बदलते रिश्ते (भाग-3)
बदलते रिश्ते (भाग-3)
राजेश को लगा था वो नीना को समय दे पाएगा और वो खुश हो जाएगी
पर ऐसा हुआ नहीं उसके चेहरे से नजर आता था वो खुश नहीं था हालांकि राजेश ने उसे समय देने की कोशिश की जितना वो दे सकता था
थोड़ी खिन्नता होने लगी खुद से की इतनी कोशिश के बाद भी वो नीना को खुश नहीं रख पा रहा
अगले दिन राजेश ने नीना से बात की आखिर वो ऐसा क्या करे की नीना को खुशी हो
आपकों अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं बस मुझे कुछ समय चाहिये
पर ऐसा क्यों पहले तो सब ठीक था
मेरी जिंदगी मे बहुत कुछ हुआ है मैं आपसे नाराज नहीं मुझे बस थोड़ा समय चाहिए
नीना तुम अगर नहीं बताना चाहती तो बात अलग है बाकी मैं तुम्हारे साथ हूं
आपका इतना कहना ही काफी है मेरे लिए कभी कभी कुछ ऐसा होता है खुद को ही जूझना होता है
मुझे यकीन है तुम खुद से भी जीतोगी
आपका ये यकीन ही मुझमे खुद पर और यकीन बड़ा देता है। राजेश नीना को हिम्मत देकर दूसरे कमरे मे चला गया
पर नीना तो बैठी सोचती रही आखिर ये सब क्या हो रहा उसके साथ
ऐसा क्या हो रहा था रहा था नीना के साथ जो वो राजेश से भी नहीं बता पा रही थी।

