चमचागिरी
चमचागिरी
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*ना खर्चा लगता है ना पैसा लगता है। ना पैसा मिलता है, ना पैसा लगता है।*
*फिर भी लोग वफादारी से निभाते है, चमचागिरी को।*
*फिर भी लोग लगाते है, अपनो को गिराने में एडी चोटी का जोर।*
सपना आज बात कर रही थी। अपनी बचपन की सहेली काजल से।
जब से हाउस वाइफ से वर्किंग वुमन बनी हु। तब से पता चल रहा है।
राजनीति के बड़े बड़े धुरंधर भी असफल है।
कार्यालय की राजनीति के आगे।
काजल ने पूछा क्या बात हो गई है सपना।
वह बोली मेरी हर नई योजना को विफल कर देती है।
मेरी हर दूरदर्शिता से भरी सोच के सपने को तोड़ देती है।
काजल ने पूछा क्या बात है।
क्या तुम्हे किसी से प्यार हो गया है, कार्यालय में।
सपना ने गुस्से में कहा मैं तुम से कार्यालय की राजनीति के विषय में बात कर रही हु।
तुम मुझसे पूछ रही हो। मुझे किसी से प्यार तो हुआ नही हुआ है।
सपना ने कहा काजल कार्यालय की राजनीति शक्कर से भी मीठी है।
वह मुंह में चासनी लेकर तुम्हारे आस पास ऐसे मंडराती है। जैसे फूल पर भवरा।
काजल कार्यालय की राजनीति को समझ पाना बड़ी टेढ़ी खीर है।
काजल ने कहा सपना बातों को यूं गोल-गोल ना घुमा।
जो कुछ भी कहना चाहती है। वह सीधे-सीधे बता। अपनी बातों को जलेबी की तरह गोल-गोल ना घुमा।
सपना ने कहा कार्यालय की राजनीति ठीक तुम्हारी ही बातों की तरह तेरी मेरी zig zag और जलेबी की तरह गोल गोल घुमावदार है।
जिसमें यह समझ पाना बहुत ही मुश्किल है।
कौन सच्चा है, कौन झूठा है। कौन अपना है, कौन पराया है।
कार्यालय की राजनीति चमचागिरी पर आधारित रहती है।
काजल पहले चांदी के चम्मच हुआ करते थे। अब चमचों की चांदी होती है।
सपना ने कहा यह बात तो सही है।
कार्यालय की राजनीति में चमचे बहुत सक्रिय रहते हैं।
काजल और सपना की बातों को ध्यान पूर्वक सुनते हुए।
अनीता ने कहा घर की चार दिवारी से बाहर आकर पता चलता है। दुनिया के रंग कितने प्रकार के हैं।
दुनिया में लोग कैसे किसको प्यार से ठगते है।
दुनिया में कई लोग अपने फायदे के लिए दूसरों का बड़ा नुकसान करने से भी नही चूकते।
यह सब कुछ चमचे बड़े आसानी से कर गुजरते है।
ये चमचे वास्तव में दो मुंह धारी साप है।
ये चमचे मीठे परंतु जहरीले साप से किसी भी प्रकार कम नहीं है।
साप के काटने वाले को पानी नसीब हो भी जाय।
परंतु इन चमचों के मीठे बोल जो जहरीली जुबान रखते है।
इनके द्वारा कहे गय शब्दो के माध्यम से काटने पर पानी भी नसीब नही होता।
ऋतु बोली जब से मैंने नौकरी करना शुरू किया है।
तब से पता चला कुर्सी को सलाम है।
जो चमचे आपको सर या मैडम कहते नही थकते।
वह पीठ पीछे आपको खंजर भोकते हुए भी नही हिचकते।
ऋतु ने पूछा सपना चमचागिरी के बारे में तुम क्या सोचती हो।
सपना ने कहा चमचागिरी वह मक्खन है।
जो अपनी रोजी रोटी चलाने में सहायक है।
सपना ने कहा चमचागिरी वह मक्खन है।
जो अपने आपको जीवन में कभी आगे बढ़ने नही देती।
जो अपने आपको कार्य करने से रोकती है।
जो अपने आपको कामचोर बना देती है।
जो अपने आपको मक्खन बाज बना देती है।
जो धीरे-धीरे ही सही दूसरों के जीवन में जहर घोलती है।
बीच में ही सपना की बात को काटते हुए राजेश्वरी ने कहा।
चमचागिरी यदि आगे बढ़ने का साधन होती। तो कोई मेहनत ना करता।
राजेश्वरी ने कहा चमचागिरी से यदि काम चलता। तो आज कोई सफलता के पायदान पर पैर ना रख पाता।
राजेश्वरी ने कहा ना पैसा मिलता है। न इज्जत मिलती है। फिर भी लोग अपना काम छोड़कर बहुत ही वफादारी ईमानदारी से चमचागिरी को निभाते हैं।
राजेश्वरी ने कहा किसी भी व्यक्ति को चमचागिरी करने से परहेज करना चाहिए।
सपना ने कहा चमचागिरी वह मक्खन है। जिसे राजा पा कर बहुत खुश होता है।
चमचागिरी वह मक्खन है। जिसे सुनकर राजा खुश होता है।
चमचागिरी वह मक्खन है। जिससे काम चोरों का जीवन चलता है।
चमचागिरी वह मक्खन है। जिसे लगाकर लोग दूसरों का जीवन बर्बाद और अपना जीवन आबाद करने का प्रयास करते हैं।
राजेश्वरी ने कहा चमचागिरी यदि आगे बढ़ने का साधन होती। तो हर कोई चमचागिरी करता।
यदि हर कोई चमचागिरी करता तो जहां भी व्यक्ति काम करता है। वहा व्यापार पूर्ण रूप से ठप हो जाता।
चमचागिरी मात्र एक ऐसा मीठा जहर है। जो दूसरों के कानों में दूसरों के प्रति मीठा जहर या यूं कहें धीमा शहर घोलती है।
परंतु वह धीमा जहर कभी भी किसी का लक्ष्य नहीं हो सकता।
बबीता ने कहा चमचागिरी करना भी एक कला है।
सरिता ने कहा चमचागिरी तुम्हारे अनुसार अवश्य कला हो सकती है।
परंतु इसे अपनाने से बचे क्योंकि किसी को भी काम प्यार होता है, चार्म नहीं।
किसी भी व्यापार का मालिक काम से प्यार करता है, ना की चमचागिरी से।
अनीता ने भी कहा चमचे चमचागिरी करते हुए, यह भी भूल जाते हैं।
यदि आने वाली समय में किसी के टेक पर लात पड़ेगी। तो वह चमचागिरी ही होगी।
सपना ने कहा सफलता का एक ही मूल मंत्र है, मेहनत मेहनत मेहनत।
अपनी रोजी-रोटी चलाने का एक ही मूल मंत्र है, मेहनत मेहनत सिर्फ मेहनत।
तभी तो न जाने किस सदी में ये मधुर गीत बना था।
मेहनत कर इस दुनिया में अपना हिस्सा मांगेंगे। एक बाग नहीं दो बाग नहीं। सारी दुनिया मांगेंगे।
सपना ने कहा चमचे बड़े हो या छोटे से यही कहना चाहती हु।
चमचागिरी छोड़ कर मेहनत को अपना लक्ष्य बनाएं।
अपने सपनों को साकार करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करे।
अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करे।
क्योंकि चमचागिरी लंबी रेस का घोड़ा नहीं हो सकती।
चमचागिरी ता उम्र रोजी-रोटी नहीं चला सकती।
चमचागिरी से सावधान रहें सतर्क रहें।
पूजा ने कहा जीवन में आगे बढ़ने का एक ही सूत्र है मेहनत मेहनत सिर्फ मेहनत।
राजेश्वरी ने कहा चमचागिरी तभी तक फलदायक है।
जब तक उसके बॉस का नुकसान ना हो रहा हो।
जैसे ही बॉस का नुकसान होगा वैसे ही छोटे बड़े चमचों की टेक पर सबसे पहले लात पड़ेगी।
जब चमचों के पेट पर लात पड़ेगी तब वह रोजी-रोटी के लिए दर-दर भटकेंगे।
तब उन्हें एहसास होगा जिसकी रोजी रोटी छीनना चाहते थे। आज अपनी ही रोजी रोटी के लाले पड़ गए है।
मान ने कहा चमचागिरी वह चंदन है। जो बाजार में मुफ्त मिलता है। तभी किसी ने खूब कहा है। फ्री का चंदन घिस मेरे नंदन।
राजेश्वरी ने कहा जो इस कला में माहिर होता है। वह किसी न किसी तरह अपनी रोजी रोटी चला रहा होता है।
अनीता ने कहा यह सदैव याद रखना। चमचागिरी से आप दूसरे को प्रभावित नहीं कर सकते। चमचागिरी से कोई भी दूसरे के दिल में अपने लिए जगह नहीं बना सकता।
क्योंकि वह अच्छी तरह जानता है।
आज यह मेरे साथ हैं कल यह किसी और के साथ होंगे।
अनीता ने कहा चप्पा चप्पा चमचा चले।
अनीता ने कहा पहले चांदी के चम्मच हुआ करते थे। अब चमचों की चांदी हुआ करती है।
राजेश्वरी ने कहा देख तेरे इंसान की क्या हालत हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान।
सूरज न बदला चंदा न बदला बदल गया इंसान।
अनीता ने तुरंत पूछा कैसे।
राजेश्वरी ने कहा पहले इंसान मेहनत को ही अपना धर्म समझता था।
जैसे-जैसे समय ने करवट बदली। वैसे-वैसे इंसान ने मेहनत करना छोड़कर चमचागिरी शुरू कर दी।
जबकि चमचागिरी से जीवन नहीं चल सकता।
चमचागिरी अपने ही जीवन को सुरक्षित नहीं रख पाती। चमचागिरी से सावधान रहे चमचागिरी ना करें।
चमचागिरी से बचे एक बेहतर जीवन के लिए। एक सुरक्षित सुरक्षित जीवन के लिए।
पूजा ने कहा इन सब के बावजूद चमचों की लगी है, बारात हर दफ्तर में। चमचों की लगी है बारात हर दफ्तर में। बच के रहना यार इन चमचों से हर दफ्तर में।
क्योंकि चमचों की लगी है बारात हर दफ्तर में।
सपना ने कहा ऐसा भी नहीं है। हर दफ्तर में चमचे ही सक्रिय हैं।
वास्तव में आला अधिकारी भी चमचों को संरक्षण देते हैं। आला अधिकारी भी दफ्तर में क्या चल रहा है। इसलिए चमचों की एक लंबी फौज रखते हैं।
चमचे आलाधिकारियों के खासम खास होते हैं। चमचे आलाधिकारियों के नुमाइंदे होते हैं।
चमचे आलाधिकारियों को गुप्त रूप से सूचनाओं देते हैं।
चमचे बहुत ही चालक प्रवृत्ति के होते हैं।
चमचे बखूबी दोनों तराजू का संतुलन बनाकर चलते हैं।
सपना ने कहा चमचागिरी से बचना ही अपने जीवन को सुरक्षित रखना है।
चमचागिरी से बचना ही अपने परिवार की रोजी-रोटी चलना है।
इसलिए चमचागिरी से बचें चमचागिरी ना करें।
अपने कार्य पर ध्यान लगाए। उसे वफादारी ईमानदारी से पूर्ण करे।
