STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Abstract

3  

Shailaja Bhattad

Abstract

अहम्

अहम्

1 min
2

"यह कौन है? पहले कभी देखा नहीं।" "अपने इस बगल वाले कॉलेज की व्याख्याता है। मेरे अधीन पीएचडी करने आई है।" पूरे एक साल बाद ट्रांसफर से वापस अपने ही शहर के महाविद्यालय में आई, प्राध्यापिका बिंदु ने अपनी सहकर्मी स्मिता से पूछा। "अरे वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है। इससे तुम्हारा भी ज्ञानवर्धन होगा। वैसे एक बात बताओ।" "पूछो।" "यह व्याख्याता बनने के बाद पीएचडी करने आई थी? या पीएचडी करते-करते कॉलेज में व्याख्याता के लिए चयनित हो गई?" स्मिता के शब्द सुन, छात्रा के चेहरे पर उभर आए असहज भाव को देखकर बिंदु ने पूछा। "बाद में।" "यानी व्याख्याता तुम्हारे अधीनस्त नहीं आई थी, एक सामान्य छात्रा ही आई थी।" "हाँ! सही कहा।" "फिर तुम्हें नहीं लगता? कि अभी-अभी जो तुमने कहा है, वह उसे आहत कर सकता है?"


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract