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Jyoti Deshmukh

Fantasy

4  

Jyoti Deshmukh

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week- 31( घर)

week- 31( घर)

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ये ईंट पत्थर से बना ढांचा नहीं घर है हमारा 

प्यारा सा घरौंदा है रहता जिसमें परिवार हमारा 

वो प्यारी शरारत, जिससे बचपन की यादें जुड़ी हो वो घर- आंगन प्यारा-सा 


जहाँ माँ की ममता मिले, पिता का आशीष सर पर हो जहाँ 

जहाँ अपनों की छाया हो खुशियों की बहार जहाँ 


जहाँ दादा- दादी का प्यार दुलार सदा 

अनुभव सुनकर सीखा जिंदगी में ढलना 

बैठा हूँ जब थक हार तो मिले अपनों का प्यार जहाँ 

सुख दुःख जहाँ बाँटा जाता, समय न जाने कब बीत जाता 

मिलकर बैठते सब जहां खुलता जहां खुशियों का पिटारा 


आँधी, तूफानों से हमें घर बचाता इंसान जहां अपने को सुरक्षित पाता 

तीज त्यौहार जब घर में होता आँगन फूलों से सजता 

दीपावली के दीयों से रोशन घर जगमग कर्ता 


जिस घर में उंगली पकड़ सीखा मैंने चलना 

वो गिली- डंडा, क्रिकेट का खेल सब के साथ घर के आंगन में खेलना 


बतियाते परिवार संग सुबह की चाय आँगन में पीना 

मिलता जहां अपनों का साथ, जहाँ होती रिश्तों में मिठास 

मुसीबत में देते सब एक दूसरे का साथ 


जहाँ मिले छोटों से प्यार, बड़ों से मिले स्नेह और आशीर्वाद 

ऐसा सुखी घर संसार हमारा 


जहाँ हो बुजुर्ग परिवार के दरख्त, ऐसा प्यार से सींचा सुंदर आशियाना /बसेरा  हमारा 



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