यादों की बारिश...।
यादों की बारिश...।
भीगा हूं बारिश में... आज फिर,
न जाने क्यों?....बेमौसम की बारिश,
मेरे जख्मों को ताजा कर... मुझे भिगो देती...हैं,
मैं भी पागल जो खोया रहता उसकी यादों में,
उसके कहे शब्दों की कोरी दुनिया में,
न जाने क्या जादू था उसकी आंखो में,
उसके एहसास को आज भी करता महसूस हूं,
जब कभी सोता गहरी नींद में,
न जाने उसकी यादें जगा देती मुझे नींदों से,
न जाने क्यों आज भी उसके आने की उम्मीद में,
उसके दिए हर उपहार को संभाले रखा है मैंने,
बेशक लोग पागल कहते हैं पर कैसे कहूं,
ये मोहब्बत है,
जो न जीने देती है सुकून से न मरने देती है चैन से,
जानता हूं फिर भी आस लगाए बैठा हूं कि वो आएगी,
मुझसे कहेगी ... क्यों उदास बैठे हो,
चलो मेरे लिए गजरा लाओ बालों में लगाओ,
और हां...एक अच्छी सी चाय बना लो पहले,
क्यों...उसकी यादों में इतना खो गया,
क्यों मुझे उससे इतना प्यार हो गया,
कि खुद को ही न जाने कहां भूल गया,
देखा सुना मैंने प्यार में सुधबुध भूल जाते हैं लोग,
पर आज समझ पाया क्यों कहते हैं ऐसा लोग,
प्यार न उम्र देखता न माहौल,
न करता कोई परवाह,
बस जब होता है किसी से,
न जाने खुद को कहां भुला बैठता,
आज आया समझ क्यों कहते हैं सब।

