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Bhavna Thaker

Romance

4  

Bhavna Thaker

Romance

यादों की पुरवाई

यादों की पुरवाई

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पलकें मूँदे करवटों की सलवटें गिनती

ये नीले निशान की कहानी को ढूँढती

मेरे खयालों की महफ़िल

सजी है उरोज के आसमान में,


 चले आओ ना 

आज दोहराते हैं लम्हें वो हसीन, 

चिनार के सूखे पत्तों की सरसराहट 

आज भी गूँजती है वादियों में 

हमदोनों के पदचिन्ह से जो उठती थी !


संदल सी महकाती है

आज भी वो सुगंधित उष्मा 

जो ऊँगलियों के बीच पसीजती थी

गवाही देती तेरे मेरे मिलन की ! 


उफ्फ़फफफ वो हया से झुकती मेरी

पलकों को अपने लबों से तुम्हारा उठाना, 

वो आग आज भी कायम है 

मेरे बादामी रुख़सार को गुलाबी करती, 

ठोड़ी पर बैठे खिलखिलाती....!


उस दिन झील के आईने में

उतरी थी तस्वीर तेरी-मेरी याद है ?

वो कँवल भी मुस्काया था जब

आँख तुमने मारी थी मैं नैन

झुकाए शर्माई थी...!


आज रोम रोम चर्राया मेरा,

छील गया देखो तुम्हारी याद के

नुकीले एहसास से,

वो चुम्मी वाला मरहम ईईईशशशशश 

कितना शीतल होता था..!


याद की पुरवाई में अब तो

बस पलते हैे सपने

"तू वहाँ मैं यहाँ" पर

फासलों की कशिश से

कहाँ मरती है प्रेम की चरम, 


शिद्दत से जुनूँ जगा जाती है वो

दूर से तुम्हारा बेइंतेहाँ चाहना मुझे

मेरा यकीन से गुज़र जाना

तुम्हारी यादों की गलियों से

है ना परिभाषा यह प्रेम की।


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