यह कैसा अभिशाप है?
यह कैसा अभिशाप है?
जलता है हर साल ये रावण
मरता नहीं कभी ये रावण
अग्निदेव भी हतप्रभ दिखते,
असर न करता ताप है।
यह कैसा अभिशाप है ?
आती है हर साल दीवाली,
हर दिल में लेकर खुशहाली
फिर भी रोज सुनाई पड़ता।
सीता का करुण विलाप है
यह कैसा अभिशाप है ?
जलती है प्रतिवर्ष होलिका,
रंगों में प्रतिबिम्ब होलिका।
अमर गीत फागुन है गाता,
मस्ती का आलाप है
यह कैसा अभिशाप है ?
सच्चाई के पीछे छिपकर,
झूठ सदा चलता आया है।
हलचल -सा जो श्रवनित होता,
उसका है पदचाप है
यह कैसा अभिशाप है ?
पुष्प सदा उपवन में ही खिलेगा।
न्याय अदालत में ही मिलेगा
यारों ! सच के निर्धारण का,
यह कैसा परिमाप है ?
यह कैसा अभिशाप है ?
उपदेशों का बाजारों गरम है
पैसा -पूजा,धरम,करम है
वल्कल वस्त्रों के पीछे अब,
मंजनूपन का छाप है
यह कैसा अभिशाप है ?
जिन्हें देश पर मरना चहिये,
वही देश को लूट रहे हैं
श्वेत वस्त्र, गाँधी की टोपी,
सुरा सुंदरी ठाट है
यह कैसा अभिशाप है ?
