Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".
Win cash rewards worth Rs.45,000. Participate in "A Writing Contest with a TWIST".

niranjan niranjan

Romance


3  

niranjan niranjan

Romance


बैरी चांद

बैरी चांद

3 mins 286 3 mins 286

                    


मैं मेरी जिंदगी से प्रिया को भुला चुका था। शायद मैंने उसको अपने जीवन का एक सपना मान लिया था सोचा था कि सपने तो सपने होते हैं। मैं अपने जीवन मे प्रिया की कमी महसूस तो करता था, पर अब मैं कुछ नहीं कर सकता था।क्योंकि प्रिया की शादी हो चुकी थी और अब मैं उसकी जिंदगी में कांटा नहीं बनना चाहता था क्योंकि वह मेरे लिए मेरे प्राण के समान थी।

 प्रिया मेरी कॉलेज में पढ़ने वाली एक सुंदर और हंसमुख लड़की थी। वह कक्षा में हर कार्य को तल्लीनता से करती थी और हर किसी के लिए वह आंखों का तारा बनी हुई थी। प्रिया के साथ मेरी दोस्ती एक दिन कैंटीन में बैठे tea टाइम के समय हुई थी हम दोनों कैंटीन में अपनी अतीत की बातों में मशगूल हो गए और कभी-कभी कक्षा की घटनाओं को लेकर हंस रहे थे ।हमारा वहां से जाने का टाइम हो गया एक दूसरे को सी यू कहकर वहां से चल दिए ।अब हम कैंटीन में रोज मिलने लगे और ना जाने कब हमारी दोस्ती हो गई और धीरे-धीरे हमारी दोस्ती प्यार में तब्दील हो गई। अब तो मैं पिया के बिना रह नहीं सकता था हम दोनों एक दूसरे के साथ रहने की कसमें भी खाई थी परंतु समाज के रीति-रिवाजों के सामने प्यार का टिकना बहुत ही मुश्किल होता है ऐसा ही शायद हमारे साथ हुआ था।

प्रिया के परिवार वालों ने प्रिया की शादी कहीं और करना चाह रहे थे प्रिया के लाख मना करने पर भी वह नहीं माने।अब हम क्या कर सकते थे?

प्रिया मेरे से दूर नहीं जाना चाहती थी परंतु मैंने उनको समझाया कि यह समाज के रीति रिवाज हैं। हम ऐसे गलत कदम नहीं उठाएंगे क्योंकि हम परिवार की इज्जत के लिए ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि यदि हम भागकर शादी करते हैं तो यह समाज में परिवार वालों के लिए अनुचित होगा। और मैं प्रिया से बहुत ज्यादा प्यार करता था इसलिए मैं नहीं चाहता था कि प्रिया और उसके परिवार वाले मेरी वजह से समाज में नीचा देखाना पड़े। और यही मेरे सच्चे प्यार के निशानी थी।

 मैंने प्रिया को समझाया हम अगर अलग भी होंगे तो एक दूसरे के दिल में रहेंगे। हम कभी भी दूर नहीं होंगे इन बातों को लेकर मैंने प्रिया को शादी के लिए राजी कर दिया। परंतु मेरे दिल पर क्या बीत रही थी ?उसको क्या मालूम?

 प्रिया की शादी धूमधाम से कर दी गई अब हम दोनों दूर होकर भी पास का एहसास करते थे। मैं हर पल प्रिया को अपने पास पता था। सिर्फ उसकी याद और मेरे आंसू मेरे को कमजोर कर रहे थे ।परंतु मेरा विश्वास मुझे मजबूत कर रहा था।धीरे-धीरे में भी प्रिया को भुलने लगा अब मैं भी अपने काम में व्यस्त रहने लगा। अब तो बस नहीं जीवन जीने का एहसास हो गया उसके बिना रहने कि मुझे भी आदत पड़ गई थी।


आज रात का समय था छत पर खुले आसमान के नीचे बैठा था। ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। चांदनी रात अपनी आभा बखेर रही थी। मेरी नजर उस चमकते चांद पर पड़ी जो मुझे उन पुराने दिनों की ओर खींच ले गया। उस चांद को देखकर मुझे उस प्रिया की याद आ गई और उसके साथ बिताए गए हर पल को याद कर रहा था और आंखों में आंसू थे पता नहीं उसकी याद में रात कब गुजर गई। उस बैरी चांद ने उसकी याद दिला दी ,जिसको मैं भूल चुका था।



Rate this content
Log in

More hindi story from niranjan niranjan

Similar hindi story from Romance