता दूंगी और तुम्हारे दोस्तों के कहने पर तुमने मुझे मारने का सोच लिया, तुमको मैंने हमेशा राखी बांधी और तुम मेरी रक्षा नहीं कर पाए, मैंने तुमसे रोते हुए कहा, की मुझे मत मारो, मैं वापस आ जाऊंगी और तब तुम्हारा अंजाम बहुत बुरा होगा, पर तुम नहीं समझे और तुमने मेरा गला दबाकर मुझे मार दिया और दफना दिया और साथ ही मेरी गुड़िया को भी, तुमने मुझे ही नहीं मारा ना जाने कितने लोगों के भरोसे को मारा, भाई बहन के रिश्ते को मारा।" माला ने कहा।

अचानक धुआंधार बारिश होने लगी और बिजली कड़कने लगी, " उस दिन भी ऐसा ही मौसम था ना ?" माला ने पूछा।

राजीव डर कर भागने लगा, "अरे! भैया कहां जाओगे, जहां जाओगे, हमें पाओगे।" माला बोली और हंसने लगी" हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा।

एक जगह राजीव गिर जाता है, और माला आकर कहती है" तपस्या से बहुत प्यार करते हो ना, पर तुम्हारी सजा बेचारी तपस्या भुगतेगी, ये जो गुड़िया है ना ये श्रापित गुड़िया है, इसे मैंने मरते ही श्राप दे दिया था, की जो इस गुड़िया को हाथ लगाएगा, उसका या उसके परिवार का विनाश होगा और ये हमेशा श्रापित ही रहेगी, क्यूंकि ये तुम जैसे हैवान ने मुझे दी थी और हां तुम यहां मेरे वजह से ही आए हो, मैंने ही बुलाया है तुम्हें।

"माला, प्लीज़ मेरी बेटी को कुछ मत करना और ना ही मेरी माही को।" राजीव ने रोते हुए कहा।

बारिश अभी भी जोरों से थी, ऐसा लग रहा था, की बाढ आ जाएगी और बिजली तो खतरनाक तरीके से कड़क रही थी

" तुम्हारा किया सबको भुगतना पड़ेगा।" माला बोली और उस गुड़िया के अंदर घुस गई, " नहीं माला, नहीं माला प्लीज़।" राजीव डरते हुए बोला।

"और चिंता मत करो, धीरे धीरे करके तुम्हारे उन दोस्तों को भी तुम्हारे पास भेज दूंगी और हां एक बात और बता दूं, तुम्हारे जाते जाते, की उस वासु को इसलिए मार दिया, की वो भी तुम्हारे ही कैटेगिरी का था।" डरावनी हंसी के साथ माला बोली जो गुड़िया के अंदर थी और फिर उस गुड़िया ने राजीव की आंखें नोच ली और उसका गला दबा दिया और राजीव का आधा चेहरा तो पहचान में ही नहीं आ रहा था और राजीव को पेड़ पर लटका दिया और माला वहां से चली गई।

सुबह हो चुकी थी, कुछ आस पास के लोग राजीव की लाश देखकर बेहद हैरान थे, तभी अचानक माही भी वहां पहुंच गई और राजीव को इस हालत में देखकर उसकी चीख निकल गई, एक औरत तपस्या को गोद में लिए खड़ी थी तपस्या बहुत डरी हुई थी और भागकर माही की गोद में चली गई, इस तरह से एक दर्दनाक अतीत का अब अंत हुआ, जो और भी खतरनाक था, माही और तपस्या को माला ने नहीं मारा।


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