STORYMIRROR

ritesh deo

Romance

4  

ritesh deo

Romance

सुहाना

सुहाना

1 min
13

मुसलसल उदासी का सफर और तेरा अचानक मिलना

किसी सुस्त नाव को जैसे दरिया की तेज़ धार मिले


तूने छोड़ा कल शब तभी से जम गई हूँ मैं

मुझे छुओ की मेरे वक्त को भी रफ़्तार मिले


मेरी कम बयाँनगी और उसपे तुम्हारा नासमझपन 

संगीन मरीज़ को ज्यों नीम चारागार मिले 


जमा है मेरे घर तेरे सब ठुकराए हुए 

एक ही फूल के हम सब तलबगार मिले


तमाम उम्र का वादा करो और फिर मुकर जाओ

 बेवफ़ाओं पर लिखने को कुछ आश्आर मिले 


इत्र साज़ हाथों का लम्स दो और कीमती बना दो

 कागजी फूल को अब तक ना खरीदार मिले 


किसी दिन ढूँढ ही लेंगे लोग उदासियों की दवा 

मुमकिन है तब तलक मेरी तस्वीर पर हार मिले।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance