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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

देश प्रेम

देश प्रेम

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वीर सभी हैं जितने मेरे, करता हूँ मैं कोटि प्रणाम।

उन्ही वीर की गाथा लिखने, का मैं करता निशिदिन काम।।


जलियावाला कांड हुआ जो, रहे उपस्थित अपने वीर।

हत्यारा जनरल डायर में,खून बहाया हो बेपीर।


नहीं पता था उस हत्यारा, क्या होगा इसका परिणाम? 

उन्ही वीर की गाथा लिखने,का मैं करता निशिदिन काम।।


लंदन जाकर ऊधम सिंह ने, गोली मारी जमकर तान।

हत्यारा यम गेह सिधारा,मची खलबली लंदन शान।


आजादी के हित में ऊधम, प्राण दिया होकर निष्काम।

उन्ही वीर की गाथा लिखने, का मैं करता निशिदिन काम।।


देश हित्त मे वीर हमारे,फांसी चूमे हसकर शेर। 

कहते गए असंख्य शेर हम, होगी कभी न तेरी खेर।


आजादी का जश्न मनाने, का हम वीर पिए हैं जाम।

उन्हीं वीर की गाथा लिखने, का मैं करता निशिदिन काम।।


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