अंतरिक्ष की शक्तियां
अंतरिक्ष की शक्तियां
बाबा जी को सभी बच्चे गांव की चौपाल में घेर कर बैठ गये गर्मियों के अवकाश में सभी लोग 1 माह को घर आये थे।बस सभी बच्चे आज अंतरिक्ष और उसकी शक्तियों के बारे जानना चाहते थे।
सुनों बच्चो मैने जो पुस्तकों में पढ़ा है उसी सब के विषय में तुम्हें बता रहा हूं
वैज्ञानिकों का कहना है कि एक निश्चित ऊंचाई के बाद (लगभग 100 किलोमीटर )ऊपर के बाद आकाश समाप्त हो जाता है उसके बाद अंतरिक्ष की शुरुआत होती है आकाश के पर्यायवाची गगन आसमान होते है।अंतरिक्ष को व्योम कहना सटीक होगा।
अंतरिक्ष ऑक्सीजन रहित निर्वात वैक्यूम जैसा है जहां हम कोई आवाज नहीं सुन सकते हैं। अंतरिक्ष को अंग्रेजी में स्पेस कहते हैं आकाश में ना तो हवा है और ना ही ध्वनि है। केवल खतरनाक रेडिएशन, अल्ट्रावायलेट किरणें एक्सरे मैग्नेटिक फोल्ड भरी पड़ी हुई है।
इसके ऊपर ग्रह उपग्रह नक्षत्र तारे उल्कापिंड आकाशगंगा ब्लैक होल आदि। अंतरिक्ष नापने की इकाई प्रकाश वर्ष है। अंतरिक्ष अनेक रहस्यों से भरा हुआ है।
अंतरिक्ष का न कोई ओर है न छोर है, अनंत है ,कोई किनारा भी नहीं है ,असीम है। यहां पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल भी काम नहीं करता है।
वेद हमारे सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं उनका कथन है ईश्वर अजन्मा, अप्रकट, निराकार है। वह अनंत अंतरिक्ष अरबों योजन में सर्वत्र व्याप्त है। ब्रह्मांड का 95 परसेंट अभी अनदेखा रहस्य अनसुलझी शक्तियां है। अंतरिक्ष में हमारे वैज्ञानिक तो 5 परसेंट को ही देख व जान सके हैं डार्क मैटर व डार्क एनर्जी जैसे रहस्य अभी भी रहस्य हैं।
अंतरिक्ष हमेशा से आदि -अनादि काल से हमारी उत्सुकता का विषय रहा है।इस अनंत असीमित ब्रह्मांड में लाखों रहस्य छुपे हैं जो विज्ञान के लिए आज भी अनसुलझे हैं केवल मनीषियो व योगियों के लिए गम्य है।ग्रह नक्षत्र तारों से हमारे आध्यात्म ग्रंथों का पुराना सम्बन्ध रहा है। नासा की खोज भी अभी यहां तक नहीं जा पाई है।
हम जैसे आम जन के लिए तो सांइस सिटी ,स्पेस सेन्टर व तारामंडल ही रहस्य मई ,करिश्माई व शक्तिशाली लगते है।
हमारा शरीर पंच तत्वों से बना है जिसमें "छिति, जल, पावक, गगन ,समीरा पंच रचित यह अधम शरीरा "।रामचरितमानस में भी कहा गया है। अंतरिक्ष से ही चारों की उत्पत्ति हुई है पंचतत्व में मूल तत्व आकाश ही है आकाश एक ऐसा तत्व है जिसमें अग्नि, वायु और जल विद्यमान है। आकाश से वायु, वायु से अग्नि ,अग्नि से जल ,जल से पृथ्वी उद्भूत है।
अंतरिक्ष ही ब्रह्मांड है।" यत पिंडे तथा ब्रह्मांडे "जो हमारे शरीर में हैं वही ब्रह्मांड में है।आकाश तत्व ही ध्वनि (शब्द) है
जानइ जेहि देहु जनाई जानत तुम्हहि-तुम्हहि होइ जाई।
