STORYMIRROR

Radhamohan Pujahari

Inspirational

4  

Radhamohan Pujahari

Inspirational

श्रांत पथिक

श्रांत पथिक

1 min
547

दिशाहीन पथ पर राह भटकनेवाला

श्रांत पथिक हूँ मैं

उजड़े हुए सपनों के साथ 

लड़खड़ाते कदमों पर चल दिया 


अनिश्चित जीवन की 

अंतिम इच्छा लिए हथेली पर

मानों किसी ने लोहे की जंजीर से

जकड़ कर रखा है

मेरे निस्तेज शरीर को


आगे बढ़ना मुश्किल है

फिर भी कोशिश जारी है

अंतर्मन की दीया बुझने से पहले ही

प्राप्त कर सकूँ उस अनंत परमात्मा को


जहाँ खुद को जलाकर मैं

मुक्ति का मार्ग दिखा सकूँ

मुझ जैसे राह भटकने वाले 

मेरे श्रांत पथिक भाइयों को।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational