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Ram Chandar Azad

Tragedy

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Ram Chandar Azad

Tragedy

यह कैसा अभिशाप है?

यह कैसा अभिशाप है?

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जलता है हर साल ये रावण

मरता नहीं कभी ये रावण

अग्निदेव भी हतप्रभ दिखते,

असर न करता ताप है।

यह कैसा अभिशाप है ?

आती है हर साल दीवाली,

हर दिल में लेकर खुशहाली  

फिर भी रोज सुनाई पड़ता।


सीता का करुण विलाप है

यह कैसा अभिशाप है ?

जलती है प्रतिवर्ष होलिका,

रंगों में प्रतिबिम्ब होलिका।


अमर गीत फागुन है गाता,

मस्ती का आलाप है

यह कैसा अभिशाप है ?

सच्चाई के पीछे छिपकर,

झूठ सदा चलता आया है।

हलचल -सा जो श्रवनित होता,

उसका है पदचाप है

यह कैसा अभिशाप है ?

पुष्प सदा उपवन में ही खिलेगा।

न्याय अदालत में ही मिलेगा

यारों ! सच के निर्धारण का,

यह कैसा परिमाप है ?

यह कैसा अभिशाप है ?


उपदेशों का बाजारों गरम है

पैसा -पूजा,धरम,करम है

वल्कल वस्त्रों के पीछे अब,

मंजनूपन का छाप है

यह कैसा अभिशाप है ?


जिन्हें देश पर मरना चहिये,

वही देश को लूट रहे हैं

श्वेत वस्त्र, गाँधी की टोपी,

सुरा सुंदरी ठाट है

यह कैसा अभिशाप है ?


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