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Radhamohan Pujahari

Romance

3  

Radhamohan Pujahari

Romance

याद आती हो तुम

याद आती हो तुम

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धरती की इस हरियाली में

सूरज की धूप भरी प्याली में

याद आती हो तुम....


हँसते हुए फूलों की कली में

जनपथ की सुनसान गली में

याद आती हो तुम....


गुनगुनाते भँवरों की टोली में

दिल की हर भाषा की बोली में

याद आती हो तुम....


मस्त-मौला हवा पूछने लगी

वह है कौन ?

वह है कौन ?

कैसे कहूँ उसे कि

"तुम तुम ही हो"...

न जाने तुम बिन ये दिल भी 

आज क्यों है मौन ?


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