STORYMIRROR

Badal Singh Kalamgar

Romance

3  

Badal Singh Kalamgar

Romance

आओ हाथ बढ़ाओ

आओ हाथ बढ़ाओ

1 min
230

आओ हाथ बढ़ाओ

प्रेम ऊँगली अँगूठी से भर जाने दो


नज़र मिलाओ मत सरमाओ मुश्काओ

सुबह शाम अभी हो जाने दो


अभी विचरण भ्रमण मे भवर सा

तुम खुशबू हो महक जाने दो


अभी अभी मिले है वक़्त को ठहराओ

या खुद को उम्र भर ठहर जाने दो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance