बंद दरवाजे के पार प्यारी खुशी
बंद दरवाजे के पार प्यारी खुशी
जब सिद्धेश्वरी देवी नई-नई उस मकान में रहने आई तो उनको आस पड़ोसियों की खबर लेने की बहुत इच्छा होती थी।
वह महिला मुक्ति आंदोलन की प्रमुख थी।
उनको हमेशा ऐसा लगता था हर स्त्री के साथ घर में अन्याय ही होता है। क्योंकि उनके साथ में अन्याय हुआ था।
इसीलिए उनको आसपास के घरों में ताक झांक करने की भी बहुत आदत थी।
पड़ोसियों के घर में हमेशा उनको 3 जने ही दिखते थे। उन्होंने अपनी बाई से पूछा जो उनके घर में भी काम करती थी इस घर में कितने जने रहते हैं।
उसने बोला इस घर में पांच जने रहते हैं ।
सब बहुत ही अच्छे हैं इनका बेटा 15 दिन में एक बार आता है।
कहीं बाहर रहता है और बहू यही रहती है।
सिद्धेश्वरी जी का मनमें छटपटी होने लगी कहीं बहू के ऊपर कोई अत्याचार तो नहीं हो रहा।
जो वह बाहर नहीं दिखती है उसने अपने बाई को बोला कैसे हैं यह लोग बहू को बंद करके रखते हैं ,घर में बहुत अत्याचार करते होंगे।
बाई बोली बीबीजी कैसी बातें करती हो यह लोग तो इतने अच्छे हैं।
बहू को बहुत प्यार से रखते हैं बहू भी बहुत प्यारी है।
बहुत गरीब परिवार से हैं छह बहनों की बड़ी बहन, जिसने जिंदगी में अपने बचपन में कोई सुख नहीं देखा जहां भरपेट खाना भी दोनों टाइम नसीब नहीं होता था उससे इन्होंने शादी करी है ।
उनका लड़का उसको बहुत प्यार से रखता है और वह अपनी जिंदगी में बहुत खुश है।
इसके ऊपर कोई अत्याचार नहीं हो रहा है।
वह अपनी छोटी-छोटी खुशियां उपहार से बहुत खुश है ,
छोटे-छोटे उपहार बस प्यार यह सब उसकी जिंदगी के लिए काफी है खुश रहने के लिए ।
मगर सिद्धेश्वरी जी का खोजी मन उनको तो हर समय ऐसा ही लगता था घर में बंद है।
घर के काम कर रही हैं मतलब उस पर अत्याचार हो रहे हैं।
उन्होंने मन में न्याय दिलाने की ठानी उस बहू को।
फिर उन्होंने उस परिवार से दोस्ती बढ़ाने की चालू करी पहले हाय हेलो से चालू करा।
फिर एक दिन उस परिवार के लोगों ने बोला यह चाय पीजिए तो वह चाय पीने के लिए उनके साथ रुकी तो उन्होंने अंदर से बहू को बुलाया बहुत सुंदर थी बहुत हंसती खिलखिलाती आई और उनको प्रणाम कर उनके पास आकर बैठ कर सबसे घुल मिलकर बात करने लग गयी।
थोड़ी देर बाद में वे वापस अपने घर आ गई उनको लगा सब साथ में है। इसलिए दिखावटी कर रही लगती है। उन्होंने फोन पर अपने दोस्त को बोला
मुझे तो यह पता करना पड़ेगा कि यह लोग कहीं पर जोर जबरदस्ती तो नहीं कर रहे हैं।
घर में रहने के लिए और कुछ ना कुछ अत्याचार तो नहीं कर रहा है।
उसकी बातों से तो नहीं लग रहा था फिर भी।
बाई रसोई में काम काम कर रही थी उसके कान उसी की तरफ थेकि यह फोन पर क्या बात कर रही है।
जब उनकी बात खत्म हुई तब बाई ने बोला बीबीजी सबको आप लोगों के जैसे आजादी पसंद नहीं होती है।
अपने आजाद हो करके भी क्या कर लिया।
यह सही है कि महिलाओं के हक के लिए लड़ना चाहिए।
मगर किसी की हंंसती खेलती गृहस्ती में आप उस लड़की को स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाना चाह रहे हैं।
जिसने बचपन अभावोंमें जिया, अभी छोटी-छोटी बातों में खुशी मना कर वह इतनी खुश रहती है।
आप उसकी सोच बदल कर क्यों उस को तकलीफ में डालना चाहते हैं। अगर आपको लगता है कि यह बनावट है तो एक बार उनको घर पर बुलाईये तो पता लग जाएगा सिद्धेश्वरी देवी के मन में भी यही ख्याल आता है।
वो उन लोगों को घर बुलाती हैं,
और बोलती है बहू को पहले भेज देना थोड़ी मेरी मदद भी हो जाएगी और थोड़ी बातें भी।
उनका मकसद कुछ और होता है मगर जब वह उनके पास आती है और वो उन लोगों की बहुत तारीफ करती है और अपने पति की भी बहुत तारीफ करती है।
और अपने बचपन की बातें भी बताती है तब उनको लगता है कि बाई सही बोल रही है।
रात को सब लोग साथ में डिनर करते हैं और खाने की बहुत तारीफ करते हैं साथ में बोलते जाते हैं कि यह खाना तो उनकी बहू ने ही बनाया लगता है ।वो खाना ही इतना अच्छा बनाती है कि बहुत खाने का मन करता है ।आज सिद्धेश्वरी देवी को लग रहा था कि वास्तव में सब उसको बहुत प्यार करते हैं और सब सच्ची तारीफ कर रहे हैं उनके मन से वह धुंध छटं चुकी थी। कि बंद दरवाजे के पीछे बहु के साथ अन्याय कर रहे हैं।
वेभीखुशी-खुशी सबके साथ बहुत मजे करते हैं बहुत अच्छे से डिनर करते हैं। गेम खेलते हैं।
सब चले जाते हैं रात को महिला आंदोलन वालों का फोन आता है आपका क्या विचार है।
हम कल आए उस बहू को आजाद करवाने।
तब सिद्धेश्वरी देवी बोलते हैं नहीं सब की खुशी आजादी में नहीं होती है। उसको अपनी दुनिया में खुश रहने दो वह अपनी दुनिया में बहुत खुश है।
हम को उसको आजादी की हवा नहीं देने की और उसको उसकी जिंदगी में खुश रहने देने का रखना चाहिए।
अब आगे से बहुत सोच विचार करके ही इस आंदोलन को आगे बढ़ाया जाए।
जिसको सही में जरूर है उसी को आजादी दी जाए दिलवाई जाए ।
बहुत ज्यादा यह आजादी की हवा भी बहुत कर बिगाड़ देती है यह कहकर भी फोन रख देती है।
और अपने अतीत में खो जाते हैं कि किस तरह से बहुत लोगों को उन्होंने आजादी दिलवाई कहां सही थी और कहां गलत थे ।
आत्ममंथन करने लगती हैं या अब ध्यान रखूंगी जहां सही में अन्याय है वहीं पर काम करूंगी ।
और अभी शांति से सो जाती हूं आज हम को सुकून भरी नींद आएगी।
