कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract Crime Thriller


4.6  

कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract Crime Thriller


भेड़िये

भेड़िये

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वह मर चुकी थी...या यूँ कहे की मार दी गई थी।

ईश्वर से उसका बस एक सवाल था- “जिन कुत्तों ने मेरी यह यह हालत की उनको शायद कानून सज़ा दे दे पर मेरे मरने के बाद जो भेड़िये मेरे मान का मर्दन कर रहे हैं...उनका क्या ?”

ईश्वर के सामने एक तराज़ू लिए महिला थी...उसकी भी आँखों पर पट्टी बंधी थी।


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