अरेंज मैरिज (एक तरफा प्यार) -7
अरेंज मैरिज (एक तरफा प्यार) -7
रिंग हो रहे फोन पर किसी का नंबर देखकर यश की आंखें गुस्से में लाल हो गई, मुस्कुराहट से फैले उसके होंठ सिकुड़ गए… भौंहें आपस में जुट गई ,उसने दांत पीसते हुए कॉल रिसीव किया और कहा… याद आ गई मेरी… भूलना चाहो भी तो भूल नहीं सकते मुझे…! ओह सॉरी… यह याद शायद मेरी नहीं अपने भाई की आई होगी…! क्या उसका दर्द भरा आवाज सुनने के लिए फोन किया है…?!" यश ने रोबदार आवाज में कहा!
" बहुत उड़ रहे हो यश… जमीन पर आओ वरना बहुत महंगा पड़ेगा…!" फोन करने वाले ने धमकाते हुए कहा…!"
" सस्ती चीजें तुम क्रिमिनल्स यूज़ करते हो…, यश अपने फैशन में अक्सर कीमती चीज ही यूज़ करता है …!"यश ने अपने अंदाज में जवाब दिया.. उसके होंठ के कोने स्माइल से मुड़े हुए थे, भावी तनी हुई थी!
" एटीट्यूड छोड़कर पॉइंट की बात सुनो यश…!" सामने वाले की बात से पता चल रहा था कि वह अपना गुस्सा कंट्रोल करने की जीत तोड़ कोशिश में है!
" ओके पॉइंट पर बात करते हैं…, बोल क्यों याद किया मुझे… क्या अपने भाई की याद आ रही है …?.हां …बहुत दिन हो गए उसकी दर्द भरी आवाज नहीं सुनी तुमने…?!" यश ने उसके जख्म को खरोंचते हुए कहा !
उसने भी तिल मिलते हुए कहा, "अपनी हद में रहो यश… मुझे उकसाने की कोशिश मत करो… वरना जल जाओगे.. आइंदा मेरे भाई को छूने से पहले एक बार सोच लेना कि उसके जिस्म पर एक खरोच तुम्हारे किसी अपने को मौत देगा…!"
" सच में …! हा …हा…हा…हा…हा …!"उसकी बातें सुनकर यश बहुत जोर-जोर से हंसने लगा। उसकी हंसी सामने वाले का कलेजा जलने लगी ।
"जितना हंसना है …हंस लो यश…, जब तुम्हारी अलका मेरे कदमों में दम तोड़ेगी…!"," खबरदार…! एक लफ्ज़ भी आगे कहा तो …!"उसकी बातें पूरी होने से पहले ही यश दहाड़ उठा उसकी आंखों में खून उतर आई! यश की जोरदार दहाड़ से फोन करने वाला शख्स एक पल के लिए कांप गया।
" अगर मर्द की औलाद है तो… मुकाबला मुझे करना …अलका के लिए एक शब्द भी कहा तो …मौत बहुत दर्दनाक होगी…!" यश ने दांत पीसते हुए कहा!
" सॉरी यश …,हम बेवजह बहस कर रहे हैं…, ठंडे दिमाग से मेरी बात सुनो …!"सामने वाले ने अपने दर पर काबू पाते हुए कहा !
"मेरा दिमाग अक्सर ठंडा ही रहता है …आग तुम लोग लगाते हो …,.!बातें और मुकाबला मुझे किया करो …मेरे अपनों को बीच में लाया तो तुम्हारा साया भी तुम्हारा अंत देखकर कांप उठेगा…!" यश का गुस्सा अब भी बरकरार था!
" वह सब छोड़ो यश …पॉइंट यह है कि मेरे भाई को छोड़ दो…, बदली में जो चाहोगे देने के लिए तैयार हूं…!" सामने वाले ने डील करते हुए कहा!
" रावण को मैंने छोड़ने के लिए नहीं पड़ा…, छोड़ दूंगा लेकिन फांसी में लटकाने के बाद …!"यश ने अपने परिचित अंदाज में कहा!
" माना यश तुम बहुत ईमानदार हो… पर इस ईमानदारी से क्या मिल रहा है तुम्हें …?दो जोड़ी जूते के साथ दो जोड़ी यूनिफॉर्म एक जीप… जिसमें यहां से वहां मुजरिमों के पीछे भागते रहते हो… हाथ मिला लो मुझसे ऐसों आराम की जिंदगी जीओगे …!"उसने दोस्ती ऑफर करते हुए कहा!
" मुझे खरीदने का ख्वाब छोड़ दो रॉकी …तुम्हारी इतनी दौलत नहीं कि मेरी ईमानदारी खरीद सको …,अपने पैसे अपने भाई के जमानत पर खर्च करो जो कि उसे मिलाने से रहा… पर यह सोच लेना जब तक वह मेरे कब्जे में है …सांस ले रहा है.. रिहाई के साथ उसकी सांसे भी रहा हो जाएगी…!" यश ने हंसते हुए कहा और कॉल कट कर दिया ! उधर रॉकी उसकी बातें सुनकर बौखला गया ।
उसने फोन फेंकते हुए कहा "बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी यश तुम्हें…, तुम्हारा यह गुरूर और ईमानदारी देखना तुम्हें कैसे तबाह करेगी…!" रॉकी ने बहुत गुस्से में चिल्लाते हुए कहा उसके आसपास खड़ी गॉड्स उसकी आवाज सह ना सके उन्होंने अपने कान बंद कर लिए !
"जाल बिछाना शुरू करो… इस यश की कमजोरी अलका को कब्जे में रखने की तैयारी करो…!" उसने अपने आदमियों को ऑर्डर दिया वह सारे अपने काम में जुट गए !
"तुम्हारी हर बात की सजा अब तुम्हारी अलका को मिलेगी… तुमने जितने दर्द मेरे भाई को दिए हैं… जिन जिन कर वसूलूंगा उस अलका से …!"रॉकी की आंखें शैतानियत से भरी हुई थी। अलका का चेहरा याद आते ही उसके होंठों पर हैवानियत भरी मुस्कराहट आ गई!
" यश सर…! आपके लिए कोई यह पैकेट छोड़कर गया है…!" हिम्मत सिंह एक पैकेट लेकर यश के पास आया! यश ने उसके हाथ पैर रख पैकेट को गौर से देखा जिसे देखकर उसके होठों पर एक मुस्कुराहट आ गई! उसे देखकर इस वक्त कोई नहीं कह सकता कि वह कुछ पल पहले गुस्से में बौखलाया हुआ था ।
"यहां पर रख दो…!" यश ने कहा तो हिम्मत सिंह उसे बॉक्स को वहां रखकर चला गया! यश ने टेबल से पानी का ग्लास उठाया और पानी पीते हुए मुस्कुरा कर उसे बॉक्स को देखने लगा। उसने पानी का गिलास साइड में रखा और बॉक्स खोल कर देखने लगा। उसे बॉक्स के अंदर बहुत खूबसूरत नेकलेस का सेट था जिसे उसने अलका को तोहफे में देने के लिए मंगवाया था ।
"आज रात हिसाब चुकता करने के बाद मैं इसे तुम्हें दूंगा…!" यश ने रात और सुबह की बातें याद करते हुए कहा. उसने फोन उठाया और अलका का नंबर डायल किया! उधर अलका का फोन रिंग होने लगा।
अलका फोन के पास आई उसने फोन उठा कर देखा यश का नंबर देखते ही वह चौंक गई । "कमाल है यश… मुझे फोन कर रहा है …?!"यह सोचकर वह खुश हो गई अगले ही पल उसकी मुस्कुराहट गायब हो गई!
" अलका तू भी एक नंबर की पागल है …यश ने फोन किया है मतलब तेरे लिए थोड़ी ना किया होगा …?वह तो एंजेल के बारे में पूछेगा …?मैं क्यों बताऊं खुद से पूछ ले अगर नहीं पूछ सकता तो… मम्मी जी के फोन पर कॉल करें …मुझे उससे बात नहीं करनी…!" उसने नाराज होते हुए फोन को उसी जगह पर रख दिया! एक बार कॉल रिसीव न होने पर यश बार-बार कॉल करने लगा। अलका ना चाहती हुई भी उसे नजरंदाज कर रही थी रिंग आना बंद होते ही वह फोन के पास आई ।
"अब फोन क्यों नहीं कर रहा… अच्छा है ना करें …मैं कौन सा उठाने वाली हूं… लेकिन उठा लेना चाहिए था.. अगर कोई जरूरी बात हुई तो तू भी ना…!"," अलका बेवजह नाराजगी लेकर बैठी है… बात कर ही लेती तो क्या चल जाता…?!" वह खुद से ही नाराज होने लगी।
अलका का फोन ना उठाने पर यश ने प्रतिमा को फोन किया। “ जल्दी बोल क्या कह रहा है.…!" प्रतिमा ने फोन उठाकर कहा ! "अलका ठीक तो है ना मम्मी… मैं कब से उसे फोन कर रहा हूं… वह जवाब नहीं दे रही…!" यश ने बहुत परेशान होकर कहा!
"अरे …! तू इतना परेशान क्यों हो रहा है… सो रही होगी इतनी छोटी सी बात पर परेशान हो रहा है… चल अपना काम करो मुझे भी करने दे इतना …!कहकर उन्होंने फोन कट कर दिया पर यश को उनके जवाब से संतुष्टि नहीं मिली उसका दिल अब भी बेचैन था!
"हिम्मत …जीप निकाल…!" उसने हवलदार हिम्मत सिंह को आवाज देते हुए कहा थोड़ी ही देर में वह घर पहुंचा! घर में दाखिल होते ही वह अलका के कमरे में पहुंचा तो देखा अलका अलमारी के पास खड़ी कुछ देख रही थी ! उसे अपने सामने देखकर वह खुद को रोक नहीं पाया लंबा डाक भरते हुए उसके पास पहुंचा और खींच कर उसे गले लगा लिया। " दिमाग खराब है तुम्हारा…? फोन क्यों नहीं उठा रही थी मेरा…?!" उसने अलका को अपनी बाहों में करते हुए पूछा.. अलका को लगा जैसे अचानक कोई बिजली उसे पर जाकर गिरी वह स्तब्ध उसे देखते रह गई! यश ने उसके चेहरे की तरफ देखा तो हैरानी सी उसकी आंखें फैल गई।
बाकी अगले भाग में…!
क्रमशः

