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Vigyan Prakash

Classics

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Vigyan Prakash

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अधुरी कहानियाँ

अधुरी कहानियाँ

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कुछ कहानियाँ ऐसी होती है की जिन्हें पूरा कर देने पर लगता है जैसे कुछ गलत कर दिया हो। जैसे वो खत्म होने के लिये शुरु ना हुई हो। जैसे उन्हें खत्म कर देने पर उनमें अधुरापन आ जाता है। लगता है जैसे उन्हें बस लिखते ही जाये।

कभी शाम एकटक बैठ कर सूरज को डूबते देखने वाले से पूछो क्या वो सूरज को डूबने देना चाहता है।

अगर उसने हाँ में जवाब दिया तो उसने ठीक से सूरज को डूबते नहीं देखा होगा। एकटक देखने वाले मोहब्बत कर बैठते हैं। उनसे विरह सहा नहीं जाता।

वो अगली शाम तक का इन्तजार नहीं करना चाहते वो चाहते है ये शाम ही चलती रहे।


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