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Gita Parihar

Abstract

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Gita Parihar

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बिन फेरे हम तेरे

बिन फेरे हम तेरे

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"आधुनिक समाज की कड़वी सच्चाई जिसे ,"लिव इन रिलेशनशिप"के नाम से जाना जाता है। अक्सर इस तरह के संबंधों के घातक परिणाम सामने आए हैं।

रिश्ते मर्यादा के दायरे में बंधे हों तभी अच्छे होते हैं। "कॉलोनी की महिलाएं एक दूसरे से बातें करती हुई नीचे उतर रही थीं। ऊपर पुलिस अपनी तहकीकात में लगी थी। फोटोग्राफर फोटो खींच रहे थे। फ्लेट के अंदर किसी के जाने की अनुमति नहीं थी।

पिछले 6 महीनों से नीरा और नवीन इस फ्लैट नंबर 18 में रह रहे थे। कोई नहीं जानता था कि उनका क्या संबंध था। पति- पत्नी भी लगते नहीं थे। उनसे कोई मिलने भी नहीं आता था। सुबह 9:00 बजे निकल जाते थे और देर रात गए आते थे। कभी उनको घर के काम करते हुए, मसलन खाना बनाना, कपड़े धोना, शॉपिंग करना वगैरा किसी ने नहीं देखा, जो आम घरों में होता है, तो यह अंदाजा लगाना आसान था कि वह शायद लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे।

ऐसे संबंध जहां एक दूसरे के लिए कोई जिम्मेदार नहीं होता। स्वच्छंद संबंध बंधन में नहीं बंधना चाहते,हां कुछ संबंध लंबे अंतराल के बाद विवाह में भी बदल जाते हैं। बहुधा ऐसे संबंध अक्सर दुख और अपमान के सिवा कुछ नहीं देते।

अनेक युवा आधुनिकता के नाम पर अपनी वर्जनाओं को लांघ जाते हैं। बगैर परिणाम की परवाह किए ,फिर परिणाम सुखद हो या दुखद, कौन उत्तरदायी होगा ?

बगल के फ्लैट वालों ने कोई आवाज भी नहीं सुनी थी। पुलिस को मीरा की एक वीडियो रिकॉर्डिंग सुसाइड से पहले की मिली, जिसे उसने अपने खोखले संबंधों के बारे में और उनकी परिणीति के बारे में अपने माता-पिता से क्षमा मांगते हुए रिकॉर्ड किया था। वह और नीरव पिछले 6 महीने से इस फ्लैट में रह रहे थे। दोनों एक दूसरे को विवाह से पहले समझ लेना चाहते थे। किंतु इधर कई दिनों से जब- जब वह उससे विवाह की बात करती, वह टाल देता, अब तो वह नाराज भी होने लगा था। इस रिश्ते का कोई अंज़ाम न देख नीरा डिप्रेशन में चली गई और उसने नींद की कई गोलियां एक साथ खाने से पहले सुसाइड वीडियो बना लिया था। वह नीरव को दोष नहीं देना चाहती थी बल्कि अपने जैसी गुमराह लड़कियों को सजग करना चाहती थी।

पुरुष और नारी सदियों से चल रही परम्परा के दायरे में वैवाहिक धर्म निभाते हैं। विवाह जैसी सोच और शाश्वत संस्था दूरदर्शिता का प्रमाण है। वरना समाज का सामाजिक ढांचा कब से चरमरा गया होता।

 काश! नीरा ने यह पहले समझा होता !

पिछले कुछ दशक से यथार्थ को नकार कर, विवेक को ताक पर रखकर,

प्रेम में किसी पर अंध विश्वास करके न जाने हर रोज कितनी युवतियाँ धोखा खा रही हैं,छली जा रही हैं। अपना जीवन तबाह कर रही हैं।  


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