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Shiv kumar Barman

Abstract Inspirational

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Shiv kumar Barman

Abstract Inspirational

भूल चुके थे

भूल चुके थे

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यह रचना किसी भी नियम की बाध्यता के आधार पर नहीं लिखी गई है ।


भूल चुके थे जिन्हें वो फिर याद आ गए,

कपड़ों में रखे कुछ खत मेरे हाथ आ गए।


आज रौशन है जिंदगी का कोना तो क्या,

आज फिर जिंदगी के वो दौर याद आ गए।


कहते हैं लोग, रोने कि आदत नहीं हमारी,

आज फिर इन आंखों में आंसू क्यों आ गए।


मिल जाते वो तो पोंछ देता उनके भी आंसू,

उन्हें भी क्यों पुराने अफ़साने याद आ गए।


नहीं पता किस शहर में रहता है वो आवारा,

उसके घर के रास्ते आज फिर याद आ गए।



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