अवॉर्ड
अवॉर्ड
"क्या मीना, तुम कभी-भी किसी अवॉर्ड फंक्शन में आती नहीं हो, ना ही तुम्हें कभी कोई अवार्ड मिला है। सबसे अच्छा, सुलझी सोच के साथ सकारात्मक लिखती हो। तुम्हारे लेखन से समाज में कितने सुधार आ रहे हैं। तुम्हें नहीं लगता कि तुम ही अवार्ड की असली हकदार हो।'
"हाँ सुरभि हकदार तो हूँ। इसीलिए तो मुझे रोज अवार्ड मिलते हैं। देखो, आज भी मिल गया।"
"रोज मिलते हैं? कैसे? कौन देता है? आज भी मिला? कब? किसने दिया?"
"अरे अभी-अभी तुम्ही ने तो दिया।"
"मैंने दिया?"
"हाँ, अभी-अभी तुमने मेरी लेखनी की कितनी प्रशंसा की यही तो मेरा अवार्ड है। अगर मेरे लिखने से समाज में सुधार हो रहा है फिर यह तो सर्वश्रेष्ठ अवार्ड है, जो मेरे पुण्य के खाते में जा रहे हैं। माना मेरे अवार्ड आँखों से नहीं दिखते हैं, लिविंग रूम में नहीं सजते हैं, लेकिन दिनों-दिन मेरी लेखनी को परिष्कृत करते हैं, मेरे जीवन में शांति और सुकून लाते हैं।
सबसे बड़ी बात मेरे मौन में सुकून है यानि
मुझे मेरे पुण्य का फल मिलने लगा है ।"
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राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित 5 January 2025
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रविवार को आयोजित मई 2025 कथा दर्पण-साहित्य मंच का मासिक कार्यक्रम "लघुकथा वाचन" में प्रस्तुत की।
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आदरणीय सतीश राठी sir व आदरणीय दीपक गिरकर sir द्वारा संपादित पुस्तक "क्षितिज" में प्रकाशित। नवंबर 2025
