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Pawan Gupta

Horror


3.4  

Pawan Gupta

Horror


बदला

बदला

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सुहाना सफर और ये मौसम हसीं....

   सुहाना सफर और ये मौसम हसीं..

हमें डर की खो न जाए कही ...

   सुहाना सफर और ये मौसम हसीं.....

यही गाना गाते हुए मैं कमल और दीपक लम्बी सड़क पर चले जा रहे थे, मौसम बहुत अच्छा था ठंडी ठंडी हवा चल रही थी, सड़क पर ज्यादा गाड़ियाँ नहीं चल रही थी, एक दो गाड़ियाँ आना जाना कर रही थी, सड़क के एक तरफ लम्बी लम्बी झाडिया थी, और दूसरी तरफ एक संकरा सा नहर, आकाश बिलकुल साफ़ था तारे साफ़ नज़र आ रहे थे , हम दोस्त 10 बजे ऐसे ही बातें करते गाना गाते चले जा रहे थे।

  अचानक सड़क पर पड़ी खाली कोक की केन को दीपक ने लात मारी केन लुढ़कता हुआ दूर जा गिरा, तभी कमल ने धीरे से कहा, भाई रात को किसी भी चीज को ऐसे नहीं मारना चाहिए, और ना ही किसी अजीब चीज को देखकर टोकना चाहिए, हम कमल की बातें सुन कर थोड़ा डर गए पर डर को छिपाते हुए दीपक ने बोला,

ये सब कुछ नहीं होता है, इसमें डरने वाली कोई बात नहीं है, वो खाली केन ही तो था, कोई भूत थोड़े ही था, बोल के दीपक हँसने लगा। 

     " तभी कमल ने कहा " 

अच्छा कोई बात नहीं मैं तुम दोनों को एक सच्ची कहानी सुनाता हूँ,बहुत अच्छी कहानी है ,तुम दोनों को बहुत पसंद आएगी।

 हम भी तैयार हो गए कमल ने कहानी शुरु की..


कमल ने बताया की ये कहानी उनके हिस्ट्री के टीचर ने सुनाया था,

जब वो हॉस्टल में रहते थे, उस समय मनोरंजन के साधन बहुत सीमित हुआ करते थे, ना फ़ोन ना लैपटॉप ना टीवी और ना ही और कोई इलेक्ट्रॉनिक मनोरंजन के सामान।

फिर भी लोग बहुत खुश रहते थे, और मनोरंजन के लिए कोई ना कोई रास्ता निकल ही लेते थे,

उन्होंने बताया कि उनके हॉस्टल में तीन दोस्त रहते थे, रवि , पुनीत , और राजेश। तीनों अच्छे दोस्त थे, और तीनों ही पढ़ने में शरारत करने में खेल में सब चीजों में आगे थे, इसलिए सब उनको पसंद भी करते थे, और इसी बात का फ़ायदा भी उन लोगो को मिल जाता था, जब भी वो शरारत करते पकड़े जाते तो उनको समझा के छोड़ दिया जाता था,

एक रात की बात है, उन सबने आपस में बात की।

रवि - यार बहुत दिन से लगातार पढ़ाई कर कर के बोर हो गए है, आज मूवी चलते है।

पुनीत - रवि तू बोल तो सही रहा है पर अब अचानक से कैसे जायेंगे।

राजेश - भाई मेरे पास एक आईडिया है, रात 9 बजे वाले शो में चलते है,

सब को बोल देंगे कि तबियत ख़राब है, और सोने चले जायेंगे, और एक सही मौका देख के निकल लेंगे, क्या कहते हो तुम लोग।

रवि - सही कहा राजेश आज रात ऐसा ही करते है।

   

उस रात तीनों ने ऐसा ही किया , और अपने हॉस्टल से 6 किलोमीटर दूर एक थियेटर में मूवी देखने चले गए।

उस टाइम या तो वो पैदल जाते या साइकिल से उनके पास और कोई रास्ता नहीं था , तो वो तीनों एक ही साइकिल पर चल दिए, रात अंधेरी थी तो उन्होंने अपने साथ एक टोर्च लाइट भी रख लिया।

मूवी हॉरर थी, मूवी ख़तम होते होते 12 बज गए, सब लोग अपनी अपनी गाड़ियों से कोई रिक्शा से कोई अपनी मोपेड से तो कोई अपनी साइकिल से सब लोग धीरे -धीरे अपने घर को चले गए, पर इनके हॉस्टल का रास्ता दूसरी तरफ था, और ये तीनों मूवी देख के बहुत डर भी गए थे,

 राजेश - भाई मेरी मानो तो आज हॉस्टल नहीं जाते है, बहुत डर लग रहा है, 

 पुनीत - बेटा आज हॉस्टल नहीं पहुंचा ना तो कल क्लास लग जानी है, कुछ भी हो आज हॉस्टल जाना ही होगा।

 रवि - पुनीत सही कह रहा है ,तू ..राजेश डरने से क्या होगा मन से डर को निकलते है, और हॉस्टल चलते है, वैसे भी ये सब फिल्में काल्पनिक होती है, ये हमारे मनोरंजन के लिए बनाया जाता है,

