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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Romance

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Romance

याद हमेशा तुम आओगे

याद हमेशा तुम आओगे

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जिन राहों को छोड़ चुके हो , भूल उन्हें क्या तुम पाओगे?

सच कहता हूँ उन राहों में, याद हमेशा तुम आओगे ।।


टूटे सपनों में सपनो का, एक सुखद मधुमास लिखा है ।

मैंने मिट्टी के अंदर भी , जीवन का विश्वास लिखा है ।

जब बिखरोगे ठोकर खाकर, तुम भी मुझमे घुल जाओगे....

सच कहता.......।।


हँसते गाते बीते मौसम, सुख- दुख के कुछ वीराने भी ।

मन की भोली दुनिया वाले, भूले-बिसरे अफसाने भी ।

याद करोगे मन ही मन में, तड़पोगे भी घबराओगे...

सच कहता.........।।


प्यास नही बन सका मगर हाँ, तुमको प्यास बनाया तो है ।

उन अधरों की एक हँसी पर, सागर को ठुकराया तो है ।

तुम आँखों के खारे जल से, कैसे प्यास बुझाओगे.....

सच कहता ...........।।

 


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