Premdas Vasu Surekha 'सद्कवि'
Action Inspirational Children
दुनिया इश्क की दरिया में बह गई
जनाब
सब लुट गया,
बिक गया,
फिर भी वतन इन रख वालों के नाम रह गया
नमन पुलवामा वीरों को
मैं समय का पर...
ज्योत जलाई जि...
अपना स्वरूप म...
किसको समझाएं ...
धर्म मौत का स...
पति परमेश्वर
दौर मानवता
वतन रखवालों
गायब गायब सब ...
जिस तरह भी सजा लो हमें एक न एक दिन तो हमें टूट जाना होता है जिस तरह भी सजा लो हमें एक न एक दिन तो हमें टूट जाना होता है
अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।। अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।।
मानती हूँ थोड़ी पागल हूँ पर इतना अहसास जरूर है मानती हूँ थोड़ी पागल हूँ पर इतना अहसास जरूर है
तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ। तुम्हें पता नहीं यारों, तभी तो फौजी कहलाता हूँ।
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय। व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय।
मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ। मैं तुम्हारे वास्ते उस फौजी के टुकड़े चुन लाया हूँ।
खटास और मिठास घुला जैसा स्वाद है मजेदार खट्टी मीठी गोलियां। खटास और मिठास घुला जैसा स्वाद है मजेदार खट्टी मीठी गोलियां।
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ। बस कुछ इस तरह, अपनी जिन्दगी से खुद के लिए खुशियों के कुछ पल चुरा लेती हूँ।
ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे ये पैसे, शोहरत, इज़्ज़त, दौलत से तुम बस नाम कमाओगे
कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं। कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं।
रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में। रोज ही आशीष मिलता था चरण छूए बिना अब नमस्ते का न उत्तर आ गये परदेश में।
तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है। तब हमें ऐसे महान दिव्यांग महापुरुष को पढ़कर सकारत्मक का ख्याल फिर से आ जाता है।
अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे। अपनी नियति अपने हाथों से अब हम स्वयं संवारेंगे।
जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे
तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए तीन कपड़ों में तुम्हें ब्याह कर लाए थे अपने होनहार बेटे के लिए
आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया आज कैसी सौगात तू दे गया अपनी प्यारी मुन्नी को तू आज कैसे अकेला छोड़ गया
देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खोता है देख तिरंगा लहराता हमें नाज़ देश पर होता है सोचो आज़ादी पाने को एक वीर क्या खो...