पुनीत - (हँसते हुए) ह्ह्हआआ ... जंगल के भूत से तो हम बच जायेंगे पर हॉस्टल के भूतो से हमें कौन बचाएगा , बोलकर तीनों हँसने लगे। और साइकिल लेकर हॉस्टल की ओर चल दिए ,हॉस्टल और थियेटर वाले रास्ते में एक छोटा सा जंगल पड़ता था, वो बहुत डरावना और अंधेरा भरा था, जब ये लोग वहां से गुजर रहे थे, तो तीनों बहुत डरे हुए थे, टोर्च की लाइट में रास्ता देखते - देखते धीरे - धीरे साइकिल चला रहे थे, तभी साइकिल के आगे बैठे रवि ने बोला। भाई ये पेड़ पर क्या लटक रहा है , सुनते ही पुनीत ने साइकिल रोक दी तभी राजेश जो साइकिल के पीछे बैठा था, उसने बोला भाई नीचे नहीं पेड़ पर देखो तीनों ने जैसे ही पेड़ पर देखा, वो लटकता हुआ हाथ उनकी साइकिल के हैंडल पर आ गया, और ऊपर देखते ही ये तीनों बेहोश हो गए, सुबह जब 4 बजे पुलिस की पेट्रोलिंग जीप आई तो पुलिस वालो ने उनके चेहरे पर पानी मारा और उनके होश में आने पर उनसे उनका एड्रेस पूछ कर उनको हॉस्टल में छोड़ आये, उन तीनों का कल रात की घटना से सर भारी था, वो हॉस्टल पहुंच के फ्रेश हो के कुछ नाश्ता करके दोबारा सो सो गए , किसी से भी उन लोगो ने रात की घटना का जिक्र नहीं किया, रात हुई पर दिन में अच्छी नींद लेने के कारण उन तीनों को रात में नींद नहीं आ रही थी, तभी उनका दोस्त उनके रूम में आया ,और उनसे बात करने लगा ,

भाई कल क्या हुआ था, पुलिस वाले तुम तीनों को लेके आये , वो बोल रहे थे,कि तुम तीनों जंगल में बेहोश थे, क्या हुआ था।

रवि - कुछ नहीं भाई बस कल हम बोर हो रहे थे, तो मूवी देखने चले गए थे, जब मूवी देख के वापस आ रहे थे, तो हमने पेड़ पर एक भूत देखा जिसके हाथ ज़मीन तक झूल रहे थे,उसके हाथ बहुत लम्बे थे बड़े - बड़े नाख़ून ......

रवि ने बस ये बोला ही था कि उसके दोस्त ने कहा, कहीं यही हाथ तो नहीं है?

ये कहते कहते उसका उसका दोस्त पेड़ वाले भूत में बदल गया।

ये सब देख कर तीनों फिर से बेहोश हो गए, सुबह होते ही तीनों को हॉस्पिटल में ले जाया गया, उनको बहुत तेज़ बुखार और कमजोरी महसूस हो रही थी, और पूरा शरीर काँप रहा था, उन तीनों के चेहरे को देख कर यही लगता था जैसे उन तीनों ने कुछ बुरा अनुभव किया है , दो दिन बीत गए उनकी हालत में बहुत सुधार हो गया था, एक रात उनके पास नर्स आई उसने तीनों को दवा और इन्जेक्शन लगाकर उनके पास बैठ गई, और बोली..

नर्स - बच्चों अब पहले से कैसा लग रहा है,

रवि - हम सब पहले से ठीक है ,

नर्स - चलो अच्छी बात है, तुम सब जल्दी ठीक हो जाओगे ,अच्छा बताओ आखिर तुम लोगो को हुआ क्या था।

पुनीत - सिस्टर हम मूवी गए थे, वहां से जब आ रहे थे, तो रास्ते वाले जंगल में एक हाथ लटकता देखा जब हमारी नज़र पेड़ पर गई तो हम बेहोश हो गए पेड़ पर भूत था, तब पुलिस वाले सुबह हॉस्टल छोड़ गए ,पर उसी रात हमारा दोस्त आया और उसने भी हमसे पूछा तो हमने जैसे ही उसे सब बताया उसने रूप बदल लिया वो हमारा दोस्त नहीं वही भूत था, रूप बदलते ही उसने बोला कहीं यही हाथ तो नहीं और हम बेहोश हो गए होश आया तो हम हॉस्पिटल में थे,

ये सुनकर नर्स मुस्कुराने लगी।

पुनीत - सिस्टर आप क्यूँ मुस्कुरा रही हो, क्या बात है? तो नर्स ने बोला कहीं यही तो नहीं था, ये बोलते ही नर्स उस भूत में बदल गई, उसके भी लम्बे लम्बे हाथ हो गए और वो हँसने लगी,

वही तीनों लड़के हार्ट अटैक से मर गए, जब ये बात हॉस्पिटल के लोगो को पता चला तो किसी को भरोसा नहीं हुआ कि वो लड़के हार्ट अटैक से मर सकते है क्योंकि लड़के ठीक हो गए थे ,और ना ही उनको कोई हार्ट की  बीमारी थी,

इस घटना के बाद जंगल का रास्ता रात के लिए बंद कर दिया गया, कोई भी हॉस्टल का लड़का जंगल के रास्ते कही भी नहीं जाते थे,

कमल की कहानी ख़त्म करते ही मैंने और दीपक ने कहा - भाई घर चलते है बहुत लेट हो गया है और हम सब घर आ गए ...

           

  

   

   


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