STORYMIRROR

Radhamohan Pujahari

Abstract Romance

3  

Radhamohan Pujahari

Abstract Romance

"याद आती हो तुम"

"याद आती हो तुम"

1 min
277

धरती की इस हरियाली में

सूरज की धूप भरी प्याली में

याद आती हो तुम....


हँसते हुए फूलों की कली में

जन पथ की सुनसान गली में

याद आती हो तुम....


गुनगुनाते भँवरों की टोली में

दिल की हर भाषा की बोली में

याद आती हो तुम....


मस्त-मौला हवा पूछने लगी

वह है कौन ?

वह है कौन ?

कैसे कहूँ उसे कि

"तुम तुम ही हो"...

न जाने तुम बिन ये दिल भी 

आज क्यों है मौन ?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract