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S N Sharma

Romance Tragedy

3  

S N Sharma

Romance Tragedy

एक थी रीना भाग 8

एक थी रीना भाग 8

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कक्षा 12 की क्लासेस शुरू हो चुकी थी रीना पोजीशन विनर होने के कारण अब लड़कियों वाली रोड लाइन में सबसे आगे बैठी थी और दूसरी तरफ लड़कों वाली लाइन में राघव अपने दोस्त के साथ बैठता था। कक्षा 11 की पढ़ाई में जो एक स्वच्छंदता थी यहां पर कक्षा 12 में बोर्ड की परीक्षा होने के कारण शुरू से ही पढ़ाई का सीरियस वातावरण कक्षा में निर्मित हो चुका था।

अब न कभी रीना लेट आती थी और न ही राघव। उन दोनो के घर में भी पढ़ाई का पूरा माहौल बन चुका है। रीना अब भी समय निकाल कर शाम को जतिन सर का शाम का खाना अवश्य बनाती है। जतिन भी अब उसके आने के पहले पहले अंग्रेजी के अलावा अन्य विषय भी पढ़ कर रखते थे और खाना बनाते समय और ट्यूशन पढ़ते समय 3 से 4 घंटे उन लोगों की पढ़ाई संबंधी बातें ही मुख्य विषय बन गई थी।

जोया अवश्य बीच-बीच में रीना के साथ थोड़ी मस्ती कर लेती थी। पर जतिन को अपनी शिष्या को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए एक अजीब सा नशा एक अजीब सी धुन सवार हो गई है। शायद उन्हें लगता है कि रीना ने उनकी बेटी को बचाकर उन पर एक बहुत बड़ा एहसान कर दिया है। इसका प्रतिकार वह उसे बोर्ड में अच्छी से अच्छी पोजीशन दिला कर करना चाहते हैं।

क्लास के लम्हों में से लंच के समय के पल राघव के लिए सबसे अच्छे लगते हैं कारण है कि  रीना उसके साथ प्लेग्राउंड के पीछे की तरफ बरगद की छांव में बैठकर या तो पढ़ाई की बातें करने लगती है या फिर दोनों थोड़ी देर के लिए चुहल बाजी करते रहते हैं।

ऐसे ही 1 दिन लंच के समय राघव ग्राउंड पर पड़े पानी सेअचानक फिसल कर नीचे गिर गया। कथा उसकी हथेली में ग्राउंड में पड़ा हुआ है कांच का टुकड़ा अंदर तक घुस गया। राघव के चेहरे पर दर्द की लहरें साफ नजर आ रही थी रीना ने आगे बढ़कर उसके हाथ से कांच खबर टुकड़ा निकाला और अपना दुपट्टा फाड़कर उससे पट्टी की तरह उसके हाथ पर लपेट दिया और एक टाइट गठान लगा दी। और उसने उसके हाथ को अपनी दोनों हथेलियों में दबा लिया। रीना उसकी चोट से दुखी होकर रोने लगी।

उसके इस अपनेपन से भरे हुए व्यवहार को देखकर राघव अपनी चोट बिल्कुल भूल गया और उसने रीना की आंखें पहुंचते हुए उसे अपने बाजू में समेट लिया।

रीना उसके बाजू में  चुपचाप सिमटी हुई नम आंखों से उसकी चोट देखती रही।

राघव के दुख की गाड़ियां घड़ियां अचानक ही सुख की असीम यादगार बन गई।

राघव को ऐसा महसूस हुआ जैसे प्यार की हवा का एक मदहोश झोंका उसके दिल को छूकर गुजर गया हो।

अचानक रीना को वास्तविकता का ज्ञान हुआ और तुरंत वह यथार्थ की दुनिया मैं लौट आई। उसे एक पल को एहसास हुआ कि राघव उसके बारे में ना जाने क्या सोचता होगा इसलिए राघव से नजर चुरा कर और उसको अपने ध्यान रखने का कहकर वह तुरंत क्लास की तरफ जाने लगी और कहा " राघव यदि तुम्हें ज्यादा दर्द ना हो रहा हो तो क्लास अटेंड कर लो या फिर पहले अस्पताल में दिखा कर अपना इलाज करवा करवा लो।"

राघव को अब चोट मैं दर्द का एहसास हुआ और वह तुरंत अस्पताल की तरफ चल दिया।

रीना क्लास में बैठी हुई सारे घटनाक्रम के बारे में सोचती रह गई उसे अपने आप पर आश्चर्य हो रहा था कि वह कैसे राघव की बाहों में सिमट कर रह गई थी। हर पल उसे यही एहसास हो रहा था कि राघव उसके बारे में क्या सोच रहा होगा।

उसे एक पल को लगा कि शायद उसे राघव से कहीं प्यार तो नहीं हो गया। पर इस प्रश्न का उत्तर उसके बवंडर में फसें हुए दिल ने एक बार भी नहीं दिया । उसे तुरंत एहसास हुआ कि यह राघव के प्रति मात्र संवेदना थी।वह एक अजीब सी दुविधा में फंसी हुई थी।

छुट्टी होने पर वह जतिन सर के घर की तरफ चल दी।

जोया अपने स्कूल बैग रखकर बाहर बरामदे में खेल रही थी और शायद रीना का इंतजार ही कर रही थी।

रीना उसे अपने साथ घर के अंदर ले गई और उसके कपड़े बदल कर उसे एक ग्लास दूध और नाश्ता खिलाने लगी।

तब तक जतिन भी घर आ गए ।

ख्यालों में डूबी रीना जोया को नाश्ता करते हुए देख रही थी ।उसे पता ही नहीं चला कि कब जतिन सर घर के अंदर चले आए। उन्होंने रीना से पूछा "रीना क्या हुआ आज मैं घर भी आ गया पर तुम्हें पता ही नहीं चला किन ख्यालों में खोई हुई हो।"

रीना ने उन्हें सिर्फ इतना बताया कि राघव के हाथ में चोट लग गई थी और उसने उसके घाव पर पट्टी बांधी थी। इसके अलावा उसने बाकी घटनाक्रम को अपने अंदर ही छुपा कर रख लिया ।

जतिन ने अपने कपड़े बदलने के बाद रीना को पढ़ाना शुरू कर दिया ।पर आज रीना का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था। उसका ध्यान बार-बार आज स्कूल में हुए घटनाक्रम पर केंद्रित हो रहा था और जतिन की बाहों में कुछ फलों के लिए समाए रहने की घटना को याद कर उसके चेहरे पर और शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती थी।

    जतिन ने उसकी यह हालत देखकर कहा" रीना तुम्हें ध्यान से पढ़ाई करनी चाहिए। और पढ़ाई में ठीक से मन लगाना चाहिए, क्योंकि तुमने जो लक्ष्य निर्धारित कर रखा है वह बहुत बड़ा है। उसके लिए कठिन साधना की निरंतर आवश्यकता है। अपने मन को कंट्रोल करो और जो मैं तुम्हें पढ़ा रहा हूं उसे ध्यान से सुनो।"

यह कहते हुए अनजाने में ही जतिन ने रीना का हाथ थाम लिया।

रीना के शरीर में फिर उसी तरीके की एक सिहरन सी दौड़ गई।

और वह मन लगाकर फिर से पढ़ाई में जुट गई।

आज जतिन ने उससे राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और अंग्रेजी तीनों विषय लगभग 3 घंटे तक डिस्कस किए थे।

इसी बीच रीना ने सर का खाना भी बना दिया था और जोया को खाना खिला कर वह फारिग हो गई ।

जतिन ने कहा" रीना अब घर जाओ तुम्हारे मम्मी पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे"

रीना सर को नमस्कार करके और जोया को प्यार करके अपना बैग लेकर घर को चली गई।



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