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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract

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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

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घर वापसी

घर वापसी

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ऑफिस के काम की वजह से वह कई दिन से घर पर नहीं था.घर में बहुत शांति थी.प्रिया जो चाहे कर सकती थी...टी.वी...अपनी पसंद का खाना...और उसे कोई टोकने वाला भी न था.पर यह आज़ादी...यह फुर्सत उसे काट रही थी.वह चाहती थी कि उसका एकाकीपन खत्म हो और वो वापस आ जाए.

वापस आकर भले ही चक्करघन्नी बना दे हुक्म चला चला कर...

वापस आकर नुक्स निकाल कर टोके उसे...

कभी कभार डांट भी दे...

पर वापस आ जाए !


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