STORYMIRROR

Deepti S

Romance Classics Fantasy

4  

Deepti S

Romance Classics Fantasy

यूँ आओ कि

यूँ आओ कि

1 min
245


यूँ आओ कि मेरे सूने नयनों में स्वप्न सज जायें

पतझड़ बगिया में फिर रंगबिरंगे पुष्प खिल जायें


यूँ आओ कि दुनिया रंगीन सी लगने लगे

काले रंग में भी चाँद सी दुनिया चमचमाती दिखने लगे


यूँ आओ कि रास भी रचने लगे 

श्याम और राधा जैसा प्रेम रंग अंतर्मन चढ़ने लगे


यूँ आओ कि प्रातः वेला में पक्षियों की गूँज मदमस्त लगे

छोड़ बीते लम्हों की कहानी जीवन में मधुर संगीत बजने लगे


यूँ आओ कि कोई दिल की तड़प भी मिटने लगे

तुम्हारा नाम ले हृदय में लहरों सी हलचल उठने लगे


यूँ आओ कि कोई कशिश बाक़ी न रह जाये 

कोई पूछे कि खुश क्यूँ हो तो लबों पर नाम तेरा आये।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance