STORYMIRROR

Badal Singh Kalamgar

Romance

3  

Badal Singh Kalamgar

Romance

व्याकुल है मन..

व्याकुल है मन..

1 min
150

व्याकुल है मन व्याकुल है तन

व्याकुलता है जीवन में 

एक तुम्हारे प्रिय मेरे

नही है कुछ कंचन नैनन मे

तेरे जैसी ना खुशबू है

इन फूलों चंदन मे

मै हो गयी तेरी दीवानी

और ना कुछ है मुझ जोगन मे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance